गंगा का पानी उतरते ही दिखी बाढ़ की तबाही, बछवाड़ा में सड़कें टूटीं और जगह-जगह बने गड्ढे
बेगूसराय। गंगा नदी के जलस्तर में कमी आने के बाद बछवाड़ा प्रखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे हैं, लेकिन पानी उतरने के साथ ही बाढ़ से हुए नुकसान की तस्वीर भी सामने आ रही है। प्रखंड की चमथा पंचायत एक, दो, तीन, विशनपुर और दादुपुर में सड़कों से बाढ़ का पानी उतरने लगा है। कई दिनों तक तेज बहाव और पानी में डूबी रहने के कारण कई सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कहीं सड़क टूट गई है तो कहीं ऊपरी परत उखड़ने के कारण बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।
बाढ़ का पानी कम होने के बाद स्थानीय लोगों ने राहत महसूस की है, लेकिन क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण उनकी परेशानी अभी समाप्त नहीं हुई है। कई स्थानों पर सड़क पर बने गड्ढों में पानी और कीचड़ जमा है। इसके कारण पैदल चलने वाले लोगों के साथ बाइक, साइकिल और अन्य छोटे वाहनों से आवागमन करने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ के दौरान गंगा के पानी की तेज धारा ने ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को काफी नुकसान पहुंचाया। लंबे समय तक पानी में डूबी रहने के कारण सड़क की ऊपरी परत कई जगह कमजोर होकर उखड़ गई है। कुछ स्थानों पर तेज बहाव के कारण सड़क का हिस्सा कट गया है। इससे गांवों के बीच संपर्क और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
चमथा पंचायत एक, दो और तीन के कई इलाकों में बाढ़ का पानी सड़कों से उतर चुका है। पानी कम होने के बाद सड़क पर मिट्टी, कीचड़ और गंदगी दिखाई देने लगी है। जिन स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत बह गई है, वहां वाहन चालकों को संभलकर गुजरना पड़ रहा है। कई गड्ढों में अभी भी पानी भरा होने के कारण उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है।
विशनपुर और दादुपुर में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। बाढ़ का पानी कम होने के बावजूद ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। स्थानीय स्तर पर गांवों को जोड़ने वाली सड़कों का इस्तेमाल रोजाना बड़ी संख्या में लोग करते हैं। ऐसे में सड़कें खराब होने से लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीण इलाकों में सड़कें बाजार, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने का प्रमुख माध्यम हैं। सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण आवश्यक काम से बाहर निकलने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। खासकर रात के समय पानी और कीचड़ से भरे गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं।
बाढ़ के दौरान सड़क पर पानी की तेज धार लगातार बहती रही। कई स्थानों पर पानी के दबाव के कारण सड़क के किनारे की मिट्टी कट गई। पानी उतरने के बाद अब कटाव और क्षति स्पष्ट दिखाई दे रही है। सड़क के कुछ हिस्सों में गिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री भी बाहर निकल आई है। इससे वाहनों के फिसलने और असंतुलित होने का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों के सामने अब सबसे बड़ी समस्या क्षतिग्रस्त सड़कों से सुरक्षित आवागमन की है। पानी कम होने के बाद लोग अपने सामान्य कामकाज की ओर लौट रहे हैं, लेकिन खराब सड़कों के कारण उनकी मुश्किलें बरकरार हैं। ग्रामीणों को कई जगह गड्ढों और कीचड़ के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी उतरने के बाद सफाई भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। सड़कों पर जगह-जगह मिट्टी और कीचड़ जमा है। पानी के साथ बहकर आए कचरे के कारण भी परेशानी हो रही है। कई स्थानों पर पानी पूरी तरह नहीं निकलने के कारण छोटे-बड़े गड्ढों में जलजमाव बना हुआ है।
चमथा और आसपास के इलाकों में हर दिन बड़ी संख्या में ग्रामीण इन सड़कों से आवागमन करते हैं। सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है। भारी वाहनों की आवाजाही से क्षतिग्रस्त हिस्सों के और खराब होने की आशंका भी बनी हुई है।
गंगा के जलस्तर में कमी से बाढ़ का तत्काल खतरा कम होता दिखाई दे रहा है, लेकिन बाढ़ के बाद पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने की चुनौती सामने है। पानी पूरी तरह उतरने के बाद ही सड़कों को हुए वास्तविक नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा सकेगा।
बाढ़ प्रभावित पंचायतों के लोगों की नजर अब सड़कों की मरम्मत पर है। क्षतिग्रस्त हिस्सों को जल्द ठीक किए जाने से स्थानीय लोगों को आवागमन में राहत मिल सकेगी। इसके साथ ही जिन जगहों पर सड़क कट गई है या बड़े गड्ढे बन गए हैं, वहां तत्काल मरम्मत की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
फिलहाल गंगा के जलस्तर में कमी के साथ चमथा पंचायत एक, दो, तीन, विशनपुर और दादुपुर की सड़कों से पानी उतर रहा है। पानी कम होने से लोगों को बाढ़ से राहत जरूर मिली है, लेकिन टूटी सड़कों, बड़े गड्ढों, जलजमाव और कीचड़ ने नई परेशानी खड़ी कर दी है। अब प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों की मरम्मत और सामान्य आवागमन बहाल करना प्रमुख जरूरत बन गया है।