अमेरिका की नौकरी छोड़ मछली पालन

Update: 2026-07-15 09:45 GMT

रायबरेली: जीवन में सफलता की परिभाषा केवल एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में ऊंचा पद या लाखों का सैलरी पैकेज नहीं होती, बल्कि अपनी माटी से जुड़कर कुछ नया करने का जज्बा भी इंसान को एक नई पहचान दे सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के सुजीत चौधरी ने, जो अमेरिका की अपनी शानदार और लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर भारत लौटे और आज रायबरेली जिले में मत्स्य पालन (मछली पालन) के क्षेत्र में एक बड़े ब्रांड एंबेसडर बनकर उभरे हैं। सुजीत न केवल खुद इस व्यवसाय से हर साल लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि ग्रामीण इलाकों के दर्जनों युवाओं को सीधे तौर पर रोजगार मुहैया कराकर आत्मनिर्भर भी बना रहे हैं।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के रहने वाले सुजीत चौधरी की कहानी आज उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है जो पढ़ाई के बाद सिर्फ विदेशी नौकरियों के पीछे भागते हैं। सुजीत के मुताबिक, उन्होंने साल 2005 में बीटेक (B.Tech) की डिग्री पूरी की थी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद उनका चयन एक प्रतिष्ठित कंपनी में हो गया और वे कॉर्पोरेट जगत का हिस्सा बन गए। उनके काम और प्रतिभा को देखते हुए साल 2007 में कंपनी ने उन्हें अमेरिका भेज दिया। सुजीत ने अमेरिका जैसे विकसित देश में लगभग नौ वर्षों तक पूरी लगन के साथ काम किया, जहाँ उन्हें हर महीने लाखों रुपये का वेतन और शानदार सुख-सुविधाएं मिल रही थीं।

लाखों का पैकेज और विदेश की आरामदायक जिंदगी होने के बावजूद सुजीत का मन हमेशा अपनी मातृभूमि के लिए कुछ करने को लालायित रहता था। आखिरकार, साल 2016 में उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया और अमेरिका की नौकरी को हमेशा के लिए अलविदा कहकर भारत लौट आए। शुरुआत में उन्होंने नोएडा में एक सॉफ्टवेयर कंपनी की स्थापना की, लेकिन वे कुछ ऐसा करना चाहते थे जिसका सीधा जुड़ाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जमीनी स्तर के लोगों से हो। इसी सोच के साथ उन्होंने कृषि और मत्स्य पालन के क्षेत्र में कदम रखने का मन बनाया और रायबरेली को अपनी कर्मभूमि चुना।

रायबरेली में सुजीत चौधरी ने वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन की शुरुआत की। वर्तमान में वे लगभग 23 बड़े तालाबों में मछली पालन का कार्य कर रहे हैं। आधुनिक तौर-तरीकों, उचित प्रबंधन और उन्नत किस्म के चारे का उपयोग करने के कारण उनके तालाबों से हर साल लगभग 500 से 600 टन मछली का रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है। उनके फार्म में उत्पादित मछलियों की मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ राज्य के अन्य बड़े शहरों में भी बहुत ज्यादा है, जिससे उनका टर्नओवर करोड़ों में पहुँच गया है।

सुजीत चौधरी की इस अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग ने उन्हें जिले में मत्स्य पालन का ब्रांड एंबेसडर घोषित किया है। अब वे जिले के अन्य पारंपरिक किसानों को भी आधुनिक मछली पालन के गुर सिखा रहे हैं, ताकि उनकी आय को दोगुना किया जा सके। सुजीत का मानना है कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, बस जरूरत है तो पारंपरिक खेती से हटकर थोड़ी आधुनिक सोच और नई तकनीक अपनाने की। अमेरिका से रायबरेली के तालाबों तक का उनका यह सफर साबित करता है कि अगर दृढ़ संकल्प हो, तो अपनी ही धरती पर रहकर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए जा सकते हैं।

Tags:    

Similar News