लखनऊ। सूरज की रोशनी से बिजली उत्पादन करने के लिए लगाए गए सोलर पैनल अब बिजली विभाग के लिए हैरानी का कारण बन गए हैं। सामान्य तौर पर सोलर पैनल दिन के समय सूर्य की किरणों से बिजली बनाते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में सामने आए कुछ आंकड़ों ने ऊर्जा विभाग को चौंका दिया है। कई स्थानों पर सोलर पैनलों से रात के समय भी बिजली उत्पादन दर्ज किया गया है। ऐसे मामले एक-दो नहीं बल्कि हजारों की संख्या में सामने आए हैं।

इन असामान्य आंकड़ों को लेकर पावर कॉरपोरेशन ने गंभीरता दिखाई है। ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने सभी बिजली कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे मामलों की पहचान कर जांच करें। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर रात के समय सोलर पैनलों से बिजली उत्पादन के आंकड़े कैसे दर्ज हो रहे हैं।

दरअसल, सोलर पैनल की कार्यप्रणाली सूर्य के प्रकाश पर आधारित होती है। दिन में सूरज की किरणें सोलर सेल पर पड़ती हैं और उससे बिजली का उत्पादन होता है। रात के समय सूर्य की अनुपस्थिति में सामान्य सोलर सिस्टम बिजली उत्पादन नहीं कर सकता। ऐसे में रात में उत्पादन के आंकड़े सामने आना तकनीकी सवाल खड़े कर रहा है।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बिजली कंपनियों के डेटा सिस्टम में ऐसे कई मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें रात के समय भी सोलर उत्पादन दिखाया गया है। इससे विभाग को आशंका है कि कहीं मीटरिंग सिस्टम, डेटा रिकॉर्डिंग या अन्य तकनीकी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी तो नहीं हो रही है।

पावर कॉरपोरेशन ने सभी वितरण कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्र में लगे सोलर पैनलों के रिकॉर्ड की जांच करें। खासतौर पर उन उपभोक्ताओं और संयंत्रों की पहचान की जा रही है, जहां रात के समय बिजली उत्पादन दर्ज हुआ है। जांच के दौरान मीटर की स्थिति, रीडिंग सिस्टम, सॉफ्टवेयर रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।

अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल तकनीकी त्रुटि भी हो सकता है। कई बार स्मार्ट मीटर, डेटा ट्रांसफर सिस्टम या रिकॉर्डिंग सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण गलत आंकड़े दर्ज हो सकते हैं। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में मामले सामने आने के बाद विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर काफी जोर दिया जा रहा है। सरकार घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर संस्थानों तक सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी छतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाए हैं। ऐसे में बिजली उत्पादन के आंकड़ों की सटीकता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

यदि जांच में किसी तकनीकी गड़बड़ी का पता चलता है तो उसे जल्द ठीक किया जाएगा। वहीं अगर किसी स्तर पर गलत तरीके से आंकड़े दर्ज करने या अन्य अनियमितता की बात सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

ऊर्जा विभाग इस पूरे मामले को इसलिए भी महत्वपूर्ण मान रहा है क्योंकि सोलर ऊर्जा भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने का एक बड़ा माध्यम बन रही है। ऐसे में सोलर उत्पादन से जुड़े आंकड़े सही और पारदर्शी होना जरूरी है। गलत आंकड़े न केवल विभाग की योजना बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था पर भी असर डाल सकते हैं।

फिलहाल पावर कॉरपोरेशन ने सभी बिजली कंपनियों से रिपोर्ट मांगी है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि रात में बिजली उत्पादन दिखने के पीछे वास्तविक कारण क्या है। लेकिन इस घटना ने सोलर ऊर्जा से जुड़े डेटा सिस्टम और निगरानी व्यवस्था पर नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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