अहमदाबाद: गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के आसपास निर्धारित क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन की बिक्री पर प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेगा। गुजरात हाई कोर्ट की खंडपीठ ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को एकल न्यायाधीश के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके जरिए संबंधित प्रशासनिक अधिसूचना रद्द की गई थी। राज्य सरकार की तत्काल अपील पर यह आदेश आया। इससे होटल और रेस्तरां संचालकों को दिन में मिली राहत के अमल पर रोक लग गई है। हालांकि, खंडपीठ का यह अंतरिम हस्तक्षेप है। इसे प्रतिबंध की वैधता पर अंतिम निर्णय या एकल पीठ का फैसला अंतिम रूप से रद्द होना नहीं माना जाना चाहिए। 
न्यायमूर्ति निशा ठाकोर की एकल पीठ ने सोमनाथ मंदिर के निकट संचालित होटल और रेस्तरां मालिकों की याचिकाओं को स्वीकार किया था। इन याचिकाओं में मांसाहारी भोजन से संबंधित कारोबार पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती दी गई थी। आदेश आने के बाद राज्य सरकार ने उसके क्रियान्वयन पर अस्थायी रोक मांगी, लेकिन एकल पीठ ने यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया। इसके बाद सरकार ने खंडपीठ का रुख किया। इस तरह एक ही दिन में मामले में दो महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम हुए और कारोबारियों को मिली राहत फिलहाल प्रभावी नहीं हो सकी। 
मुख्य न्यायाधीश मनश रंजन पाठक और न्यायमूर्ति निर्जर देसाई की खंडपीठ ने सरकार की अपील पर सुनवाई की। अहमदाबाद मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, दोपहर में एकल पीठ का आदेश आने के बाद सरकार ने कुछ घंटों के भीतर उसे चुनौती दी। शाम को खंडपीठ ने आदेश पर स्थगन देते हुए प्रतिबंध जारी रखने का निर्देश दिया। इसका तत्काल असर यह है कि संबंधित प्रतिष्ठानों को फिलहाल लागू अधिसूचना के अनुसार ही कारोबार करना होगा। अपील में आगे की सुनवाई के बाद अदालत इस विवाद पर अन्य निर्देश दे सकती है। 
प्रतिबंध केवल मंदिर से सटी दुकानों तक सीमित बताए जाने के बजाय एक निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ा है। प्रकाशित विवरण के अनुसार, इसमें सोमनाथ महादेव मंदिर का 500 मीटर का दायरा और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली छह चिह्नित सड़कें शामिल हैं। इन क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन तैयार करने, उसका भंडारण करने और बिक्री पर रोक का उल्लेख है। संबंधित रास्ते सोमनाथ तीर्थ क्षेत्र के आवागमन से जुड़े हैं। इसलिए इस आदेश को पूरे गुजरात या पूरे वेरावल शहर में मांसाहारी भोजन पर सामान्य प्रतिबंध के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। 
होटल और रेस्तरां संचालकों का मुख्य तर्क आजीविका तथा वैध व्यवसाय करने के अधिकार से जुड़ा है। उनका कहना है कि प्रतिबंध से लंबे समय से संचालित प्रतिष्ठानों का कारोबार प्रभावित होता है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उनके यहां शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का भोजन परोसा जाता रहा है। उन्होंने व्यवसाय के साथ कर्मचारियों के रोजगार पर असर का मुद्दा भी उठाया। कारोबारियों की ओर से यह प्रश्न रखा गया कि प्रशासन किस कानूनी अधिकार के तहत उन्हें भोजन की एक श्रेणी बेचने से रोक सकता है। ये अदालत के सामने रखी गई दलीलें हैं, अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं। 
राज्य सरकार ने इसके जवाब में सोमनाथ के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर जोर दिया। सरकार का पक्ष है कि कारोबार करने की संवैधानिक स्वतंत्रता का अर्थ हर स्थान पर सभी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां करने की असीमित छूट नहीं है। उसने कहा कि तीर्थस्थल के विशेष महत्व और श्रद्धालुओं के आवागमन को ध्यान में रखकर नियमन को देखा जाना चाहिए। सरकार ने सोमनाथ को लाखों श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बताते हुए प्रतिबंध का बचाव किया। उसके अनुसार, निर्धारित तीर्थमार्गों की प्रकृति इस विवाद में महत्वपूर्ण है। 
कारोबारियों के वकील ने प्रशासनिक कार्रवाई के तरीके पर भी आपत्ति जताई। प्रकाशित रिपोर्ट में उनके हवाले से आरोप है कि कुछ प्रतिष्ठानों पर केवल शाकाहारी भोजन बेचने का दबाव बनाया गया। एक याचिकाकर्ता से इस संबंध में बयान दिलवाने का आरोप भी सामने आया। इन दावों को संबंधित पक्ष की शिकायत के रूप में ही समझा जाना चाहिए। उपलब्ध खबरों में इन आरोपों पर कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं दिया गया है। दूसरी ओर, राज्य सरकार निर्धारित क्षेत्र में प्रतिबंध को आवश्यक नियमन बताती रही है।
इस मामले का केंद्रीय प्रश्न धार्मिक महत्व वाले क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों के नियमन की सीमा है। एक तरफ प्रतिष्ठान संचालक अपने व्यवसाय और आजीविका का मुद्दा उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार स्थान के विशेष धार्मिक चरित्र का हवाला दे रही है। खंडपीठ के स्थगन से वर्तमान स्थिति स्पष्ट हुई है, लेकिन दोनों पक्षों की सभी दलीलों का अंतिम निपटारा अभी नहीं हुआ है। आगे की कार्यवाही में अधिसूचना, उसके दायरे और प्रशासन के अधिकार से संबंधित प्रश्न महत्वपूर्ण बने रहेंगे। 
फिलहाल खबर का पुष्ट निष्कर्ष यही है कि एकल पीठ से मिली राहत पर रोक लगी है और अधिसूचित क्षेत्रों में पाबंदी जारी है। अगली सुनवाई तथा अधिसूचना की तारीख को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में अंतर है, इसलिए इनकी पुष्टि मूल आदेश से आवश्यक है। किसी नई अनुमति या पूरे क्षेत्र में कारोबार शुरू करने की छूट का दावा उपलब्ध विवरण से नहीं किया जा सकता। प्रतिबंध की अंतिम वैधता पर स्थिति अदालत की आगे की कार्यवाही और आदेश से स्पष्ट होगी।
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