उत्तर प्रदेश : सावन के महीने में कांवड़ियों के भेष का कथित तौर पर फायदा उठाकर गांजा तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का ओडिशा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। कंधमाल सदर थाना पुलिस ने शनिवार को कार्रवाई करते हुए कांवड़ियों जैसी भगवा पोशाक पहने दो कथित तस्करों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 60 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। इसके अलावा गांजे की तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक कार को भी जब्त किया गया है। गिरफ्तार दोनों आरोपी उत्तर प्रदेश के रहने वाले बताए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अरबाज खान और करामत अली के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे कार के जरिए गांजे की बड़ी खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस को पहले से सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध कार में भारी मात्रा में मादक पदार्थ ले जाया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद कंधमाल सदर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संदिग्ध वाहन की निगरानी शुरू की।
गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने संक्षिकाता के पास नाकेबंदी की। इस दौरान संदिग्ध कार को रोककर उसकी तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान कार के अंदर छिपाकर रखा गया गांजा बरामद हुआ। जब पुलिस ने बरामद खेप का वजन किया तो उसकी मात्रा करीब 60 किलोग्राम निकली। इसके बाद पुलिस ने कार में मौजूद दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया और वाहन को भी जब्त कर लिया।
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी यात्रा के दौरान कांवड़ियों के भेष में थे। उन्होंने भगवा रंग की पोशाक पहन रखी थी। पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने कथित तौर पर इस भेष का इस्तेमाल सुरक्षा जांच से बचने और पुलिस को चकमा देने के लिए किया था। सावन के दौरान बड़ी संख्या में कांवड़िए अलग-अलग राज्यों से यात्रा करते हैं। ऐसे में आरोपियों को उम्मीद रही होगी कि कांवड़ियों की भीड़ और धार्मिक यात्रा के माहौल का फायदा उठाकर वे आसानी से एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंच जाएंगे।
हालांकि, पुलिस को मिली गुप्त सूचना के बाद उनकी योजना कामयाब नहीं हो सकी। नाकेबंदी के दौरान वाहन की जांच की गई और गांजे की खेप बरामद हो गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने गांजा कहां से हासिल किया था और इसे आगे कहां पहुंचाया जाना था।
मामले की जांच को केवल बरामद गांजे तक सीमित नहीं रखा गया है। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गांजे की खेप ओडिशा के किस इलाके से लाई गई थी और इसे उत्तर प्रदेश या किसी दूसरे राज्य में किस व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था।
जांच एजेंसियां आरोपियों के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज भी खंगाल रही हैं। इसका मतलब है कि पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गांजा सप्लाई करने वाले लोग कौन हैं और इसे हासिल करने के बाद आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। इसके अलावा आरोपियों के संपर्क में रहने वाले अन्य संदिग्ध लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि क्या अरबाज खान और करामत अली पहले भी मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल रहे हैं। उनके खिलाफ दूसरे राज्यों में कोई आपराधिक मामला दर्ज है या नहीं, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज एक्ट यानी NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि 60 किलोग्राम गांजे की इतनी बड़ी खेप केवल दो लोगों तक सीमित नहीं हो सकती और इसके पीछे अन्य लोग भी हो सकते हैं। इसलिए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर संभावित सप्लायर, रिसीवर और तस्करी नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
सावन के दौरान धार्मिक यात्राओं और कांवड़ मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी रहती है। ऐसे में कांवड़ियों के भेष में कथित मादक पदार्थ तस्करी का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां इस तरह के मामलों को लेकर और सतर्क हो सकती हैं। फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और गांजे की खेप की अंतिम डिलीवरी कहां होनी थी।