बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में नगर निगम एक नई डिजिटल व्यवस्था शुरू करने जा रहा है। अब शहर के लाखों घरों को एक अलग पहचान देने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत घरों पर विशेष टैग और क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। नगर निगम का उद्देश्य शहर के भवनों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
नगर निगम की इस योजना के तहत करीब सवा दो लाख भवनों को क्यूआर कोड से जोड़ा जाएगा। इस व्यवस्था से किसी भी भवन की जानकारी कुछ ही सेकंड में हासिल की जा सकेगी। नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि इससे संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड को अपडेट रखने, शिकायतों के निपटारे और प्रशासनिक कामों में तेजी आएगी।
हर घर की बनेगी डिजिटल पहचान
नगर निगम की योजना के तहत शहर के प्रत्येक भवन को एक यूनिक टैग और क्यूआर कोड दिया जाएगा। यह कोड उस भवन की डिजिटल पहचान के रूप में काम करेगा।
क्यूआर कोड स्कैन करने पर संबंधित भवन की जरूरी जानकारी सामने आ सकेगी। इसमें भवन मालिक से जुड़ी जानकारी, संपत्ति का रिकॉर्ड और नगर निगम से संबंधित विवरण शामिल हो सकते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से कर्मचारियों को घर-घर जाकर रिकॉर्ड खोजने में समय की बचत होगी और भवनों की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
80 वार्डों में लागू होगी व्यवस्था
बरेली नगर निगम ने इस योजना को शहर के सभी 80 वार्डों में लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। पहले चरण में भवनों का सर्वे और डाटा तैयार करने का काम किया जाएगा।
इसके बाद घरों पर टैग और क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। नगर निगम का लक्ष्य है कि शहर की सभी संपत्तियों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाए, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी और तेज हो सके।
शिकायत दर्ज कराने में होगी आसानी
इस डिजिटल व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा नागरिकों को मिलने की उम्मीद है। किसी भवन या क्षेत्र से जुड़ी शिकायत दर्ज कराने पर नगर निगम कर्मचारियों को संबंधित रिकॉर्ड तुरंत मिल सकेगा।
अगर किसी संपत्ति से जुड़ी समस्या, टैक्स या अन्य नगर निगम सेवाओं से संबंधित शिकायत आती है तो क्यूआर कोड के जरिए जानकारी तक पहुंच आसान हो जाएगी।
इससे शिकायतों के समाधान में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।
संपत्ति रिकॉर्ड को किया जाएगा अपडेट
नगर निगम के लिए भी यह योजना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कई बार शहरों में भवनों का रिकॉर्ड पुराना होने या जानकारी में अंतर होने के कारण टैक्स वसूली और अन्य सेवाओं में परेशानी आती है।
क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था से भवनों का रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट किया जा सकेगा। इससे नगर निगम को अपनी संपत्तियों की बेहतर जानकारी मिलेगी।
टैक्स व्यवस्था में भी मदद मिलेगी
डिजिटल भवन पहचान प्रणाली से भविष्य में गृहकर और अन्य नगर निगम सेवाओं को भी इससे जोड़ा जा सकता है। कई शहरों में क्यूआर कोड के जरिए टैक्स भुगतान और सेवाओं को ऑनलाइन आसान बनाया जा रहा है।
नागरिक अपने भवन से जुड़ी जानकारी आसानी से देख सकेंगे और डिजिटल माध्यम से भुगतान जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
स्मार्ट सिटी की दिशा में कदम
नगर निगम की यह पहल शहर को डिजिटल और स्मार्ट बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आज के समय में देश के कई शहर प्रशासनिक कामों में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं।
क्यूआर कोड जैसी तकनीक से न केवल काम में तेजी आती है, बल्कि रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है।
लोगों को मिलेगी सुविधा
अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों की परेशानी कम करना है। पहले किसी संपत्ति से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
लोगों को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद नगर निगम की सेवाएं ज्यादा बेहतर और तेज हो सकेंगी।
नगर निगम की तैयारी तेज
बरेली नगर निगम ने इस योजना को लागू करने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। भवनों की पहचान, रिकॉर्ड तैयार करने और क्यूआर कोड लगाने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
नगर निगम का मानना है कि यह व्यवस्था आने वाले समय में शहर के प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद करेगी।
फिलहाल बरेली में करीब सवा दो लाख भवनों को डिजिटल पहचान देने की तैयारी चल रही है। घरों पर लगने वाले टैग और क्यूआर कोड से नगर निगम को बेहतर रिकॉर्ड मिलेगा और आम लोगों को भी कई सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।