चंदौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में मुगलसराय इंस्पेक्टर के खिलाफ पुलिस प्रशासन की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। मामले में सुनील पटेल फौजी ने इंस्पेक्टर और पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एक बातचीत के दौरान आरक्षण बचाओ आंदोलन का नाम लेने के बाद उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई।

सुनील पटेल फौजी के अनुसार, वह किसी जरूरी काम से जल्दी में थे और अपनी बात जल्द सुनने के लिए इंस्पेक्टर मुगलसराय से अनुरोध किया था। उन्होंने बताया कि इसी दौरान इंस्पेक्टर ने उनसे पूछा कि इतनी जल्दी कहां जाना है।

सुनील पटेल ने बताया कि उन्होंने जवाब दिया कि वह आरक्षण की कथित अनदेखी के खिलाफ होने वाले आरक्षण बचाओ आंदोलन की तैयारी के लिए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि आंदोलन का नाम सुनते ही इंस्पेक्टर नाराज हो गए और बातचीत विवाद में बदल गई।

आरोप है कि इसके बाद इंस्पेक्टर ठाकुर विजय सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। सुनील पटेल का दावा है कि चार से पांच पुलिसकर्मियों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की, जिसमें वह घायल हो गए।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके साथ जातिसूचक टिप्पणियां भी की गईं। सुनील पटेल ने मामले की शिकायत करते हुए पुलिस प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।

मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। इंस्पेक्टर मुगलसराय के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। अधिकारियों की ओर से पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।

पुलिस विभाग का कहना है कि किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, इस मामले को लेकर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय संगठनों ने घटना की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

सुनील पटेल फौजी का कहना है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने गए थे, लेकिन उनके साथ गलत व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस जैसी जिम्मेदार संस्था में इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।

दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि किसी भी व्यक्ति के साथ कानून के खिलाफ व्यवहार नहीं होना चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मुगलसराय इंस्पेक्टर से जुड़े इस मामले के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोग इस घटना को लेकर चर्चा कर रहे हैं और जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।

जातिसूचक टिप्पणी और मारपीट के आरोपों के कारण मामला और संवेदनशील हो गया है। ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि शिकायतकर्ता की बात को गंभीरता से सुना जाए और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस प्रशासन की ओर से जल्द ही स्थिति स्पष्ट किए जाने की संभावना है। वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष कार्रवाई की मांग पर अड़ा हुआ है।

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