आगरा। प्राकृतिक आपदा और फसल नुकसान से परेशान किसानों के लिए उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (द्वितीय) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित फसल बर्बाद होने के बावजूद मुआवजा देने से इनकार करने वाली बीमा कंपनी को आयोग ने जिम्मेदार ठहराया है।
आयोग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जनरल इंश्योरेंस कंपनी को किसान को फसल नुकसान के एवज में 1.20 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए किसान को अतिरिक्त 5 हजार रुपये देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह मामला आगरा जिले की किरावली तहसील के गांव झारौटी का है। यहां रहने वाले किसान रामगोपाल ने अपनी गेहूं की फसल को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया था। इसके लिए उन्होंने दिसंबर 2017 में 3,884 रुपये की प्रीमियम राशि जमा की थी।
किसान के अनुसार, बीमा कराने के कुछ समय बाद ही क्षेत्र में मौसम ने कहर बरपा दिया। तेज आंधी और भीषण ओलावृष्टि के कारण उनकी पूरी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। फसल नुकसान के बाद किसान ने बीमा कंपनी से नियमानुसार मुआवजे की मांग की, लेकिन कंपनी की ओर से भुगतान नहीं किया गया।
मुआवजा नहीं मिलने पर किसान ने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया। किसान ने आयोग के सामने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने नियमों के अनुसार बीमा कराया था और प्राकृतिक आपदा के कारण उनकी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई थी। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने दावा स्वीकार नहीं किया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों का अध्ययन किया। आयोग ने पाया कि किसान ने बीमा योजना के तहत जरूरी प्रक्रिया पूरी की थी और फसल नुकसान प्राकृतिक आपदा के कारण हुआ था। ऐसे में बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा देने से इनकार करना उचित नहीं था।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा योजना का उद्देश्य ही किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। यदि बीमित किसान की फसल आपदा के कारण खराब हो जाती है और वह नियमों के अनुसार दावा करता है, तो उसे उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
आयोग के फैसले को किसानों के अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को जोखिम से राहत देना है, लेकिन कई बार दावा निपटारे को लेकर किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता आयोग के फैसले किसानों के लिए राहत का माध्यम बनते हैं।
किसान रामगोपाल के मामले में आयोग ने बीमा कंपनी को न केवल फसल नुकसान की भरपाई करने का आदेश दिया, बल्कि मानसिक परेशानी के लिए भी अतिरिक्त राशि देने को कहा। आयोग ने माना कि मुआवजा न मिलने से किसान को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम में लगातार बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं के कारण फसल बीमा किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। ओलावृष्टि, बाढ़, सूखा और आंधी जैसी घटनाएं किसानों की पूरी मेहनत को कुछ ही समय में खत्म कर सकती हैं। ऐसे में बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे नियमों के तहत किसानों के दावों का निष्पक्ष निपटारा करें।
इस फैसले के बाद किसानों को उम्मीद है कि बीमा दावों से जुड़े मामलों में उन्हें अधिक राहत मिलेगी। किसान संगठनों का कहना है कि कई बार किसान फसल नुकसान के बाद मुआवजे के लिए लंबे समय तक इंतजार करते हैं। ऐसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी प्रक्रिया जरूरी है।
फिलहाल आयोग के आदेश के बाद बीमा कंपनी को निर्धारित राशि किसान को उपलब्ध करानी होगी। यह फैसला उन किसानों के लिए भी संदेश है, जो प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के बाद अपने अधिकारों के लिए कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।
किसान रामगोपाल के मामले में आया यह निर्णय फसल बीमा योजना के तहत किसानों के हितों की रक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।