खतरा महसूस होते ही गोल हो गया पैंगोलिन, वन विभाग ने किया रेस्क्यू
दुर्लभ पैंगोलिन देखकर सहमे ग्रामीण
मीरजापुर: उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले में एक बार फिर दुर्लभ वन्यजीव पैंगोलिन दिखाई दिया है। लालगंज थाना क्षेत्र के मुरघुरा गांव में रविवार देर रात पैंगोलिन एक घर में घुस गया। अचानक अनजान जीव को देखकर घर में मौजूद महिलाएं और बच्चे घबरा गए। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए।
ग्रामीणों की भीड़ बढ़ती देखकर पैंगोलिन ने अपनी खास प्राकृतिक सुरक्षा तकनीक अपनाई और खुद को पूरी तरह सिकोड़कर गेंद की तरह गोल कर लिया। पैंगोलिन के शरीर पर कठोर शल्क होते हैं, जो खतरे की स्थिति में उसके लिए कवच का काम करते हैं। यही वजह है कि किसी शिकारी या खतरे का अहसास होते ही यह अपने सिर और मुलायम हिस्सों को अंदर समेट लेता है। घटना की सूचना वन विभाग को दी गई। रेंजर श्रवण कुमार यादव के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पैंगोलिन को सावधानीपूर्वक रेस्क्यू किया। इसके बाद उसे लालगंज वन क्षेत्र के कुशियारा जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया। वन विभाग ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान वन्यजीव को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों के मुताबिक इस इलाके में पहले इस तरह का जीव देखने को नहीं मिला था। पैंगोलिन को देखने के लिए गांव में काफी भीड़ जुट गई, लेकिन लोगों ने उसे नुकसान नहीं पहुंचाया और वन विभाग को सूचना देना उचित समझा। विभाग ने भी लोगों से अपील की कि दुर्लभ वन्यजीव मिलने पर उसे पकड़ने या परेशान करने की कोशिश न करें। पैंगोलिन दुनिया के सबसे अलग दिखने वाले स्तनधारियों में शामिल है। इसके शरीर पर केराटिन से बने मजबूत शल्क होते हैं। खतरा महसूस होने पर यही शल्क इसकी रक्षा करते हैं। यह आमतौर पर शर्मीला जीव होता है और चींटियों तथा दीमक को खाता है।
विंध्य क्षेत्र में पहले भी पैंगोलिन मिलने के मामले सामने आए हैं। जुलाई 2026 में मीरजापुर के राजगढ़ थाना क्षेत्र में भी एक पैंगोलिन मिला था। वहीं फरवरी 2026 में एसटीएफ और वन विभाग ने वन्यजीव तस्करी के एक मामले में पैंगोलिन की खाल भी बरामद की थी। इससे क्षेत्र में इस दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी के साथ उसके संरक्षण की चुनौती भी सामने आती है।
पैंगोलिन अवैध वन्यजीव व्यापार का भी शिकार रहा है। इसके शल्क और शरीर के अन्य हिस्सों की अवैध मांग के कारण इस प्रजाति पर खतरा बढ़ा है। यही वजह है कि वन्यजीव विशेषज्ञ इसे देखकर तुरंत वन विभाग को सूचना देने और दूरी बनाए रखने की सलाह देते हैं। मीरजापुर की इस घटना में वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से पैंगोलिन को सुरक्षित उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। ग्रामीणों के लिए भी यह एक अनोखा अनुभव रहा, क्योंकि खतरा महसूस होते ही खुद को गेंद की तरह गोल कर लेने वाला यह जीव आमतौर पर आसानी से दिखाई नहीं देता।