उत्तर प्रदेश :  सहारनपुर में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लगातार बारिश के कारण एक्सप्रेसवे के किनारे की मिट्टी बह गई, जिससे कई जगह सड़क का बाहरी हिस्सा कमजोर हो गया है। हालात यह हैं कि कई स्थानों पर गार्ड रेल के नीचे की जमीन पूरी तरह खोखली हो गई और रेलिंग हवा में झूलती नजर आ रही है।
जानकारी के मुताबिक, यह मामला सहारनपुर के छुटमलपुर क्षेत्र का है। यहां करीब 500 मीटर के दायरे में कई जगहों पर बारिश के पानी से मिट्टी का तेज कटाव हुआ है। सड़क किनारे की मिट्टी बहने से गार्ड रेल को सहारा देने वाले हिस्से कमजोर हो गए हैं और उनके आसपास गहरी खाई बन गई है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे देश के बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स में शामिल है, जिसका उद्देश्य दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय को कम करना है। लेकिन उद्घाटन के कुछ समय बाद ही बारिश में सड़क किनारे हुए कटाव ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, तेज बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के किनारे पानी का बहाव बढ़ गया, जिससे मिट्टी धीरे-धीरे कटती चली गई। कई जगहों पर सर्विस रोड भी प्रभावित हुई है। सड़क किनारे बने गड्ढों के कारण वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है, खासकर रात के समय हादसे की आशंका बनी हुई है।
एक्सप्रेसवे पर वाहन तेज रफ्तार से चलते हैं, ऐसे में सड़क किनारे की सुरक्षा व्यवस्था का कमजोर होना गंभीर मामला माना जा रहा है। गार्ड रेल का काम वाहनों को सड़क से बाहर जाने से रोकना होता है, लेकिन जब उसके नीचे की मिट्टी ही बह जाए तो यह सुरक्षा के बजाय खतरा बन सकती है।
बताया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की टीम ने कटाव रोकने के लिए मिट्टी से भरे बोरे लगाए थे, लेकिन बारिश के बाद दोबारा मिट्टी बहने की स्थिति सामने आई। इससे अधिकारियों के सामने समस्या के स्थायी समाधान की चुनौती खड़ी हो गई है।
मामला सामने आने के बाद लोगों ने एक्सप्रेसवे के रखरखाव और निर्माण कार्यों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने ऐसे बड़े प्रोजेक्ट में बारिश से होने वाली संभावित समस्याओं को पहले से ध्यान में रखा जाना चाहिए था।
वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क किनारे मिट्टी का कटाव रोकने के लिए मजबूत ड्रेनेज सिस्टम, सही तरीके से मिट्टी की परतों का दबाव और नियमित निरीक्षण जरूरी होता है। अगर समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने अब चुनौती है कि एक्सप्रेसवे के प्रभावित हिस्सों की जल्द मरम्मत की जाए और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। तेज रफ्तार यातायात वाले इस मार्ग पर छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को आधुनिक सुविधाओं वाला हाईवे माना जा रहा था, लेकिन बारिश के बाद सामने आए ये हालात इसकी मजबूती और रखरखाव पर नई बहस खड़ी कर रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि जिम्मेदार विभाग इस समस्या को कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से दूर करते हैं।
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