गाजियाबाद: जेल में नौ साल से बंद 62 वर्षीय गैंगस्टर मुकेश के जुर्म स्वीकार करने पर गैंगस्टर कोर्ट ने सात साल कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश अरविंद मिश्रा ने दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत के आदेश पर जिला कारागार के जेलर ने भेजी रिपोर्ट में बताया कि मुकेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप अधिनियम तहत जेल में नौ साल नौ महीने 26 दिन रह चुका है।

मसूरी के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार सिंह ने 15 जनवरी 2002 को थाना मसूरी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि अभियुक्त मुकेश का संगठित गिरोह है। वह अन्य सहयोगी अभियुक्तों राकेश, सुरेन्द्र, विनोद व प्रदीप के साथ मिलकर सामूहिक रूप से गिरोह बनाकर अपने निजी स्वार्थ के लिए अपराध करते हैं।

आरोपियों का गिरोह संगठित होकर अनुचित भौतिक और आर्थिक लाभ अर्जित करने के लिए हत्या, लूट, डकैती, चोरी, अपहरण जैसे गंभीर अपराध करते हैं। सभी आरोपी जनता में भय व दहशत का माहौल व्याप्त कर लोक व्यवस्था अस्त व्यस्त करते हैं। जनता का कोई भी व्यक्ति भय के करण इनके खिलाफ थाने में में रिपोर्ट लिखाने व गवाही देने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है। अदालत ने गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रिया कलाप (निवारण) के अपराध में सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

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