अयोध्या। गन्ना किसानों को अब पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ना आपूर्ति और पर्चियों को लेकर परेशान नहीं होना पड़ेगा। गन्ना विभाग इस बार ऐसी व्यवस्था तैयार कर रहा है, जिसके तहत किसान खेत में खड़ी फसल के मिल तक पहुंचने से पहले ही अपने रकबे, अनुमानित उत्पादन और संभावित आपूर्ति पर्चियों की जानकारी ऑनलाइन देख सकेंगे।
गन्ना विभाग की ओर से अंतिम कैलेंडर तैयार किया जा रहा है। इसे चीनी मिलों के संचालन से पहले केनयूपी.इन पोर्टल पर ऑनलाइन जारी किया जाएगा। इस व्यवस्था से किसानों को अपनी गन्ना आपूर्ति की योजना पहले से बनाने में मदद मिलेगी।
विभाग ने इस बार करीब 42 लाख क्विंटल गन्ना खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए लगभग 23,976 किसानों की तौल और आपूर्ति पर्चियां तैयार की जाएंगी। विभाग का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने और किसानों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
अंतिम कैलेंडर जारी करने से पहले विभाग की ओर से प्री-कैलेंडर तैयार किया जा रहा है। इसमें किसान के नाम पर दर्ज भूमि क्षेत्रफल, अनुमानित गन्ना उत्पादन और संभावित आपूर्ति पर्चियों का विवरण शामिल रहेगा।
प्री-कैलेंडर को किसानों के लिए पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। विभाग के अनुसार, 5 सितंबर तक किसानों को उनके विवरण देखने का अवसर दिया गया था। किसान अपने रिकॉर्ड की जांच कर सकें और किसी तरह की गलती होने पर समय रहते सुधार करा सकें, इसके लिए यह व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा किसानों को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सट्टा प्रदर्शन मेला भी आयोजित किया गया। 17 सितंबर को आयोजित इस मेले में किसानों को उनके गन्ना संबंधी आंकड़ों की जानकारी दी गई।
मेले के माध्यम से किसानों को ऑनलाइन समिति सदस्य बनने और उत्पादन बढ़ोतरी की रसीद कटवाने के लिए भी जानकारी दी गई। विभाग ने इसके लिए 30 सितंबर तक आवेदन करने की समय सीमा निर्धारित की है।
गन्ना विभाग का कहना है कि यदि किसी किसान के रकबे, अनुमानित उत्पादन या आपूर्ति पर्ची से जुड़े विवरण में कोई गलती मिलती है तो उसे सुधार कराने का मौका दिया जाएगा। किसान निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने रिकॉर्ड में संशोधन करा सकते हैं।
संशोधन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम कैलेंडर जारी किया जाएगा। इसके बाद किसान पोर्टल पर अपनी आपूर्ति से संबंधित जानकारी आसानी से देख सकेंगे।
गन्ना किसानों के लिए पर्ची व्यवस्था काफी महत्वपूर्ण होती है। पर्ची के आधार पर ही किसान अपनी फसल चीनी मिलों तक पहुंचाते हैं। कई बार समय पर जानकारी नहीं मिलने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नई ऑनलाइन व्यवस्था से किसानों को पहले से पता चल सकेगा कि उनकी फसल की आपूर्ति कब और कितनी मात्रा में होनी है। इससे किसान कटाई और परिवहन की बेहतर योजना बना सकेंगे।
विभाग का उद्देश्य गन्ना खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है। ऑनलाइन कैलेंडर व्यवस्था से किसानों और चीनी मिलों के बीच समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।
किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे पोर्टल पर उपलब्ध अपने विवरण की जांच जरूर करें। किसी भी तरह की त्रुटि मिलने पर समय सीमा के भीतर संबंधित विभाग या समिति के माध्यम से सुधार कराएं।
पेराई सत्र शुरू होने से पहले अंतिम कैलेंडर जारी होने के बाद किसानों को अपनी गन्ना आपूर्ति की पूरी जानकारी उपलब्ध हो जाएगी। इससे पर्ची को लेकर असमंजस कम होगा और गन्ना खरीद प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने में मदद मिलेगी।