गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मोहद्दीपुर स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल के बाथरूम में रिकॉर्डिंग मोड पर मोबाइल मिलने के मामले ने छात्राओं और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। घटना सामने आने के बाद कैंट थाना पुलिस ने जांच तेज कर दी है। गुरुवार को पुलिस टीम ने हॉस्टल पहुंचकर वहां रहने वाली छात्राओं और वार्डन आरती सिंह के बयान दर्ज किए। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मोबाइल बाथरूम में किसने रखा था और इसके पीछे उसका उद्देश्य क्या था।

घटना के बाद हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं के बीच भय का माहौल है। छात्राओं का कहना है कि जिस स्थान को पूरी तरह सुरक्षित और निजी माना जाता है, वहीं मोबाइल मिलने से वे बेहद असहज हैं। कई छात्राओं ने हॉस्टल में रहने से इनकार कर दिया है। गुरुवार शाम तक करीब 25 छात्राएं अपने परिजनों के साथ घर लौट गईं। छात्राओं के अचानक हॉस्टल छोड़ने से वहां सन्नाटा पसरा हुआ है।

बताया जा रहा है कि हॉस्टल के बाथरूम में एक मोबाइल फोन संदिग्ध अवस्था में मिला था। फोन का कैमरा रिकॉर्डिंग मोड पर चालू था। मोबाइल दिखाई देने के बाद छात्राओं ने इसकी सूचना हॉस्टल प्रबंधन को दी। मामला गंभीर होने के कारण पुलिस को भी जानकारी दी गई। कैंट थाने की पुलिस ने मोबाइल को कब्जे में लेकर उसमें मौजूद सामग्री की जांच शुरू की।

जांच के दौरान मोबाइल में कुछ आपत्तिजनक वीडियो मिलने की बात सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस ने छात्राओं की निजता को ध्यान में रखते हुए मोबाइल में मौजूद आपत्तिजनक वीडियो डिलीट कर दिए हैं। हालांकि मामले की जांच के लिए आवश्यक डिजिटल साक्ष्यों को किस रूप में सुरक्षित किया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस अब मोबाइल के स्वामित्व और उसे बाथरूम में रखने वाले व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है।

पुलिस ने गुरुवार को हॉस्टल में रहने वाली कई छात्राओं से अलग-अलग बातचीत की। उनसे पूछा गया कि मोबाइल सबसे पहले किसने देखा, वह बाथरूम में किस स्थान पर रखा था और घटना से पहले वहां किन लोगों की आवाजाही हुई थी। पुलिस ने वार्डन आरती सिंह से भी पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया है। हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था और वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

इस घटना के बाद हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्राओं के परिजनों का कहना है कि हॉस्टल में रहने वाली युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। यदि बाथरूम जैसे निजी स्थान पर कोई मोबाइल रख सकता है तो यह सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक मानी जाएगी। परिजन मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग कर रहे हैं।

घटना की जानकारी मिलने के बाद कई छात्राओं के परिजन हॉस्टल पहुंच गए। उन्होंने अपनी बेटियों से पूरे मामले की जानकारी ली और उन्हें साथ लेकर घर लौट गए। छात्राओं का कहना है कि मोबाइल मिलने के बाद वे बाथरूम और हॉस्टल के दूसरे हिस्सों में जाने से भी डर रही हैं। उन्हें आशंका है कि कहीं पहले भी इस तरह की रिकॉर्डिंग तो नहीं की गई। इसी डर के कारण कई छात्राओं ने जांच पूरी होने तक हॉस्टल नहीं लौटने का निर्णय लिया है।

पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मोबाइल किसका है। मोबाइल के सिम कार्ड, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल गतिविधियों और उससे जुड़े अन्य तकनीकी विवरणों की जांच के माध्यम से उसके मालिक की पहचान की जा सकती है। यह भी देखा जा रहा है कि मोबाइल जानबूझकर रिकॉर्डिंग के लिए रखा गया था या घटना के पीछे कोई दूसरी वजह थी। पुलिस हॉस्टल में आने-जाने वाले कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर सकती है।

मामले में छात्राओं की पहचान और निजता की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। आपत्तिजनक वीडियो या तस्वीरों को साझा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है। पुलिस की जांच में यदि यह सामने आता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर छात्राओं की रिकॉर्डिंग की तो उसके खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही यह भी जांचना आवश्यक होगा कि रिकॉर्ड किए गए वीडियो किसी अन्य मोबाइल, कंप्यूटर या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भेजे गए थे या नहीं।

हॉस्टल प्रबंधन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता भी सामने आई है। निजी स्थानों की नियमित जांच, कर्मचारियों का सत्यापन और बाहरी लोगों के प्रवेश का रिकॉर्ड रखने जैसी व्यवस्थाएं छात्राओं का भरोसा वापस लाने में मदद कर सकती हैं। फिलहाल छात्राएं और उनके परिजन पुलिस की जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी संबंधित लोगों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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