One Nation, , वन इलेक्शन को लेकर बढ़ी हलचल, JPC जल्द सौंपेगी रिपोर्ट

Update: 2026-07-13 08:45 GMT

Lucknow लखनऊ :  प्रस्तावित ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ कानून को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) देशभर में परामर्श अभियान चला रही है। इसी सिलसिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद और जेपीसी के सदस्य अनुराग ठाकुर सोमवार को लखनऊ पहुंचे। उन्होंने कहा कि समिति देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक दलों, सरकारी अधिकारियों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव ले रही है। सभी पक्षों की राय और सुझावों को शामिल करने के बाद ही विधेयक पर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

अनुराग ठाकुर ने बताया कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति कई राज्यों का दौरा कर चुकी है। इस दौरान समिति ने विभिन्न राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों से बातचीत की है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य प्रस्तावित कानून को बेहतर बनाना है, ताकि देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

भाजपा सांसद ने कहा कि मौजूदा चुनाव प्रणाली में बार-बार चुनाव होने के कारण देश में कई बार आदर्श आचार संहिता लागू होती है। इसका असर सरकारी कामकाज, विकास योजनाओं और निवेश से जुड़ी गतिविधियों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी प्रक्रिया के चलते प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है, क्योंकि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और सुरक्षा बलों को चुनावी ड्यूटी में लगाया जाता है।

उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकारों का ध्यान कई बार विकास कार्यों की बजाय चुनावी तैयारियों पर केंद्रित हो जाता है। ऐसे में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था से समय और संसाधनों की बचत हो सकती है। इसके अलावा चुनावी खर्च में कमी आने की संभावना भी जताई जा रही है।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर देश के राजनीतिक दलों के विचार अलग-अलग हैं। कुछ दल इस व्यवस्था का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ राजनीतिक दलों ने इसे लेकर अपनी आशंकाएं भी जाहिर की हैं। उन्होंने कहा कि समिति सभी पक्षों की बात को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रही है।

उन्होंने बताया कि कुछ दलों का तर्क है कि यदि पूरे देश में एक साथ चुनाव होते हैं तो राष्ट्रीय मुद्दे चुनावी चर्चा में अधिक प्रभावी हो सकते हैं और क्षेत्रीय मुद्दों को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाएगा। वहीं, इस पहल के समर्थकों का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने से चुनावी खर्च कम होगा और प्रशासनिक कामकाज अधिक सुचारू रूप से चल सकेगा।

भाजपा नेता ने कहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन के समर्थन में कई आंकड़े और तर्क मौजूद हैं, लेकिन समिति का उद्देश्य किसी एक पक्ष के विचार को आगे बढ़ाना नहीं बल्कि सभी सुझावों का अध्ययन कर एक संतुलित रिपोर्ट तैयार करना है।

सूत्रों के अनुसार, संयुक्त संसदीय समिति 17 जुलाई को होने वाली बैठक में अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने और उसे स्वीकार करने की प्रक्रिया पूरी कर सकती है। इसके बाद रिपोर्ट को संसद के समक्ष पेश किया जाएगा। संसद में चर्चा और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस विधेयक के भविष्य को लेकर फैसला होगा।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर देश में लंबे समय से बहस चल रही है। समर्थकों का मानना है कि इससे चुनावी प्रक्रिया सरल होगी और सरकारी संसाधनों की बचत होगी, जबकि विरोध करने वाले दलों का कहना है कि इससे संघीय ढांचे और क्षेत्रीय मुद्दों पर असर पड़ सकता है। अब जेपीसी की रिपोर्ट के बाद इस मुद्दे पर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।

Tags:    

Similar News