उत्तर प्रदेश: विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI-आठवले) ने भी राज्य में अपनी चुनावी सक्रियता बढ़ा दी है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री और आरपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रामदास आठवले ने यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी का रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी एनडीए का हिस्सा है और भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती है। इसके लिए भाजपा से चार से पांच विधानसभा सीटों की मांग की गई है।
डॉ. रामदास आठवले ने कहा कि अगर भाजपा के साथ सीट बंटवारे पर सहमति बनती है तो आरपीआई गठबंधन के तहत चुनाव मैदान में उतरेगी। लेकिन अगर पार्टी को सीटें नहीं मिलती हैं तो आरपीआई अपने दम पर उत्तर प्रदेश की 20 से 25 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी करेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बाकी सीटों पर पार्टी भाजपा का समर्थन करेगी।
लखनऊ में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान रामदास आठवले ने कहा कि आरपीआई उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि पार्टी राज्य में बड़े स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करेगी, जिससे संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती दी जा सके।
आरपीआई ने उत्तर प्रदेश में कई बड़े कार्यक्रमों की योजना बनाई है। पार्टी के अनुसार पहला बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन 13 सितंबर को मुरादाबाद में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 25 सितंबर को आगरा में कार्यकर्ता सम्मेलन होगा। वहीं दीपावली से पहले आजमगढ़ में भी एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। इसके बाद 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर लखनऊ में महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
रामदास आठवले ने दावा किया कि लखनऊ के महासम्मेलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करना चाहती है और इसके लिए लगातार कार्यकर्ताओं से संपर्क किया जा रहा है।
आरपीआई अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के मुद्दों को उठाती रही है। उन्होंने भाजपा से गठबंधन के तहत प्रतिनिधित्व की उम्मीद जताई। आठवले ने कहा कि एनडीए के अन्य सहयोगी दलों को भी पहले विधानसभा चुनावों में सीटें दी गई हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अनुप्रिया पटेल और ओमप्रकाश राजभर की पार्टियों को भी गठबंधन में जगह मिली है, उसी तरह आरपीआई को भी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में आरपीआई अपनी भूमिका निभाना चाहती है। पार्टी का मानना है कि उसके सामाजिक आधार को देखते हुए गठबंधन में उसे उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। इसी उद्देश्य से पार्टी कार्यकर्ता सम्मेलनों और संगठन विस्तार पर जोर दे रही है।
वहीं, हाल ही में हुए पेपर लीक विवाद और युवाओं के प्रदर्शन को लेकर भी रामदास आठवले ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के मुद्दे पर युवाओं में नाराजगी थी, लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के हितों को लेकर गंभीर है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में छोटे दलों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विधानसभा चुनावों में गठबंधन और सीटों के समीकरण काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में आरपीआई का 20 से 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
अब नजरें भाजपा और आरपीआई के बीच होने वाली सीटों की बातचीत पर टिकी हैं। अगर दोनों दलों के बीच सहमति बनती है तो आरपीआई एनडीए गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। वहीं, बात नहीं बनने पर पार्टी अपने उम्मीदवार उतारकर चुनावी मुकाबले में उतरने की तैयारी कर रही है।