गोरखपुर। बिहार और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण हथुआ-भटनी नई रेल लाइन परियोजना को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सांसदों की ओर से संसद में मुद्दा उठाए जाने के बावजूद रेलवे की तरफ से इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कोई नई कार्यवाही नहीं की जा रही है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी में सामने आया है कि रेलवे बोर्ड ने करीब पांच साल पहले ही इस परियोजना को बंद करने की मंजूरी दे दी थी।
पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर के लोक सूचना अधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने 25 अगस्त को आरटीआई के जवाब में बताया कि भूमि अधिग्रहण में देरी और परियोजना की धीमी प्रगति के कारण रेलवे बोर्ड ने 11 अगस्त 2020 को ही हथुआ-भटनी नई रेल लाइन परियोजना को ड्रॉप करने की स्वीकृति दे दी थी।
सांसदों ने संसद में उठाया था मुद्दा
हथुआ-भटनी नई रेल लाइन परियोजना को लेकर क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से मांग रही है। इस परियोजना से बिहार के गोपालगंज क्षेत्र और उत्तर प्रदेश के भटनी क्षेत्र के बीच रेल संपर्क बेहतर होने की उम्मीद थी।
परियोजना को लेकर सांसदों की ओर से भी संसद में आवाज उठाई गई थी। लोगों को उम्मीद थी कि संसद में मुद्दा उठने के बाद रेलवे इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम उठाएगा।
हालांकि, आरटीआई के जवाब से स्पष्ट हुआ है कि रेलवे की ओर से परियोजना को दोबारा शुरू करने या आगे बढ़ाने के संबंध में कोई पत्राचार या कार्रवाई नहीं की जा रही है।
भूमि अधिग्रहण बना बड़ी वजह
रेलवे के अनुसार, परियोजना को बंद करने के पीछे सबसे बड़ा कारण भूमि अधिग्रहण में देरी और निर्माण कार्य की धीमी गति रही।
नई रेल लाइन परियोजनाओं में जमीन उपलब्ध कराना सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। जमीन नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य समय पर आगे नहीं बढ़ सका।
रेलवे बोर्ड ने सभी परिस्थितियों को देखते हुए वर्ष 2020 में इस परियोजना को ड्रॉप करने का निर्णय लिया था।
परियोजना से जुड़ी गतिविधियां बंद
आरटीआई जवाब में बताया गया है कि रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद परियोजना से संबंधित सभी गतिविधियां बंद कर दी गई हैं।
इसका मतलब है कि वर्तमान में परियोजना के सर्वे, निर्माण, भूमि अधिग्रहण या अन्य किसी भी प्रक्रिया पर काम नहीं चल रहा है।
लोगों और जनप्रतिनिधियों को अब तक इस फैसले की पूरी जानकारी नहीं थी, जिसके कारण परियोजना को लेकर उम्मीदें बनी हुई थीं।
क्षेत्र के लोगों में निराशा
हथुआ-भटनी नई रेल लाइन परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना था कि रेल संपर्क बेहतर होने से व्यापार, रोजगार और आवागमन को बढ़ावा मिलता।
परियोजना बंद होने की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र के लोगों में निराशा है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से इस रेल लाइन की मांग की जा रही थी और इसे पूरा होने की उम्मीद थी।
दो राज्यों के लिए थी महत्वपूर्ण परियोजना
हथुआ-भटनी रेल लाइन परियोजना बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
इससे यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकती थी और कई इलाकों के लोगों को लंबी दूरी की यात्रा में सुविधा होती। इसके अलावा क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना थी।
अब आगे क्या?
परियोजना को दोबारा शुरू करने के लिए अब नए सिरे से प्रयास और रेलवे बोर्ड के स्तर पर निर्णय की जरूरत होगी। इसके लिए भूमि उपलब्धता, आर्थिक व्यवहार्यता और सरकार की मंजूरी जैसे पहलुओं पर विचार करना पड़ेगा।
फिलहाल रेलवे के आरटीआई जवाब से साफ है कि पांच साल पहले ही इस परियोजना को बंद कर दिया गया था और वर्तमान में इससे जुड़ी कोई गतिविधि संचालित नहीं हो रही है।
सांसदों की ओर से संसद में मुद्दा उठाए जाने के बावजूद रेलवे की तरफ से कोई नई पहल नहीं होने से इस परियोजना का भविष्य फिलहाल अनिश्चित नजर आ रहा है।