विद्यार्थियों का लक्ष्य सिर्फ डिग्री नहीं, चरित्र निर्माण भी होना चाहिए: Governor

Update: 2026-08-05 08:37 GMT

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विद्यार्थियों का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने चरित्र, व्यक्तित्व और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी निर्माण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी उपयोगी और सार्थक होता है, जब उसका इस्तेमाल समाज और राष्ट्र के हित में किया जाए।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के युवा देश के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है।

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के सामने कई अवसर उपलब्ध हैं। उन्हें अपनी शिक्षा का उपयोग नई सोच, नवाचार और समाज की समस्याओं के समाधान के लिए करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी क्षमताओं को पहचानें और देश के विकास में सक्रिय योगदान दें।

राज्यपाल ने विशेष रूप से बेटियों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भारत के विकास में महिलाओं और बेटियों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं और आने वाले समय में विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में उनकी भूमिका और भी बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। जब महिलाएं शिक्षित और सशक्त होती हैं तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इसलिए बेटियों की शिक्षा और उनके अवसरों को बढ़ावा देना जरूरी है।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन, मेहनत और ईमानदारी को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि नैतिक मूल्यों और अच्छे व्यवहार का विकास भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं होते, बल्कि वे युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण और विचारों को विकसित करने के केंद्र होते हैं। यहां से निकलने वाले विद्यार्थी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं।

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था में कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को बदलती दुनिया की जरूरतों के अनुसार खुद को तैयार करना होगा और नई तकनीकों का सही उपयोग करना सीखना होगा।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी शिक्षा को समाज की समस्याओं से जोड़ें। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे युवाओं की जरूरत है जो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी सोचें।

राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब युवा अपनी जिम्मेदारियों को समझेंगे और पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच रखने और लगातार सीखते रहने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को केवल ज्ञानवान नहीं बनाती, बल्कि उसे बेहतर इंसान भी बनाती है। इसलिए विद्यार्थियों को अपने व्यवहार, सोच और कार्यों में उत्कृष्टता लाने का प्रयास करना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि देश में युवाओं की संख्या बड़ी है और यह भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। यदि युवा सही दिशा में आगे बढ़ते हैं तो भारत को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करने की सलाह दी। साथ ही कहा कि सफलता के लिए मेहनत के साथ-साथ धैर्य और अनुशासन भी जरूरी है।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के इस संदेश में शिक्षा को केवल करियर तक सीमित न रखते हुए जीवन मूल्यों और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर जोर दिया गया। उन्होंने युवाओं से अपेक्षा जताई कि वे ज्ञान, कौशल और चरित्र के आधार पर देश के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करेंगे।

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