महंगी हुई मिठास चीनी के बढ़ते दाम से बिगड़ा रसोई का बजट
त्योहारों से पहले चीनी ने दिया झटका
बड़ौत (बागपत) : त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं के साथ व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश के बागपत में महज दो सप्ताह के भीतर खुदरा बाजार में चीनी का भाव करीब 42 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की खबर है। यानी कीमत में करीब 23 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।
चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी का सीधा असर घरों के बजट पर पड़ रहा है। चाय, मिठाई और घरेलू पकवानों में रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीनी अब लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। त्योहारों का समय नजदीक होने के कारण आने वाले दिनों में मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में चीनी महंगी रहने पर मिठाइयों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। देश के कुछ अन्य बाजारों में भी चीनी के खुदरा भाव 60 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबरें हैं।
कीमतों में तेजी के पीछे घरेलू चीनी उत्पादन में कमी और त्योहारी मांग को महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। सरकार के मुताबिक मौजूदा सीजन में उत्पादन पिछले अनुमान से कम रहने की संभावना है। सरकार ने इस दावे को भी खारिज किया है कि मौजूदा महंगाई की मुख्य वजह एथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन है। सरकारी पक्ष के अनुसार खराब मौसम और गन्ने की पैदावार में कमी ज्यादा अहम कारण हैं। व्यापारियों के लिए भी तेजी परेशानी का कारण बन गई है। थोक बाजार में भाव बढ़ने पर खुदरा विक्रेताओं को अधिक कीमत पर माल खरीदना पड़ रहा है। दूसरी ओर ग्राहक पुराने भाव पर चीनी की उम्मीद कर रहे हैं। इससे दुकानदारों के लिए कीमत और मांग के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है।
त्योहारी सीजन में चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। रक्षाबंधन, गणेश उत्सव, नवरात्र, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाई और दूसरे मीठे उत्पादों की बिक्री बढ़ती है। ऐसे समय में बाजार में उपलब्धता पर दबाव होने से कीमतों में तेजी की आशंका बनी रहती है।
सरकार ने बढ़ते दामों को देखते हुए बाजार में जमाखोरी और कृत्रिम कमी रोकने के लिए स्टॉक सीमा संबंधी नियम भी सख्त किए हैं। इसका उद्देश्य बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखना और कीमतों पर नियंत्रण पाना है। चीनी की महंगाई का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। मिठाई की दुकानें, बेकरी, होटल, रेस्टोरेंट, चाय की दुकानें और खाद्य उत्पाद बनाने वाले छोटे कारोबार भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। कच्चे माल की लागत बढ़ने पर तैयार उत्पादों के दाम बढ़ाने का दबाव पैदा हो सकता है।
अब उपभोक्ताओं और व्यापारियों की नजर आने वाले दिनों में चीनी की आपूर्ति और सरकारी कदमों पर है। यदि बाजार में उपलब्धता बढ़ती है तो कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के बीच भाव कब सामान्य होंगे, यह फिलहाल बड़ा सवाल बना हुआ है।