UP में अगले तीन दिन बारिश के आसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यलो अलर्ट जारी

Update: 2026-08-03 04:04 GMT

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मानसून सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में अगले तीन दिनों तक अच्छी बारिश की संभावना जताई है। विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में मॉनसूनी द्रोणी (मॉनसून ट्रफ) के सक्रिय होने के कारण गोरखपुर और बस्ती मंडल समेत आसपास के जिलों में सोमवार से बुधवार तक झमाझम बारिश होने का अनुमान है। इस दौरान कई स्थानों पर तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ वर्षा होने की भी संभावना है। मौसम विभाग ने संभावित खराब मौसम को देखते हुए संबंधित क्षेत्रों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, मानसून ट्रफ के पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय होने से वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ गई है। इसके प्रभाव से गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर और आसपास के जिलों में मध्यम से तेज बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर अल्प अवधि में भारी वर्षा भी दर्ज की जा सकती है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सोमवार से शुरू होने वाला यह वर्षा का दौर बुधवार तक जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कई जिलों में बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी। कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक भी देखने को मिल सकती है। हवा की गति बढ़ने से पेड़ों की कमजोर शाखाएं टूटने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने जैसी स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं।

मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेष रूप से किसानों, वाहन चालकों और खुले स्थानों पर कार्य करने वाले लोगों से मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने का आग्रह किया गया है। बारिश के दौरान बिजली चमकने की स्थिति में खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

गोरखपुर और बस्ती मंडल के अलावा पूर्वांचल के कई अन्य जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिल सकता है। लगातार बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न होने की आशंका है। नगर निकायों और जिला प्रशासन को जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने तथा संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, वर्षा के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा सकती है। पिछले कुछ दिनों से उमस और गर्मी से परेशान लोगों को बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है। दिन के तापमान में कमी आने के साथ मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने का अनुमान है।

बारिश का सबसे अधिक लाभ कृषि क्षेत्र को मिलने की संभावना है। धान, मक्का, गन्ना और अन्य खरीफ फसलों के लिए यह वर्षा लाभकारी मानी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर होने वाली बारिश से खेतों में नमी बनी रहेगी, जिससे फसलों की वृद्धि बेहतर होगी। हालांकि, जिन क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होगी वहां जलभराव से बचाव के लिए खेतों की जल निकासी पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी।

प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन, बिजली विभाग, सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। जिला प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रख रहा है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

यातायात विभाग ने भी लोगों को बारिश के दौरान सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की सलाह दी है। फिसलन भरी सड़कों और कम दृश्यता के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है। वाहन चालकों से निर्धारित गति सीमा का पालन करने और जलभराव वाले मार्गों से बचने का आग्रह किया गया है।

मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि यलो अलर्ट का अर्थ लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी देना है। इसका उद्देश्य संभावित खराब मौसम के प्रति पहले से आगाह करना है ताकि लोग आवश्यक सावधानियां अपना सकें। विभाग लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर नए पूर्वानुमान जारी करेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय मानसून पूरी तरह सक्रिय है और वातावरण में नमी पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। यदि मौसम प्रणाली और अधिक मजबूत होती है तो कुछ स्थानों पर भारी वर्षा भी दर्ज की जा सकती है।

फिलहाल मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी आधिकारिक बुलेटिन पर नजर रखें, अफवाहों से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। अगले तीन दिनों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का दौर बना रहने की संभावना है, जिससे एक ओर लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी तो दूसरी ओर प्रशासन को संभावित जलभराव और अन्य चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्क रहना होगा।

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