लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रोजगार, निवेश और किसानों के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा है। शनिवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में निवेश, उद्योग और नौकरियों की जो तस्वीर विज्ञापनों में दिखाई जा रही है, वह जमीन पर नजर नहीं आ रही। उन्होंने सरकारी नौकरियों के दावों पर तंज कसते हुए कहा कि अगर विज्ञापनों में दिखाई जा रही नौकरियों के आंकड़ों को जोड़ लिया जाए तो प्रदेश में कोई बेरोजगार ही नहीं बचना चाहिए।अखिलेश यादव का यह बयान उसी दिन आया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से विभिन्न पदों के लिए चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि अगले छह महीने के भीतर प्रदेश में एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य है। उन्होंने अपनी सरकार के करीब साढ़े नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख नियुक्ति पत्र दिए जाने का दावा भी किया।ऐसे में रोजगार को लेकर शनिवार को सत्ता पक्ष और मुख्य विपक्षी दल के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की भर्ती प्रक्रिया और आने वाली नियुक्तियों का जिक्र किया, जबकि अखिलेश यादव ने इन दावों की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े किए।
नौकरी है नहीं, निवेश आया नहीं
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य में नौकरी, निवेश और रोजगार को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविकता में युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा और निवेश के दावे भी जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे।सपा अध्यक्ष ने कहा कि निवेश और उद्योग विज्ञापनों में दिखाई दे रहे हैं, जबकि नौकरियां खबरों में दिखाई जा रही हैं। उन्होंने एक बड़े सरकारी विज्ञापन का उल्लेख करते हुए तंज किया कि अगर उसमें बताए गए रोजगार के आंकड़ों का हिसाब लगाया जाए तो उत्तर प्रदेश में कोई बेरोजगार नहीं बचना चाहिए।ये बातें अखिलेश यादव की राजनीतिक आलोचना और दावे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार इसके विपरीत सरकारी भर्तियों, निवेश प्रस्तावों और रोजगार सृजन को अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश कर रही है।
योगी ने किया एक लाख से ज्यादा नौकरियों का दावा
अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में कहा कि अगले छह महीने में एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी।मुख्यमंत्री के मुताबिक विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने पिछली समाजवादी पार्टी सरकार की भर्ती व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और अपनी सरकार में नियुक्तियों को पारदर्शी तरीके से किए जाने का दावा किया।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष गिनती करता रहे और सरकार नौकरियां देती रहेगी।इस प्रकार नौकरियों के मुद्दे पर दोनों पक्ष अलग-अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। सरकार भर्ती प्रक्रियाओं और नियुक्ति पत्रों के आंकड़े सामने रख रही है, जबकि समाजवादी पार्टी इन दावों की वास्तविक रोजगार स्थिति से तुलना करने की मांग कर रही है।
आलू किसानों का मुद्दा भी उठाया
अखिलेश यादव ने रोजगार और निवेश के साथ किसानों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकार के आलू से जुड़े विज्ञापनों पर सवाल करते हुए पूछा कि प्रदेश में आलू का कितना उत्पादन हुआ, किसानों से कितनी खरीद की गई और बजट में इसके लिए कितना पैसा रखा गया।सपा अध्यक्ष ने सरकार से यह भी बताने को कहा कि आलू किसानों को वास्तविक रूप से कितना भुगतान मिला। उन्होंने किसानों की आय और उनकी उपज की कीमत को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।किसानों से संबंधित अखिलेश यादव के ये बयान भी विपक्ष की ओर से सरकार पर लगाए गए आरोप हैं। इन दावों के मूल्यांकन के लिए सरकारी खरीद और कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।
बिजली व्यवस्था को लेकर भी साधा निशाना
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर भी भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए पर्याप्त नई उत्पादन इकाइयां नहीं लगाई गईं।उन्होंने सरकार के आयोजनों पर तंज करते हुए कहा कि प्रदेश में इस समय ज्यादा से ज्यादा दीये जलाने की प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है। उनका आरोप था कि सरकार को बिजली उत्पादन और लोगों की बुनियादी जरूरतों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।अखिलेश यादव ने जिन बिजली उत्पादन दावों का उल्लेख किया, वे उनकी राजनीतिक आलोचना का हिस्सा हैं। प्रदेश की वास्तविक स्थापित क्षमता और नई उत्पादन इकाइयों की स्थिति के लिए ऊर्जा विभाग और उत्पादन निगम के आधिकारिक आंकड़े निर्णायक होंगे।
डिजिटल मैदान में भी मुकाबले की तैयारी
