Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आरएसएस एक राष्ट्रवादी संगठन है, जिसकी विचारधारा देश की सेवा और एकता पर आधारित है। आज पूरी दुनिया इस बात पर शोध कर रही है कि कैसे एक स्वयंसेवक आधारित संगठन देश के लिए इतना व्यापक जनसमर्थन जुटा सकता है। मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा, “आरएसएस ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर राष्ट्र निर्माण तक हर मोर्चे पर योगदान दिया है। वह किसी राजनीतिक संगठन की तरह सत्ता की लालसा में नहीं चलता, बल्कि समाज सेवा, शिक्षा, और राष्ट्रीय एकता के लिए कार्य करता है। ऐसे संगठन को प्रतिबंधित करने की बात करना देश की भावना और संस्कृति पर चोट करने जैसा है।”
उन्होंने कांग्रेस और सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी विपक्ष को राजनीतिक जमीन खिसकती दिखती है, वे आरएसएस का नाम लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करते हैं। “जो लोग स्वयं राष्ट्रहित से विमुख हैं, वे ही ऐसे संगठनों को निशाना बनाते हैं। आरएसएस की विचारधारा भारत की आत्मा में रची-बसी है, जिसे किसी भी राजनीतिक साजिश से मिटाया नहीं जा सकता,” उन्होंने कहा। दयाशंकर सिंह ने यह भी कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक किसी पहचान या पद के लिए काम नहीं करते, बल्कि राष्ट्रसेवा को ही अपना धर्म मानते हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों स्वयंसेवक बिना किसी स्वार्थ के समाज में सेवा कार्य कर रहे हैं — चाहे वह प्राकृतिक आपदा हो, शिक्षा अभियान हो या स्वच्छता मिशन।
उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस की प्रेरणा से देश में अनेक सामाजिक संस्थाएं और शिक्षण संगठन स्थापित हुए हैं, जो बिना सरकारी सहायता के भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। “आरएसएस ने हमेशा सबका साथ और सबका विकास के मंत्र को जीवन में उतारा है,” उन्होंने जोड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दयाशंकर सिंह का यह बयान उस समय आया है जब विपक्ष RSS के खिलाफ बयानबाजी तेज कर रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों ही इसे ‘राजनीतिक हथकंडा’ बताकर हमला कर रही हैं, जबकि भाजपा आरएसएस को देश की रीढ़ कहकर बचाव कर रही है।