अनुदेशक शिक्षकों के खाते में आएगा बकाया भुगतान

Update: 2026-07-23 15:21 GMT

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हजारों अनुदेशक शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुदेशक शिक्षकों के मानदेय और एरियर से जुड़े मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की रिव्यू याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को बरकरार रखते हुए 25 हजार से अधिक अनुदेशकों को वर्ष 2017 से लंबित मानदेय एरियर देने का रास्ता साफ कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब प्रदेश में कार्यरत अनुदेशक शिक्षकों को करीब नौ वर्ष का बकाया एरियर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि पहले दिए गए फैसले में ऐसा कोई कानूनी आधार नहीं है, जिसके कारण उसकी समीक्षा की आवश्यकता हो। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए पुराने आदेश को प्रभावी रखा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार को अब अनुदेशक शिक्षकों को 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने और वर्ष 2017 से लंबित राशि का भुगतान करने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। इससे प्रदेश के करीब 25 हजार से अधिक अनुदेशक शिक्षकों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 4 फरवरी 2026 को आदेश जारी किया था, जिसमें राज्य सरकार को निर्देश दिया गया था कि अनुदेशकों को बढ़ा हुआ मानदेय दिया जाए और पुराने बकाये का भुगतान तय समय सीमा में किया जाए। सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए रिव्यू पिटीशन दाखिल की थी, जिसे अब शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया है।

अनुदेशक शिक्षकों की ओर से मामले की पैरवी करने वाली अधिवक्ता दुर्गा तिवारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब सरकार को मूल फैसले के अनुसार भुगतान की कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने कहा कि इस फैसले से लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी।

दरअसल, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय वर्ष 2017 में बढ़ाकर 8,470 रुपये से 17 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया था। हालांकि सत्ता परिवर्तन के बाद यह बढ़ा हुआ मानदेय लागू नहीं हो सका। इसके बाद अनुदेशक शिक्षकों ने अपने अधिकारों को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

अनुदेशकों ने लखनऊ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने तत्कालीन न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की अध्यक्षता में फैसला सुनाते हुए अनुदेशकों को 17 हजार रुपये मानदेय देने और 9 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी थी।

मामला हाईकोर्ट की डबल बेंच तक पहुंचा, जहां केवल एक वर्ष के लिए बढ़े हुए मानदेय का भुगतान करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद अनुदेशक शिक्षक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। अब शीर्ष अदालत के फैसले के बाद उनका पक्ष मजबूत हो गया है और उन्हें वर्ष 2017 से लंबित एरियर मिलने की उम्मीद है।

अनुदेशक शिक्षकों का कहना है कि यह फैसला उनके वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। लंबे समय से वे बढ़े हुए मानदेय और बकाया भुगतान की मांग कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब सरकार की जिम्मेदारी होगी कि वह भुगतान की प्रक्रिया जल्द शुरू करे।

शिक्षा विभाग के जानकारों के अनुसार, इस फैसले से राज्य सरकार पर बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी आएगी, क्योंकि हजारों शिक्षकों को लंबे समय का एरियर भुगतान करना होगा। हालांकि अनुदेशक शिक्षकों के लिए यह फैसला आर्थिक सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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