नदी में रील बनाना पड़ा भारी, गहरे पानी में डूबने लगा युवक, स्थानीय लोगों ने बचाई जान
कुशीनगर। सोशल मीडिया के लिए रील बनाने का शौक एक युवक की जान पर भारी पड़ते-पड़ते बचा। उपनगर से सटी प्रसिद्ध बांसी नदी के शिवाघाट पर शनिवार शाम करीब पांच बजे रील बनाने पहुंचे 18 वर्षीय सूरज वर्मा नदी पार करते समय अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। युवक को पानी में संघर्ष करते देखकर मौके पर मौजूद दो स्थानीय लोगों ने बिना देर किए नदी में छलांग लगा दी और उसे बाहर निकाल लिया। गंभीर हालत में सूरज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेवरही ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक सुमही मोहन सिंह गांव निवासी 18 वर्षीय सूरज वर्मा अपने ही गांव के 15 वर्षीय भोला वर्मा के साथ शनिवार को बांसी नदी के शिवाघाट पहुंचा था। दोनों यहां सोशल मीडिया के लिए रील बनाने आए थे। शाम करीब पांच बजे दोनों घाट और नदी के आसपास वीडियो बना रहे थे।
इसी दौरान सूरज नदी पार करने लगा। शुरुआत में पानी की गहराई कम होने के कारण उसे किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं हुई, लेकिन आगे बढ़ने पर वह अचानक गहरे पानी में पहुंच गया। पानी ज्यादा होने के कारण उसका संतुलन बिगड़ गया और वह डूबने लगा।
युवक को डूबता देख नदी में कूदे स्थानीय लोग
सूरज को पानी में डूबता देखकर शिवाघाट पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। युवक खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था। इसी दौरान वहां मौजूद दो स्थानीय लोगों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल नदी में छलांग लगा दी।
दोनों लोगों ने सूरज तक पहुंचकर उसे संभाला और काफी प्रयास के बाद नदी से बाहर निकाल लिया। समय रहते मदद मिलने से उसकी जान बच गई। यदि बचाव में कुछ और देर होती तो घटना गंभीर रूप ले सकती थी।
नदी से बाहर निकालने के बाद सूरज की हालत गंभीर थी। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे संभाला और तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।
CHC सेवरही से जिला अस्पताल रेफर
सूरज को गंभीर अवस्था में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेवरही ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया। उसकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
घटना की सूचना मिलने के बाद युवक के परिवार में भी चिंता फैल गई। परिजन उसके इलाज और स्वास्थ्य की जानकारी लेने में जुट गए। वहीं गांव में भी घटना की चर्चा होने लगी।
स्थानीय लोगों की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई की वजह से युवक को समय रहते पानी से बाहर निकाला जा सका। मौके पर मौजूद लोगों ने दोनों बचावकर्ताओं की तत्परता की सराहना की।
दोस्त के साथ रील बनाने आया था शिवाघाट
बताया गया कि सूरज अपने गांव के ही 15 वर्षीय भोला वर्मा के साथ शिवाघाट पहुंचा था। सोशल मीडिया पर वीडियो और रील बनाने के लिए युवा अक्सर प्राकृतिक और खूबसूरत स्थानों का चयन करते हैं। नदी, झरने, पहाड़ और ऊंचे स्थान आकर्षक वीडियो बनाने के लिए पसंद किए जाते हैं, लेकिन थोड़ी सी असावधानी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
शिवाघाट पर भी दोनों युवक रील बनाने के उद्देश्य से आए थे। इसी दौरान नदी पार करने की कोशिश में सूरज गहरे पानी में पहुंच गया। नदी की गहराई का सही अंदाजा नहीं होने के कारण वह पानी में फंस गया।
नदियों में कई जगह पानी ऊपर से सामान्य दिखाई देता है, लेकिन कुछ कदम आगे अचानक गहराई बढ़ सकती है। तेज बहाव और नदी के तल की असमान स्थिति भी लोगों के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
रील के लिए जोखिम लेना पड़ सकता है भारी
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के साथ युवाओं में रील और वीडियो बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। कई बार अधिक व्यूज और आकर्षक वीडियो बनाने की कोशिश में युवा जोखिम भरे स्थानों तक पहुंच जाते हैं। रेलवे ट्रैक, नदी, तालाब, पहाड़, पुल और ऊंची इमारतों पर वीडियो बनाने के दौरान पहले भी दुर्घटनाएं सामने आती रही हैं।
विशेषज्ञ लगातार सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया कंटेंट के लिए किसी भी तरह का ऐसा जोखिम नहीं लेना चाहिए जिससे जान खतरे में पड़ सकती हो। खासकर नदी और तालाब में उतरने से पहले पानी की गहराई, बहाव और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी होना जरूरी है।
तैरना जानने के बावजूद नदी के गहरे पानी में उतरना खतरनाक हो सकता है। पानी के भीतर गड्ढे, कीचड़, पत्थर या अचानक तेज बहाव व्यक्ति का संतुलन बिगाड़ सकते हैं।
शिवाघाट पर मौजूद लोगों की तत्परता से बची जान
शनिवार की घटना में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका वहां मौजूद स्थानीय लोगों की रही। युवक को डूबता देखकर यदि वे केवल मदद का इंतजार करते रहते तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। दोनों स्थानीय लोगों ने तत्काल पानी में उतरकर सूरज को बाहर निकाला।
हालांकि किसी व्यक्ति को डूबते देखकर बचाव करने के लिए भी सावधानी जरूरी होती है। बिना तैराकी कौशल के सीधे पानी में उतरने से बचाव करने वाला व्यक्ति भी खतरे में पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में उपलब्ध रस्सी, लंबी लकड़ी या अन्य सुरक्षित साधनों का उपयोग किया जाना बेहतर माना जाता है।
शिवाघाट की घटना में स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण सूरज को जल्द बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया जा सका।
नदी-घाट पर बरतें सावधानी
मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने और बहाव तेज होने की संभावना रहती है। कई स्थानों पर नदी की गहराई भी सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे समय में घाटों पर घूमने या नदी में उतरने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
बच्चों और किशोरों को नदी के पास अकेले जाने से रोकना भी जरूरी है। यदि किसी स्थान पर गहरे पानी या तेज बहाव की चेतावनी दी गई है तो उसका पालन किया जाना चाहिए।
रील या फोटो बनाने के दौरान मोबाइल कैमरे पर ध्यान केंद्रित होने के कारण आसपास के खतरे नजरअंदाज हो सकते हैं। नदी किनारे फिसलन, अचानक गहराई और तेज बहाव जैसी परिस्थितियां कुछ ही सेकंड में हादसे का कारण बन सकती हैं।
स्थानीय लोगों ने पेश की मानवता की मिसाल
सूरज वर्मा की जान बचाने वाले स्थानीय लोगों की इलाके में सराहना हो रही है। उन्होंने युवक को संकट में देखकर तत्काल मदद की और उसे सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया। इसके बाद घायल युवक को अस्पताल पहुंचाने में भी लोगों ने सहयोग किया।
घटना युवाओं और अभिभावकों के लिए भी चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने के लिए सुरक्षा को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है। एक रील या वीडियो से ज्यादा महत्वपूर्ण व्यक्ति की जिंदगी है।
फिलहाल 18 वर्षीय सूरज वर्मा को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। शनिवार शाम शिवाघाट पर हुई घटना में समय रहते स्थानीय लोगों की नजर उस पर पड़ गई और तत्काल बचाव शुरू कर दिया गया। उनकी सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई के कारण एक संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई।