गोरखपुर। महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट पर करीब पांच वर्ष पहले बनाया गया पत्थर का प्रवेश द्वार अब बेकार हो गया है। इसकी स्थिति को देखते हुए सिंचाई विभाग ने पुराने द्वार को गिराकर उसकी जगह नया प्रवेश द्वार बनाने का निर्णय लिया है। नए द्वार का निर्माण पत्थर के बजाय आरसीसी से किया जाएगा। विभाग ने निर्माण से जुड़ी प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रस्तावित द्वार पुराने द्वार की तुलना में अधिक चौड़ा, मजबूत और ऊंचा होगा।
नया प्रवेश द्वार आरसीसी से तैयार किया जाएगा, लेकिन घाट की मौजूदा वास्तुकला और आकर्षक स्वरूप को बनाए रखने के लिए इसके ऊपर नक्काशीदार पत्थर लगाए जाएंगे। इससे द्वार को मजबूती मिलने के साथ उसका पारंपरिक स्वरूप भी बरकरार रखने का प्रयास किया जाएगा। सिंचाई विभाग ने पुराने द्वार को हटाने और नए निर्माण के लिए जरूरी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट का प्रवेश द्वार पांच साल की अवधि में ही अनुपयोगी होने से इसके निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। किसी भी सार्वजनिक निर्माण के इतनी कम अवधि में खराब हो जाने से रखरखाव और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर चर्चा होना स्वाभाविक है। फिलहाल विभाग ने पुराने ढांचे की मरम्मत के बजाय इसे पूरी तरह हटाकर अधिक मजबूत आरसीसी द्वार बनाने का फैसला लिया है।
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता विकास कुमार सिंह ने बताया कि काम शुरू करा दिया गया है। विभाग द्वारा पुराने प्रवेश द्वार की स्थिति और उसे सुरक्षित तरीके से हटाने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। घाट पर लोगों की आवाजाही को देखते हुए निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी होगा।
नया द्वार पहले से अधिक चौड़ा बनाया जाएगा, जिससे घाट पर आने-जाने वाले लोगों को सुविधा मिल सकेगी। विशेष अवसरों, पर्वों और आयोजनों के दौरान घाट पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी होने की स्थिति में चौड़ा प्रवेश मार्ग भीड़ के आवागमन को आसान बना सकता है। अधिक ऊंचाई से प्रवेश द्वार का स्वरूप भव्य दिखाई देगा, जबकि आरसीसी निर्माण उसे लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने में सहायक होगा।
पुराने पत्थर के द्वार को गिराने के दौरान आसपास के हिस्से को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान देना होगा। पत्थर के बड़े हिस्सों को हटाते समय घाट पर मौजूद लोगों को निर्माण क्षेत्र से दूर रखना जरूरी है। इसके लिए निर्माण स्थल के आसपास बैरिकेडिंग और चेतावनी संबंधी व्यवस्था की जा सकती है। काम पूरा होने तक लोगों को वैकल्पिक मार्ग से प्रवेश देने की जरूरत भी पड़ सकती है।
इसी बीच घाट की तरफ बने गजीबो और अन्य निर्माणों की भी जांच शुरू कर दी गई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घाट पर मौजूद सभी गजीबो के आसपास बैरिकेडिंग करा दी गई है। इससे जांच पूरी होने तक लोगों को इन संरचनाओं के अत्यधिक करीब जाने से रोका जा सकेगा। गजीबो की वास्तविक स्थिति तकनीकी निरीक्षण के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
पुरातत्व विभाग की टीम भी घाट के निर्माणों की जांच कर रही है। टीम द्वारा घाट पर बने ढांचों, इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री और वर्तमान स्थिति का आकलन किया जा रहा है। जांच के बाद यह तय हो सकेगा कि किन संरचनाओं को मरम्मत की जरूरत है और कहां अधिक व्यापक कार्य कराया जाना आवश्यक है। रिपोर्ट मिलने तक गजीबो की बैरिकेडिंग जारी रहने की संभावना है।
घाट पर प्रवेश द्वार के साथ दूसरे निर्माणों की जांच किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुराने द्वार की स्थिति सामने आने के बाद विभाग अन्य संरचनाओं की मजबूती को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। गजीबो और दूसरे निर्माणों की समय रहते तकनीकी जांच होने से संभावित खतरों की पहचान कर आवश्यक सुधार कराया जा सकेगा।
नए आरसीसी द्वार के बाहरी हिस्से पर नक्काशीदार पत्थर लगाने की योजना से घाट की सुंदरता प्रभावित नहीं होगी। सामान्य तौर पर आरसीसी संरचनाएं अधिक मजबूत मानी जाती हैं, जबकि सजावटी पत्थर किसी भवन या प्रवेश द्वार को पारंपरिक रूप देते हैं। दोनों को मिलाकर बनाए जाने वाले नए द्वार में मजबूती और सुंदरता के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट धार्मिक और सार्वजनिक महत्व का स्थान है। यहां नियमित रूप से स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी पहुंचते हैं। ऐसे में घाट की संरचनाओं का सुरक्षित और मजबूत होना आवश्यक है। प्रवेश द्वार किसी भी सार्वजनिक स्थल की पहली पहचान होता है, इसलिए उसके निर्माण में गुणवत्ता और दीर्घकालिक मजबूती पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा।
पुराने द्वार के महज पांच साल में बेकार हो जाने के बाद नए निर्माण की गुणवत्ता पर भी लोगों की नजर रहेगी। विभाग को सुनिश्चित करना होगा कि आरसीसी ढांचे के निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन हो और सजावटी पत्थरों को सुरक्षित तरीके से लगाया जाए। भविष्य में नियमित निरीक्षण और रखरखाव की व्यवस्था भी नए द्वार की उपयोगिता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी।
फिलहाल पुराने पत्थर के द्वार को गिराने और नया आरसीसी द्वार बनाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। इसके साथ ही गजीबो तथा घाट की तरफ बने अन्य निर्माणों की तकनीकी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक मरम्मत या पुनर्निर्माण से जुड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।
सिंचाई विभाग की योजना के अनुसार नया प्रवेश द्वार पुराने द्वार से ज्यादा चौड़ा, ऊंचा और मजबूत होगा। आरसीसी से मजबूती देने के बाद उस पर नक्काशीदार पत्थर लगाकर आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा। अब लोगों की निगाह इस बात पर रहेगी कि नया निर्माण कब तक पूरा होता है और घाट की अन्य संरचनाओं की जांच में क्या स्थिति सामने आती है।