गाजियाबाद। प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए गाजियाबाद में 1 अक्टूबर से ‘नो PUCC नो फ्यूल’ अभियान लागू कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUCC नहीं है, उन्हें पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल, डीजल या CNG नहीं दिया जाना है। हालांकि अभियान के पहले ही दिन तकनीकी दिक्कत सामने आ गई। बिना PUCC वाले वाहनों की पहचान के लिए खाद्य एवं रसद विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए मोबाइल ऐप ने सुबह करीब दो घंटे काम करने के बाद काम करना बंद कर दिया। इसके बाद कई पेट्रोल पंपों पर वाहनों के PUCC की जांच नहीं हो सकी और बिना जांच के ही ईंधन दिया जाने लगा।

गाजियाबाद में इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी पिछले कई सप्ताह से की जा रही थी। योजना के तहत पेट्रोल पंपों पर आने वाले वाहनों की नंबर प्लेट पढ़ने के लिए ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी ANPR कैमरे लगाए जाने थे। इन कैमरों की मदद से वाहन नंबर के आधार पर तुरंत पता लगाया जा सकता था कि संबंधित वाहन का PUCC वैध है या नहीं। हालांकि जिले के पेट्रोल पंपों पर ये कैमरे समय पर नहीं लगाए जा सके।

ANPR कैमरों की व्यवस्था नहीं होने के कारण प्रशासन ने वैकल्पिक तरीका अपनाया। खाद्य एवं रसद विभाग की ओर से एक मोबाइल ऐप तैयार किया गया, जिसके जरिए पेट्रोल पंप कर्मचारी वाहन का फोटो लेकर उसके नंबर की पहचान कर सकते हैं। इसके बाद ऐप वाहन के PUCC की स्थिति बताता है। ट्रायल के दौरान इसी ऐप का इस्तेमाल कर बिना वैध प्रमाणपत्र वाले वाहनों को चिन्हित किया गया था।

लेकिन गुरुवार को अभियान के औपचारिक रूप से शुरू होते ही तकनीकी समस्या सामने आ गई। सुबह कुछ समय तक ऐप के जरिए वाहनों की जांच की गई, लेकिन करीब दो घंटे बाद ऐप ने काम करना बंद कर दिया। इससे पेट्रोल पंप कर्मचारियों के सामने यह समस्या खड़ी हो गई कि वे वाहन का PUCC तत्काल कैसे जांचें।

ऐप बंद होने के बाद कई पंपों पर वाहन चालकों को बिना डिजिटल सत्यापन के ही पेट्रोल और डीजल दिया गया। इससे पहले दिन ही अभियान की प्रभावी निगरानी पर सवाल खड़े हो गए। यदि किसी वाहन के पास PUCC नहीं है और उसकी डिजिटल जांच संभव नहीं हो पा रही है तो पंप संचालकों के लिए उसे तुरंत पहचानना मुश्किल हो जाता है।

इस अभियान का उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण करना है। PUCC प्रमाणपत्र से यह सुनिश्चित किया जाता है कि वाहन से निकलने वाले धुएं और प्रदूषक निर्धारित सीमा के भीतर हैं। जिन वाहनों के पास वैध प्रमाणपत्र नहीं है, उन्हें अब ईंधन नहीं देने की व्यवस्था बनाई गई है। गाजियाबाद और नोएडा में यह नियम 1 अक्टूबर से लागू करने की पहले ही घोषणा की गई थी।

गाजियाबाद में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन चिन्हित किए गए थे जिनके पास वैध PUCC नहीं था। सितंबर के मध्य तक उपलब्ध आंकड़ों में जिले में 26 हजार से अधिक ऐसे वाहनों का उल्लेख किया गया था। प्रशासन ने वाहन मालिकों से पहले ही अपना प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने या उसका नवीनीकरण कराने की अपील की थी।

नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए पेट्रोल पंप कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिया गया था। उन्हें बताया गया कि ऐप के जरिए वाहन की फोटो लेकर नंबर की पहचान कैसे करनी है और PUCC की स्थिति किस तरह देखनी है। ट्रायल के दौरान कुछ वाहनों को बिना वैध PUCC के मिलने पर ईंधन देने से रोका भी गया था।

हालांकि अभियान की शुरुआत से पहले ही ANPR कैमरों की कमी को बड़ी चुनौती माना जा रहा था। जिले के पेट्रोल पंपों पर कैमरे लगाने के लिए जरूरी व्यवस्था पूरी नहीं हो सकी थी। ऐसे में पूरी व्यवस्था मोबाइल ऐप पर निर्भर हो गई। पहले दिन ऐप में खराबी आने से यही कमजोरी सामने आ गई।

पेट्रोल पंपों पर लगातार बड़ी संख्या में वाहन पहुंचते हैं। व्यस्त समय में प्रत्येक वाहन का मैनुअल तरीके से नंबर देखकर PUCC जांचना काफी मुश्किल हो सकता है। ANPR कैमरे होने पर यह काम स्वचालित तरीके से हो सकता है और वाहन के पहुंचते ही उसकी जानकारी सिस्टम पर दिखाई दे सकती है।

ऐप की तकनीकी समस्या दूर होने के बाद अभियान को दोबारा प्रभावी तरीके से लागू करने की उम्मीद है। प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि जांच प्रणाली लगातार काम करती रहे और पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों को ज्यादा देर तक इंतजार भी न करना पड़े।

नई व्यवस्था के कारण ऐसे वाहन मालिकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है जिनका PUCC समाप्त हो चुका है। उन्हें पहले प्रमाणपत्र बनवाना होगा, इसके बाद ही ईंधन मिलने की व्यवस्था है। वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने प्रमाणपत्र की वैधता पहले ही जांच लें।

गाजियाबाद एनसीआर के उन शहरों में शामिल है जहां सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण गंभीर स्तर तक पहुंच जाता है। वाहनों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में गिना जाता है। इसी कारण बिना वैध PUCC वाले वाहनों पर सख्ती बढ़ाई जा रही है।

‘नो PUCC नो फ्यूल’ नियम केवल गाजियाबाद तक सीमित नहीं है। एनसीआर के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के उपाय लागू किए जा रहे हैं। दिल्ली में भी 1 अक्टूबर से PUCC को लेकर सख्त जांच अभियान शुरू किया गया है।

फिलहाल गाजियाबाद में अभियान के पहले दिन ही तकनीकी समस्या ने पूरी व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐप बंद होने से वाहन जांच प्रभावित हुई और कई वाहनों को बिना PUCC सत्यापन के ही ईंधन मिला।

अब प्रशासन को ऐप की खराबी दूर करने के साथ स्थायी तकनीकी व्यवस्था तैयार करनी होगी। ANPR कैमरे लगाए जाने तक मोबाइल ऐप ही मुख्य विकल्प रहेगा। यदि ऐप लगातार और तेजी से काम नहीं करता है तो अभियान को प्रभावी तरीके से लागू करना मुश्किल हो सकता है।

1 अक्टूबर से लागू हुई नई व्यवस्था का असली असर आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल पहले दिन का अनुभव बताता है कि प्रदूषण रोकने की मंशा के साथ शुरू की गई योजना को जमीन पर सफल बनाने के लिए तकनीकी ढांचे को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।

Tags: