शाहजहांपुर। लंबे समय से बड़े-बड़े गड्ढों और जर्जर सतह के कारण राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बने लखनऊ-पलिया राष्ट्रीय राजमार्ग की हालत अब सुधरने लगी है। लोक निर्माण विभाग ने देर से ही सही, सड़क की मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया है। फिलहाल चिनौर से नियामतपुर के बीच काम किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि शेष हिस्सों की मरम्मत भी जल्द पूरी कराई जाएगी।
लखनऊ-पलिया राष्ट्रीय राजमार्ग शहर के अंदर से होकर गुजरता है। मार्ग के दोनों ओर घनी आबादी होने के कारण यहां वाहनों के साथ स्थानीय लोगों की आवाजाही भी अधिक रहती है। भारी और छोटे वाहनों के लगातार गुजरने के कारण सड़क का महत्व काफी अधिक है। इसके बावजूद लंबे समय से इसकी हालत खराब बनी हुई थी।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने आबादी वाले हिस्से में यातायात का दबाव कम करने के उद्देश्य से बरेली मोड़ से नियामतपुर तक बाईपास का निर्माण कराया था। बाईपास बनने के बाद शहर से गुजरने वाली करीब 15 किलोमीटर लंबी पुरानी सड़क को सात महीने पहले लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया।
सड़क के हस्तांतरण के साथ इसकी मरम्मत के लिए 21 करोड़ रुपये की राशि भी उपलब्ध कराई गई थी। इसके बावजूद तय समय पर काम शुरू नहीं हो सका। मरम्मत की जिम्मेदारी रोहित कंस्ट्रक्शन फर्म को दी गई थी, लेकिन फर्म ने काम शुरू नहीं किया। इसी देरी के कारण सड़क की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
सात महीने तक मरम्मत नहीं होने के कारण सड़क पर जगह-जगह बड़े और गहरे गड्ढे बन गए। कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। महिला थाने से चिनौर और मिश्रीपुर से हरदोई बाईपास तक का हिस्सा सबसे अधिक खराब बताया गया। इस मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क केवल नाम भर की रह गई थी।
जर्जर सड़क के कारण प्रतिदिन यात्रा करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। गड्ढों से बचने के लिए वाहन चालकों को बार-बार दिशा बदलनी पड़ती थी। खराब सड़क पर दोपहिया वाहन चलाना विशेष रूप से कठिन हो गया था। मार्ग पर वाहन धीमी गति से चलने के कारण लोगों को निर्धारित दूरी तय करने में भी अधिक समय लग रहा था।
बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और खराब हो जाती थी। पानी के कारण गड्ढों की गहराई का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता था। इससे वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता था। सड़क के किनारे रहने वाले लोग भी धूल, कीचड़ और क्षतिग्रस्त मार्ग के कारण परेशान थे।
सड़क की बदहाली का मुद्दा लगातार उठने के बाद लोक निर्माण विभाग हरकत में आया। दैनिक जागरण ने भी करीब 15 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की जर्जर स्थिति को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर के माध्यम से सड़क पर बने गड्ढों, मरम्मत में हो रही देरी और आवंटित बजट के बावजूद काम शुरू नहीं होने का मुद्दा सामने लाया गया था।
अब लोक निर्माण विभाग ने चिनौर से नियामतपुर के बीच मरम्मत शुरू करा दी है। सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक करने और गड्ढों को भरने का काम किया जा रहा है। निर्माण कार्य शुरू होने से नियमित रूप से इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों में राहत की उम्मीद जगी है।
हालांकि पूरी 15 किलोमीटर सड़क की स्थिति सुधारने में समय लग सकता है। फिलहाल काम एक हिस्से में चल रहा है, जबकि महिला थाने से चिनौर और मिश्रीपुर से हरदोई बाईपास तक के अन्य क्षतिग्रस्त हिस्सों में भी मरम्मत की आवश्यकता है। विभाग ने शेष कार्य जल्द पूरा कराने का दावा किया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि काम केवल गड्ढे भरने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सड़क की मरम्मत मजबूत और टिकाऊ तरीके से होनी चाहिए, ताकि कुछ समय बाद फिर वही स्थिति पैदा न हो। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और कार्य की नियमित निगरानी भी जरूरी मानी जा रही है।
21 करोड़ रुपये की राशि मिलने के बावजूद सात महीने तक काम शुरू न होना विभागीय व्यवस्था और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। सड़क हस्तांतरण के तुरंत बाद मरम्मत शुरू हो जाती तो इसकी हालत इतनी खराब नहीं होती। समय पर कार्य न होने से लोगों को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ी।
रोहित कंस्ट्रक्शन फर्म ने निर्धारित कार्य समय पर क्यों शुरू नहीं किया, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। विभाग ने फर्म को देरी के लिए कोई नोटिस दिया या कार्रवाई की, इसका भी स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है। अब काम शुरू होने के बाद इसकी गति और गुणवत्ता पर नजर रहेगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग का पुराना शहरी हिस्सा स्थानीय यातायात के लिए आज भी महत्वपूर्ण है। बाईपास बनने के बावजूद शहर के भीतर रहने वाले लोग, दुकानदार और स्थानीय वाहन चालक इसी सड़क का उपयोग करते हैं। इसलिए इसे लंबे समय तक खराब हालत में छोड़ना आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा गंभीर विषय है।
सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे केवल यात्रा को असुविधाजनक नहीं बनाते, बल्कि वाहनों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। गड्ढों से गुजरने पर दोपहिया वाहनों के फिसलने और चारपहिया वाहनों के अनियंत्रित होने की आशंका रहती है। रात में पर्याप्त रोशनी न होने पर खतरा और बढ़ सकता है।
लोक निर्माण विभाग के सामने अब पूरे मार्ग को जल्द सुधारने की चुनौती है। चिनौर से नियामतपुर के बीच शुरू हुआ काम पहला चरण माना जा रहा है। शेष क्षतिग्रस्त हिस्सों में मरम्मत कब शुरू होगी और पूरी सड़क कब तक तैयार होगी, इसकी स्पष्ट समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।
लोगों की अपेक्षा है कि विभाग सड़क की मरम्मत के साथ जल निकासी और सड़क किनारे की स्थिति पर भी ध्यान देगा। पानी जमा होने से सड़क की सतह जल्दी खराब हो सकती है। इसलिए टिकाऊ मरम्मत के लिए आवश्यक तकनीकी मानकों का पालन करना जरूरी होगा।
इस मार्ग की बदहाली ने सात महीने तक विभाग, ठेकेदार और उपलब्ध धनराशि के उपयोग पर प्रश्न खड़े किए। अब निर्माण शुरू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 21 करोड़ रुपये की लागत से सड़क की स्थिति कितनी बेहतर होती है और कार्य निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार पूरा होता है या नहीं।
फिलहाल चिनौर से नियामतपुर तक मरम्मत शुरू होने से वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है। विभाग ने बाकी हिस्सों का काम भी जल्द पूरा कराने का दावा किया है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि मरम्मत तेजी से पूरी हो और जर्जर हो चुके लखनऊ-पलिया राष्ट्रीय राजमार्ग के शहरी हिस्से पर आवागमन फिर सुरक्षित तथा सुगम बन सके।