लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। दो दिन की हल्की बारिश के बाद एक्सप्रेसवे पर दो स्थानों पर सड़क धंसने और क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया है। एक स्थान पर करीब 50 मीटर लंबा हिस्सा बैठ गया है, जबकि दूसरे स्थान पर लगभग 70 मीटर सड़क को उखाड़कर दोबारा तैयार करने का काम किया जा रहा है। बारिश के कारण मरम्मत कार्य भी बार-बार प्रभावित हो रहा है। सड़क की मौजूदा स्थिति को लेकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार एक्सप्रेसवे के 59 किलोमीटर के आसपास करीब 50 मीटर सड़क का हिस्सा बैठ गया है। सड़क की सतह असमान होने और धंसाव दिखाई देने के बाद संबंधित हिस्से में मरम्मत की जरूरत पड़ी है। वहीं 62 किलोमीटर के आसपास करीब 70 मीटर हिस्से को उखाड़कर नए सिरे से बनाने का काम किया जा रहा है। बारिश के बीच निर्माण और मरम्मत कार्य को कई बार रोकना पड़ा, जिससे काम की गति भी प्रभावित हुई है।

लखनऊ-कानपुर के बीच बेहतर और तेज सड़क संपर्क के उद्देश्य से एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है। ऐसे में निर्माण के दौरान ही सड़क के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह की समस्या सामने आने से परियोजना की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। सड़क निर्माण में मिट्टी की परत, उसकी उचित दबाई, जल निकासी और सड़क की विभिन्न परतों की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण होती है। बारिश के दौरान इनमें किसी स्तर पर कमजोरी होने पर सड़क के बैठने या धंसने जैसी समस्या सामने आ सकती है।

59 किलोमीटर पर सड़क के करीब 50 मीटर हिस्से में धंसाव के बाद संबंधित क्षेत्र में सुधार कार्य की जरूरत पड़ गई है। दूसरी ओर 62 किलोमीटर के पास स्थिति ऐसी है कि करीब 70 मीटर हिस्से को उखाड़कर दोबारा तैयार किया जा रहा है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि निर्माण के समय गुणवत्ता जांच किस स्तर पर की गई और सड़क की परत तैयार करते समय आवश्यक मानकों का पालन हुआ या नहीं।

बारिश ने मरम्मत कार्य को भी प्रभावित किया है। सड़क निर्माण और मरम्मत के कई कामों के लिए मौसम का अनुकूल होना जरूरी होता है। लगातार बारिश या अधिक नमी होने पर मिट्टी और अन्य सामग्री की उचित तरीके से दबाई और परत तैयार करने में दिक्कत आ सकती है। यही कारण है कि बारिश होने पर मरम्मत का काम रोकना पड़ा। मौसम साफ होने के बाद काम दोबारा शुरू किया जा रहा है।

लखनऊ-कानपुर मार्ग प्रदेश के सबसे व्यस्त यातायात मार्गों में शामिल है। दोनों शहर औद्योगिक, व्यावसायिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा करते हैं। इसी दबाव को कम करने और दोनों शहरों के बीच यात्रा को सुगम बनाने के उद्देश्य से एक्सप्रेसवे परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा समय कम होने और मौजूदा सड़क पर यातायात का दबाव घटने की उम्मीद है।

लेकिन एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान सड़क धंसने जैसी घटनाएं परियोजना को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। किसी भी एक्सप्रेसवे पर सामान्य सड़कों की तुलना में वाहनों की गति अधिक रहती है। इसलिए सड़क की सतह, मजबूती और निर्माण गुणवत्ता में किसी तरह की कमी भविष्य में सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। ऐसे में सड़क को यातायात के लिए पूरी तरह खोलने से पहले हर हिस्से की तकनीकी जांच और आवश्यक सुधार महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सड़क विशेषज्ञों के अनुसार किसी नए मार्ग पर धंसाव के कई कारण हो सकते हैं। इनमें मिट्टी का पर्याप्त तरीके से कॉम्पैक्शन नहीं होना, सड़क के नीचे पानी जमा होना, जल निकासी व्यवस्था में कमी और निर्माण सामग्री से जुड़ी समस्या शामिल हो सकती है। हालांकि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के प्रभावित हिस्सों में धंसाव के वास्तविक कारण का पता तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

निर्माणाधीन सड़क पर बारिश का पानी सही तरीके से नहीं निकलने की स्थिति में सड़क के नीचे की मिट्टी प्रभावित हो सकती है। इसलिए एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं में सड़क के साथ मजबूत ड्रेनेज सिस्टम भी जरूरी होता है। बारिश के दौरान किसी हिस्से में पानी जमा होने से सड़क की निचली परत कमजोर होने का खतरा रहता है। प्रभावित स्थानों की मरम्मत के दौरान इस पहलू की भी जांच जरूरी होगी।

59 और 62 किलोमीटर के पास सामने आई समस्या के बाद अब इस बात पर जोर बढ़ गया है कि केवल क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करने के बजाय आसपास के क्षेत्र की भी विस्तार से जांच की जाए। अगर किसी अन्य हिस्से में भी मिट्टी या सड़क की परत कमजोर है तो उसे परियोजना पूरी होने से पहले ठीक किया जाना जरूरी है। इससे भविष्य में सड़क धंसने की घटनाओं को रोका जा सकेगा।

बारिश के कारण फिलहाल मरम्मत कार्य की रफ्तार प्रभावित हुई है। मौसम में सुधार के साथ काम तेज होने की उम्मीद है। करीब 70 मीटर हिस्से को उखाड़कर दोबारा तैयार किया जाना बताता है कि संबंधित स्थान पर व्यापक सुधार की जरूरत पड़ी है। वहीं 50 मीटर सड़क बैठने के मामले में भी आवश्यक तकनीकी सुधार किया जाना है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजना से लाखों यात्रियों की उम्मीदें जुड़ी हैं। इसके शुरू होने से दोनों शहरों के बीच संपर्क बेहतर होने के साथ व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी फायदा मिलने की संभावना है। लेकिन सड़क के इस्तेमाल से पहले इसकी मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है।

फिलहाल दो अलग-अलग स्थानों पर सड़क धंसने और हिस्से को दोबारा बनाए जाने से निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह जरूरी है कि प्रभावित हिस्सों की तकनीकी जांच के साथ पूरी सड़क की गुणवत्ता का भी परीक्षण किया जाए। निर्माण में जहां भी कमी मिले, उसे समय रहते दूर किया जाए, ताकि एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यात्रियों को किसी तरह के जोखिम का सामना न करना पड़े।

Tags: