पैक्स सचिव वेलफेयर सोसाइटी ने सौंपा 10 सूत्रीय मांगपत्र, बकाया कमीशन भुगतान की उठाई मांग
लखीमपुर। सहकारी समितियों के संचालन में आ रही समस्याओं और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर पैक्स सचिव वेलफेयर सोसाइटी उत्तर प्रदेश की जिला शाखा ने सहकारिता विभाग के सामने 10 सूत्रीय मांगपत्र रखा है। संगठन ने सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता को मांगपत्र सौंपकर समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि वित्तीय संकट और कर्मचारियों की व्यावहारिक समस्याओं के कारण सहकारी समितियों का नियमित कामकाज प्रभावित हो रहा है।
पैक्स सचिव वेलफेयर सोसाइटी ने चेताया है कि समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं होने से समितियों के साथ किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सहकारी समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को खाद, बीज, ऋण और फसल खरीद सहित कई सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में समितियों की वित्तीय स्थिति कमजोर होने का असर उनकी सेवाओं पर पड़ सकता है।
पात्र समितियों को धान क्रय केंद्र देने की मांग
संगठन की प्रमुख मांगों में आगामी धान खरीद के लिए क्रय केंद्र खोलने की अनुमति का मुद्दा शामिल है। मांगपत्र में कहा गया है कि जिन पात्र सहकारी संस्थाओं ने धान खरीद केंद्र के लिए आवेदन या प्रस्ताव भेजा है, उन सभी को नियमानुसार क्रय केंद्र खोलने की अनुमति दी जाए।
संगठन का कहना है कि अधिक पात्र सहकारी संस्थाओं को क्रय केंद्र की जिम्मेदारी मिलने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। इससे स्थानीय स्तर पर खरीद व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
संगठन ने मांग की है कि क्रय केंद्र आवंटन की प्रक्रिया समय रहते पूरी की जाए, ताकि धान खरीद शुरू होने पर समितियों और किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बकाया गेहूं-धान खरीद कमीशन का मुद्दा
मांगपत्र में समितियों के बकाया खरीद कमीशन को प्रमुखता से उठाया गया है। पैक्स सचिव वेलफेयर सोसाइटी का कहना है कि पीसीएफ, पीसीयू और यूपीएसएस के माध्यम से हुई धान और गेहूं खरीद के कमीशन की धनराशि विभिन्न समितियों को अभी तक नहीं मिल सकी है।
संगठन ने मांग की है कि बकाया कमीशन की पूरी धनराशि तत्काल संबंधित सहकारी समितियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जाए। कमीशन का भुगतान लंबित रहने से समितियों को अपने दैनिक खर्च और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियां पूरी करने में समस्या होने का दावा किया गया है।
समितियों को फसल खरीद के दौरान कई तरह के खर्च उठाने पड़ते हैं। ऐसे में कमीशन का समय पर भुगतान नहीं होने से उनकी कार्यशील पूंजी प्रभावित हो सकती है।
वित्तीय संकट से कामकाज प्रभावित होने का दावा
पैक्स सचिव वेलफेयर सोसाइटी ने कहा है कि सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति मजबूत रखना जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में समितियों पर कई तरह की जिम्मेदारियां होती हैं, लेकिन समय पर भुगतान नहीं मिलने से कर्मचारियों और समिति प्रबंधन को व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
संगठन के अनुसार, समितियों को लंबित भुगतान मिलने पर दैनिक कामकाज के साथ किसानों को दी जाने वाली सेवाओं को भी बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
वहीं कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं होने से कार्य व्यवस्था पर असर पड़ने की बात भी मांगपत्र में कही गई है। संगठन ने अधिकारियों से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया है।
किसानों से सीधे जुड़ी हैं सहकारी समितियां
ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियां यानी पैक्स किसानों और सहकारिता व्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करती हैं। किसानों को विभिन्न योजनाओं और कृषि संबंधी सेवाओं का लाभ पहुंचाने में इन समितियों की भूमिका रहती है।
धान और गेहूं की सरकारी खरीद के दौरान भी सहकारी संस्थाओं को क्रय केंद्र की जिम्मेदारी दी जाती है। स्थानीय स्तर पर क्रय केंद्र उपलब्ध होने से किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा मिलती है।
इसी आधार पर संगठन का कहना है कि पात्र सहकारी संस्थाओं को धान खरीद केंद्र की अनुमति देने से किसानों को फायदा होगा और सरकारी खरीद व्यवस्था में समितियों की भागीदारी भी बनी रहेगी।
समय पर भुगतान की मांग
संगठन ने खरीद एजेंसियों से संबंधित लंबित कमीशन को समितियों की आर्थिक स्थिति से जोड़ा है। पदाधिकारियों का कहना है कि समितियां खरीद प्रक्रिया के दौरान अपने स्तर पर संसाधनों और कर्मचारियों की व्यवस्था करती हैं। इसके बाद कमीशन की राशि लंबे समय तक अटकी रहने पर वित्तीय दबाव बढ़ता है।
इसी वजह से पीसीएफ, पीसीयू और यूपीएसएस में लंबित धान एवं गेहूं खरीद कमीशन को जल्द जारी करने की मांग की गई है।
संगठन चाहता है कि भुगतान की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो और जिस समिति का जितना भुगतान लंबित है, उसकी जांच कर निर्धारित धनराशि संबंधित खाते में भेजी जाए।
कर्मचारियों की समस्याओं का भी उठाया मुद्दा
10 सूत्रीय मांगपत्र में सहकारी समितियों के संचालन के साथ कर्मचारियों की व्यावहारिक समस्याओं को भी शामिल किया गया है। संगठन ने कहा है कि समितियों की व्यवस्था सुचारू रखने के लिए कर्मचारियों से जुड़े मामलों का समय पर समाधान आवश्यक है।
पैक्स सचिवों और अन्य कर्मचारियों को ग्रामीण स्तर पर कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। फसल खरीद के समय काम का दबाव भी बढ़ जाता है। संगठन ने अधिकारियों से कर्मचारियों की समस्याओं पर सकारात्मक स्तर पर कार्रवाई करने की मांग की है।
हालांकि उपलब्ध जानकारी में 10 सूत्रीय मांगपत्र की सभी मांगों का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। ऐसे में अन्य मांगों को आधिकारिक मांगपत्र के आधार पर ही प्रकाशित करना उचित होगा।
जल्द समाधान की उम्मीद
पैक्स सचिव वेलफेयर सोसाइटी उत्तर प्रदेश की जिला शाखा ने सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता से मांगपत्र में उठाए गए सभी बिंदुओं पर शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
संगठन का कहना है कि धान खरीद का समय नजदीक होने के कारण पात्र समितियों को क्रय केंद्र की अनुमति देने और पुराने खरीद कमीशन का भुगतान करने जैसे मामलों का जल्द निपटारा जरूरी है।
अब संगठन की नजर सहकारिता विभाग की कार्रवाई पर है। विभाग की ओर से मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह आगे स्पष्ट होगा। फिलहाल पैक्स सचिव वेलफेयर सोसाइटी ने साफ किया है कि समितियों की वित्तीय और प्रशासनिक समस्याओं का समाधान समय पर होने से न केवल उनका संचालन बेहतर होगा, बल्कि किसानों को मिलने वाली सेवाओं को भी सुचारू रखने में मदद मिलेगी।