बलुआघाट में देवउठनी एकादशी पर जले 1 लाख दीप, गूंजा ‘हर हर गंगे’ का जयघोष
Prayagraj प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) के अवसर पर बलुआघाट तट पर भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया। इस मौके पर एक लाख दीपकों (1 Lakh Diyas) से पूरा घाट जगमगा उठा। गंगा तट पर अद्भुत दृश्य देखने को मिला जब श्रद्धालुओं ने ‘हर हर गंगे’ और ‘जय श्रीहरि’ के जयघोष के बीच भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। इस पारंपरिक उत्सव में हजारों की संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय लोग शामिल हुए। देवउठनी एकादशी जिसे प्रबोधिनी एकादशी (Prabodhini Ekadashi) भी कहा जाता है, हिंदू परंपरा के अनुसार भगवान विष्णु के चार महीने के योगनिद्रा से जागने का दिन माना जाता है। इसी दिन से शादी-ब्याह और शुभ कार्यों की शुरुआत भी होती है।
घाटों पर उमड़ा जनसैलाब
शाम ढलते ही संगम तट और बलुआघाट पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की ओर से घाटों की सफाई, सुरक्षा और प्रकाश व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। स्वयंसेवी संस्थाओं और कॉलेज छात्रों ने दीप जलाने और सजावट में योगदान दिया। दीपों की रोशनी में पूरा बलुआघाट स्वर्णिम आभा से नहा उठा।
धार्मिक अनुष्ठान और भजन संध्या का आयोजन
इस अवसर पर भव्य आरती का आयोजन किया गया। पंडितों और आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा संपन्न कराई। शाम को आयोजित भजन संध्या में स्थानीय कलाकारों ने भक्तिमय प्रस्तुति दी। “ओ पावन गंगे मां”, “जय जय श्रीहरि” जैसे गीतों पर श्रद्धालु झूम उठे।
पर्यावरण का संदेश भी दिया गया
कार्यक्रम के आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मिट्टी के दीये ही जलाएं और प्लास्टिक का उपयोग न करें। नगर निगम के कर्मचारियों ने गंगा की सफाई अभियान के तहत दीपोत्सव के बाद घाट की सफाई का कार्य शुरू किया।
प्रशासन ने की व्यवस्था
जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पूरे आयोजन स्थल का निरीक्षण किया और सुरक्षा की कमान संभाली। घाटों पर एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें भी तैनात रहीं।
देवउठनी एकादशी के इस अवसर पर प्रयागराज की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का संगम देखने को मिला। दीपों की जगमगाहट ने यह संदेश दिया कि जब श्रद्धा और भक्ति एक साथ मिलते हैं, तो अंधकार भी प्रकाश में बदल जाता है।