जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने छतरपुर में हुई चर्चित फायरिंग घटना के मामले में बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग को जमानत दे दी है। मंगलवार को जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए शालिग्राम गर्ग को 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया।

यह मामला छतरपुर में मोतीलाल कुशवाहा पर हुए कथित गोलीकांड से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, शालिग्राम गर्ग पर आरोप था कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर मोतीलाल कुशवाहा पर हमला किया था। हालांकि अदालत के आदेश के बाद अब उन्हें जमानत मिल गई है।

हाई कोर्ट में सुरक्षित रखा था फैसला

शालिग्राम गर्ग की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। मंगलवार को अदालत ने अपना निर्णय सुनाते हुए जमानत मंजूर कर ली।

अदालत के आदेश के अनुसार, शालिग्राम गर्ग को निर्धारित शर्तों के साथ रिहा किया जाएगा। जमानत प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह जेल से बाहर आ सकेंगे।

15 जुलाई 2026 को हुई थी गिरफ्तारी

मामले में पुलिस ने शालिग्राम गर्ग को 15 जुलाई 2026 को रघुराजनगर पुलिस स्टेशन की कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी के बाद उन्होंने हाई कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी। याचिका में अपनी रिहाई की मांग करते हुए उन्होंने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा था।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार किया गया, जिसके बाद हाई कोर्ट ने जमानत देने का फैसला सुनाया।

मोतीलाल कुशवाहा शूटिंग केस

यह मामला छतरपुर में हुई फायरिंग की घटना से जुड़ा है, जिसमें मोतीलाल कुशवाहा पर कथित रूप से गोली चलाने का आरोप लगाया गया था।

पुलिस के मुताबिक, घटना के दौरान शालिग्राम गर्ग और उनके साथियों पर हमला करने का आरोप लगा था। जांच के आधार पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई की थी।

हालांकि, अदालत में किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोपों की अंतिम पुष्टि सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर होती है। जमानत मिलना मामले में दोषमुक्ति नहीं माना जाता है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपी को कुछ शर्तों के साथ रिहाई होती है।

शालिग्राम गर्ग को कहा जाता है ‘छोटे सरकार’

शालिग्राम गर्ग को बागेश्वर धाम से जुड़े होने के कारण ‘छोटे सरकार’ के नाम से भी जाना जाता है। वह धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई हैं।

इस मामले के सामने आने के बाद यह घटना काफी चर्चा में रही थी। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी मामले को लेकर काफी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।

जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी

जमानत मिलने के बाद भी मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। पुलिस की जांच, अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्य और आगे की सुनवाई के आधार पर मामले की दिशा तय होगी।

अदालत में आरोपों की पुष्टि या खारिज होने का फैसला सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगा।

अदालत के आदेश के बाद बदला घटनाक्रम

शालिग्राम गर्ग की गिरफ्तारी के बाद से ही उनकी जमानत याचिका पर नजर बनी हुई थी। हाई कोर्ट के मंगलवार के आदेश के बाद अब इस मामले में नया मोड़ आया है।

50 हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहाई के आदेश के साथ अदालत ने उन्हें फिलहाल राहत दी है। हालांकि, उन्हें आगे की न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होना होगा और अदालत की ओर से तय शर्तों का पालन करना होगा।

छतरपुर फायरिंग मामला अब भी न्यायिक प्रक्रिया के तहत चल रहा है। आने वाली सुनवाइयों में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के आधार पर मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

Tags: