गोरखपुर : पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय उनवल की बदलती तस्वीर शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। कभी मात्र 125 विद्यार्थियों तक सीमित रहने वाला यह विद्यालय आज 344 बच्चों की चहल-पहल से गुलजार है।

विद्यालय में आए इस सकारात्मक बदलाव के पीछे शिक्षकों की मेहनत, अभिभावकों के साथ लगातार संवाद और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की मजबूत पहल रही है।

विद्यालय की इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सहायक अध्यापक नवीन त्रिपाठी को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उत्तर प्रदेश राज्य शिक्षक पुरस्कार 2025 के लिए चयनित किया गया है।

छात्र संख्या बढ़ाना थी बड़ी चुनौती

वर्ष 2018 में जब नवीन त्रिपाठी ने पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय उनवल में कार्यभार संभाला, तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती विद्यालय में छात्र संख्या बढ़ाना और अभिभावकों का विश्वास जीतना था।

उस समय विद्यालय में केवल 125 विद्यार्थी पंजीकृत थे। कई अभिभावक सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे।

नवीन त्रिपाठी ने इस चुनौती को अवसर के रूप में लिया और विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास शुरू किए।

पढ़ाई के साथ अभिभावकों से जोड़ा संवाद

नवीन त्रिपाठी ने अपनी जिम्मेदारी को केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं रखा।

उन्होंने अभिभावकों से नियमित संपर्क करना शुरू किया और उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने अभिभावकों को सरकारी विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बच्चों के भविष्य से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी।

इस प्रयास से धीरे-धीरे अभिभावकों का भरोसा बढ़ने लगा और विद्यालय में बच्चों की संख्या भी बढ़ने लगी।

शिक्षकों की टीम वर्क से बदली तस्वीर

विद्यालय के विकास में केवल एक शिक्षक का नहीं बल्कि पूरी टीम का योगदान रहा।

नवीन त्रिपाठी ने सहयोगी शिक्षकों के साथ मिलकर शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने, बच्चों की रुचि बढ़ाने और विद्यालय के वातावरण को सकारात्मक बनाने के लिए कई प्रयास किए।

शिक्षकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम रहा कि कुछ ही वर्षों में विद्यालय की छात्र संख्या 125 से बढ़कर 344 तक पहुंच गई।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर दिया जोर

विद्यालय में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए शिक्षकों ने कई स्तरों पर काम किया।

कक्षा शिक्षण को प्रभावी बनाने के साथ-साथ बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया गया।

नवीन त्रिपाठी ने बच्चों को पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने और उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए।

विद्यालय की पहचान में हुआ बदलाव

छात्र संख्या में वृद्धि के साथ विद्यालय की पहचान भी बदलने लगी।

जहां पहले सीमित संख्या में विद्यार्थी आते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में बच्चे विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

विद्यालय का वातावरण पहले से अधिक सक्रिय और सकारात्मक हुआ है।

अभिभावकों में भी सरकारी विद्यालयों के प्रति विश्वास बढ़ा है।

राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन

नवीन त्रिपाठी के इसी योगदान को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य शिक्षक पुरस्कार 2025 के लिए चुना गया है।

यह सम्मान उनके शिक्षा के प्रति समर्पण, नवाचार और विद्यालय विकास में योगदान को मान्यता देता है।

उनके चयन से विद्यालय के शिक्षकों और छात्रों में खुशी का माहौल है।

शिक्षकों के लिए बनी प्रेरणा

नवीन त्रिपाठी की कार्यशैली अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा मानी जा रही है।

उन्होंने साबित किया कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, सकारात्मक सोच और बेहतर संवाद के माध्यम से सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदली जा सकती है।

उनका मानना है कि शिक्षक की भूमिका केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि बच्चों और समाज के साथ जुड़कर शिक्षा का माहौल तैयार करना भी उसकी जिम्मेदारी है।

भविष्य में और बेहतर करने का लक्ष्य

विद्यालय परिवार अब शिक्षा के क्षेत्र में और बेहतर प्रदर्शन करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

शिक्षकों का प्रयास है कि बच्चों को आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए और विद्यालय लगातार नई उपलब्धियां हासिल करे।

पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय उनवल की यह कहानी बताती है कि मजबूत इच्छाशक्ति, मेहनत और सामूहिक प्रयासों से सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। छात्र संख्या में हुई यह वृद्धि न सिर्फ विद्यालय की सफलता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास लौटने का भी संकेत है।

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