अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र से जुड़ी रामकोट की नित्य परिक्रमा के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुक्रवार को अयोध्या में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। वर्षगांठ के मौके पर हजारों रामभक्तों और संत-महात्माओं ने राम नाम का जयघोष करते हुए सवा कोसी परिक्रमा की। सुबह से ही रामकोट क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी और वातावरण जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजता रहा।

रामकोट की यह नित्य परिक्रमा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर समेत क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों को जोड़ती है। करीब चार किलोमीटर लंबी इस परिक्रमा में रामकोट क्षेत्र के 108 प्रमुख मंदिरों को समाहित किया गया है। इसकी नियमित शुरुआत 21 अगस्त 2025 को हुई थी। इसके बाद से पिछले एक वर्ष से संत और रामभक्त प्रतिदिन सुबह इस मार्ग पर परिक्रमा कर रहे हैं।

एक साल में बनी नियमित धार्मिक परंपरा

रामकोट की नित्य परिक्रमा शुरू होने के एक वर्ष पूरे होने पर शुक्रवार को इसका वृहद स्वरूप सामने आया। सामान्य दिनों में जहां संत और श्रद्धालु नियमित रूप से परिक्रमा करते हैं, वहीं वर्षगांठ के अवसर पर बड़ी संख्या में रामभक्त इसमें शामिल हुए।

श्रद्धालुओं ने राम नाम का जाप और जयघोष करते हुए रामजन्मभूमि क्षेत्र की परिक्रमा की। परिक्रमा मार्ग में आने वाले प्रमुख मंदिरों में दर्शन और पूजन भी किया गया।

आयोजकों के अनुसार, करीब चार किलोमीटर की यह परिक्रमा सामान्य तौर पर एक घंटे से भी कम समय में पूरी हो जाती है। प्रतिदिन सुबह होने वाली इस परिक्रमा में संतों और श्रद्धालुओं की नियमित भागीदारी रहती है।

108 प्रमुख मंदिरों को जोड़ती है परिक्रमा

रामकोट की नित्य परिक्रमा का मार्ग धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाले रामकोट क्षेत्र से होकर गुजरता है। इसमें श्रीराम जन्मभूमि मंदिर सहित क्षेत्र के 108 प्रमुख मंदिरों को शामिल किया गया है।

परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु रामजन्मभूमि के चारों ओर स्थित विभिन्न मंदिरों के दर्शन करते हुए आगे बढ़ते हैं। इसमें अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी समेत रामकोट क्षेत्र के अन्य प्रमुख मंदिर भी शामिल हैं।

इस धार्मिक यात्रा का उद्देश्य श्रद्धालुओं को रामकोट क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों से जोड़ना और नियमित रूप से धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाना है।

संत-महात्माओं ने बढ़ाया आयोजन का स्वरूप

वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित विशेष परिक्रमा में बड़ी संख्या में संत-महात्माओं ने हिस्सा लिया। ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा की अगुवाई में आयोजित इस कार्यक्रम में संतों और रामभक्तों की बड़ी भागीदारी रही।

श्रद्धालुओं ने हाथों में धार्मिक ध्वज और राम नाम का जयघोष करते हुए परिक्रमा पूरी की। जगह-जगह श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का माहौल नजर आया।

वर्षगांठ के कारण सामान्य दिनों की तुलना में परिक्रमा का स्वरूप काफी व्यापक रहा। बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने से रामकोट क्षेत्र में विशेष धार्मिक माहौल बना रहा।

राम नाम के जयघोष से गूंजा रामकोट

परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं की ओर से लगातार राम नाम का जयघोष किया गया। संत-महात्माओं के साथ आम श्रद्धालु भी भक्ति में लीन नजर आए। परिक्रमा मार्ग पर धार्मिक वातावरण के बीच लोग मंदिरों के दर्शन करते हुए आगे बढ़ते रहे।

रामभक्तों के लिए यह परिक्रमा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि रामजन्मभूमि क्षेत्र से आध्यात्मिक जुड़ाव का माध्यम भी मानी जा रही है। नियमित परिक्रमा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि इससे क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं को निरंतरता मिल रही है।

रोजाना सुबह होती है परिक्रमा

रामकोट की नित्य परिक्रमा 21 अगस्त 2025 से नियमित रूप से शुरू हुई थी। पिछले एक साल से संत और रामभक्त प्रतिदिन सुबह इस मार्ग पर परिक्रमा करते आ रहे हैं।

परिक्रमा करीब चार किलोमीटर की है और इसे एक घंटे से कम समय में पूरा किया जा सकता है। सुबह के समय होने वाली इस धार्मिक गतिविधि में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ बाहर से आने वाले रामभक्त भी हिस्सा लेते हैं।

एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने इस नियमित परिक्रमा को व्यापक स्तर पर सामने ला दिया। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने आयोजन को भव्य स्वरूप दिया।

धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रयास

अयोध्या में धार्मिक परंपराओं और तीर्थ मार्गों का विशेष महत्व रहा है। रामकोट की नित्य परिक्रमा को इसी धार्मिक परंपरा के क्रम में देखा जा रहा है। एक वर्ष से नियमित रूप से जारी इस परिक्रमा के माध्यम से रामजन्मभूमि क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों को एक धार्मिक मार्ग से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

परिक्रमा में शामिल 108 मंदिरों के कारण श्रद्धालुओं को एक ही मार्ग पर रामकोट क्षेत्र के अनेक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर मिलता है।

वर्षगांठ पर दिखा व्यापक जनसमर्थन

शुक्रवार को हजारों रामभक्तों और संतों के शामिल होने से आयोजन का स्वरूप काफी व्यापक रहा। सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। राम नाम के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने परिक्रमा मार्ग पूरा किया।

आयोजन में शामिल संतों और श्रद्धालुओं ने इसे रामभक्ति और धार्मिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर बताया। वर्षगांठ के अवसर पर परिक्रमा में शामिल लोगों की संख्या ने यह भी दिखाया कि पिछले एक वर्ष में यह नियमित धार्मिक गतिविधि श्रद्धालुओं के बीच अपनी जगह बना चुकी है।

इस तरह रामकोट की नित्य परिक्रमा के एक वर्ष पूरे होने पर अयोध्या में भक्ति और आस्था का भव्य संगम देखने को मिला। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और रामकोट क्षेत्र के 108 प्रमुख मंदिरों को जोड़ने वाली करीब चार किलोमीटर की परिक्रमा में हजारों रामभक्तों और संत-महात्माओं ने हिस्सा लिया। राम नाम के जयघोष के बीच हुई सवा कोसी परिक्रमा ने वर्षगांठ समारोह को विशेष धार्मिक रंग दे दिया। पिछले एक वर्ष से जारी यह नित्य परिक्रमा अब रामकोट क्षेत्र की नियमित धार्मिक गतिविधियों में शामिल हो चुकी है।

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