सपा प्रमुख ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आने वाला राजनीतिक मुकाबला जमीन के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लड़ा जाएगा।अखिलेश यादव ने कहा कि अगर पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के लिए डिजिटल कंटेंट तैयार नहीं करेगी तो कार्यकर्ता हतोत्साहित हो सकते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा कार्यकर्ताओं की ओर से तैयार एक जवाबी वीडियो भी दिखाया गया।उन्होंने भाजपा पर नकारात्मक डिजिटल प्रचार के लिए बड़ी रकम खर्च करने का आरोप लगाया। हालांकि भाजपा की ओर से इस विशेष आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
रायबरेली की घटना का किया जिक्र
अखिलेश यादव ने रायबरेली में समाजवादी छात्र सभा से जुड़े घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 17 सितंबर को छात्र सभा के एक कार्यक्रम में भाजपा समर्थित लोगों ने बाधा डाली और पुलिस ने निष्पक्ष भूमिका नहीं निभाई।उन्होंने सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर परेशान किए जाने का मुद्दा उठाते हुए पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।यह सपा अध्यक्ष का आरोप है। संबंधित घटनाओं में पुलिस और प्रशासन का पक्ष अलग हो सकता है, इसलिए आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
PDA को लेकर भी सरकार पर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA से जुड़े लोगों को कथित रूप से परेशान किए जाने का आरोप भी लगाया।उन्होंने संतकबीरनगर में सपा सांसद लक्ष्मीकांत निषाद के वाहन पर पथराव की घटना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा और सम्मान नहीं दिया गया। अखिलेश ने आरोप लगाया कि PDA से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को दबाव में लेने की कोशिश हो रही है।भाजपा और राज्य सरकार पर लगाए गए ये आरोप समाजवादी पार्टी का राजनीतिक पक्ष हैं और संबंधित मामलों में जांच तथा प्रशासनिक पक्ष को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि अगर दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव हो सकते हैं तो उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सीधे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव नहीं लड़ती, लेकिन पार्टी की विचारधारा से जुड़े छात्र अपने स्तर पर चुनाव लड़ते हैं। उन्होंने वहां मिले समर्थन को लेकर छात्रों का आभार भी जताया।
डिजिटल लाइब्रेरी के दावे पर सवाल
सपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश में डिजिटल लाइब्रेरी को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि सरकार की ओर से हजारों ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी बनाए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी स्थिति अलग है।उन्होंने नोएडा की एक लाइब्रेरी का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां पर्याप्त किताबें और जरूरी सुविधाएं नहीं थीं।इस मामले में भी अखिलेश यादव के आरोपों और सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के बीच स्वतंत्र तथ्यात्मक तुलना जरूरी है।
कई नेताओं ने थामा सपा का दामन
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई नेताओं ने अपने समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण की। इनमें बांदा के पूर्व विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के पुत्र मयंक द्विवेदी, श्रावस्ती के नंद किशोर गिरि, पूर्व चेयरमैन जितेंद्र गुप्ता और कानपुर देहात के जुनैद शामिल रहे।अखिलेश यादव ने पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं का स्वागत किया। विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न दलों से नेताओं का सपा में आना भी प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा बन रहा है।
रोजगार पर तेज हुई सियासी लड़ाई
उत्तर प्रदेश में रोजगार और सरकारी भर्ती का मुद्दा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच प्रमुख राजनीतिक बहस बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को 818 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देते हुए अगले छह महीने में एक लाख से अधिक सरकारी नौकरियां देने की बात कही।दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने सरकार के रोजगार और निवेश संबंधी दावों को चुनौती देते हुए कहा कि इनका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने विज्ञापनों में प्रकाशित आंकड़ों को लेकर सवाल उठाया और बेरोजगारी को लेकर सरकार से जवाब मांगा।इस तरह रोजगार और निवेश पर उत्तर प्रदेश में दो अलग राजनीतिक दावे सामने हैं। भाजपा सरकार अपनी भर्ती प्रक्रिया, नियुक्तियों और निवेश को उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी वास्तविक रोजगार, निवेश के क्रियान्वयन और किसानों की स्थिति को लेकर सवाल उठा रही है। इन दावों की पूरी तस्वीर के लिए सरकारी भर्ती रिकॉर्ड, वास्तविक रूप से लागू निवेश परियोजनाओं और श्रम बाजार के आधिकारिक आंकड़ों को साथ देखकर मूल्यांकन करना जरूरी होगा।
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