Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश। लखनऊ के थिएटर आर्टिस्ट लक्ष महेश्वरी ने कहानी कहने और लघु फिल्मों के माध्यम से सृजनात्मकता के महत्व पर अपनी बात साझा की। उन्होंने कहा कि कहानी कहने का पेशा दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे पुराना पेशा है। लक्ष महेश्वरी ने बताया, "जब नए क्रिएटर अपने विचार, आइडिया और सृजनशीलता को लघु फिल्म में पेश करते हैं, और उन्हें व्यापक दर्शक तक पहुँचने का मंच मिलता है, तो यह वास्तव में एक आशीर्वाद जैसा है। मेरे दृष्टिकोण में यह लगभग दिव्य है कि कहानियाँ इस माध्यम के जरिए इतने लोगों को छू सकती हैं और प्रेरित कर सकती हैं। 

उन्होंने यह भी कहा कि लघु फिल्मों का प्लेटफॉर्म नई प्रतिभाओं को अपनी कला और विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। यह मंच न केवल कलाकारों को अपने संदेश और कहानी लोगों तक पहुंचाने में मदद करता है, बल्कि दर्शकों को भी विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक विषयों से जोड़ता है। लक्ष महेश्वरी ने इस बात पर जोर दिया कि कहानी सुनाना सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सोचने, समझने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का भी जरिया है। लघु फिल्में नए कलाकारों के लिए अपनी पहचान बनाने और उनके सृजनात्मक विचारों को प्रदर्शित करने का एक प्रभावी तरीका हैं। 

उन्होंने कहा, "कहानियाँ लोगों के दिलों और दिमाग में छाप छोड़ती हैं। एक अच्छी कहानी न केवल भावनाओं को जागृत करती है, बल्कि दर्शकों को सोचने और अपने जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रेरित भी करती है। लक्ष महेश्वरी ने युवा कलाकारों को सलाह दी कि वे अपने सृजनात्मक विचारों को लघु फिल्मों और थिएटर के माध्यम से व्यक्त करें। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच कलाकारों के लिए एक अवसर हैं, जहां वे अपनी कला को निखार सकते हैं और व्यापक दर्शक समूह तक पहुँचा सकते हैं। इस प्रकार, लखनऊ में थिएटर आर्टिस्ट लक्ष महेश्वरी ने कहानी कहने के पेशे और लघु फिल्मों के माध्यम से सृजनात्मकता के महत्व को रेखांकित किया। उनका मानना है कि कहानियाँ समाज में जागरूकता और प्रेरणा फैलाने का एक अनमोल साधन हैं और लघु फिल्में इस प्रक्रिया को आसान और प्रभावशाली बनाती हैं।
Tags: