विविधता का सम्मेलन व संस्कृति का परिचायक है मेला: Ramakant

Update: 2024-10-19 15:19 GMT
Kushinagar राजापाकड़/कुशीनगर: मेला विविधताओं का सम्मेलन व ग्रामीण संस्कृति के परिचायक होते हैं। मेले एवं त्योहार जहां आपसी भाईचारे की भावना को बढ़ावा देते हैं, वहीं ग्रामीण लोगों के लिए मनोरंजन का साधन भी है। यह बातें रमाकांत उर्फ स्टैंडर्ड पांडेय ने कही। वह शुक्रवार की सायं दुदही ब्लाक के दुमही देवामन दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित 33 वें दो दिवसीय शरद पूर्णिमा मेला में पहलवानों का हाथ मिला कुश्ती का शुभारंभ कर रहे थे। बीडीसी सत्येंद्र उर्फ गुड्डू शुक्ल ने कहा कि मेला संस्कृति को संजोये रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।


 


कुश्ती भारत की प्राचीन कला है। जिसमें पहलवान शारीरिक सौष्ठव व त्वरित विवेक का प्रदर्शन करता है। कुश्ती में दो दर्जन से अधिक जोड़ में पहलवानों ने अपने कला कौशल व दमखम का प्रदर्शन किया। श्रेष्ठ मुकाबलों में पडरौना के दिनेश ने लखनऊ के बादल, बगहा के कैलाश ने कौशांबी के संतलाल, प्रयागराज के संतोष ने मध्यप्रदेश के रामू, राजापाकड़ के जवाहिर ने जमुआन के अमित, बगहा के बबलू ने खोटही के खेम को हराया। तमकुहीरोड के शैलेश व फाजिलनगर के प्रदीप, रामसागर के फरदीन व फाजिलनगर के संदीप, खोटही के जितेंद्र व बगहा के बबलू के बीच मुकाबला बराबरी पर रहा। इसके पूर्व गुरुवार की सायं शरद पूर्णिमा पर देवी आराधना के साथ मेला का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं की मौजूदगी में पुजारी नगीना दास के मंत्रोच्चार के बीच लोककल्याण के निमित्त देवी की पूजा की देर रात सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। अध्यक्षता पूर्व प्रधान रामचंद्र राय ने की व संचालन प्रिंस शुक्ल ने किया। पूर्व प्रधान रामबिहारी राय, मेला समिति के अध्यक्ष हिरन तिवारी, भाजपा नेता जितेंद्र गुप्ता, पूर्व बीडीसी अनवर अंसारी, जयप्रकाश पांडेय, उपेंद्र आर्य, हरेंद्र राय, पिंकू खरवार, राजकुमार, मुकेश यादव, विजय श्रीवास्तव, चुन्नु मिश्र आदि मौजूद रहे।
Tags:    

Similar News