एटा : उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश सरकार की मंत्री **बेबी रानी मौर्य** और जिलाधिकारी (DM) अरविंद सिंह के बीच फोन नहीं उठाने को लेकर हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में मंत्री डीएम पर नाराजगी जताते हुए कहती नजर आ रही हैं कि जनप्रतिनिधियों के फोन का जवाब नहीं देना ठीक नहीं है और इस तरह व्यवस्था नहीं चल सकती।
मामला उस समय सामने आया जब मंत्री बेबी रानी मौर्य एटा में **‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’** से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं। कार्यक्रम स्थल पर डीएम अरविंद सिंह सहित जिले के कई अधिकारी मौजूद थे। जैसे ही मंत्री की नजर डीएम पर पड़ी, उन्होंने फोन नहीं उठाने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी।
डीएम को देखकर नाराज हुईं मंत्री
वायरल वीडियो में मंत्री बेबी रानी मौर्य डीएम से कहती दिखाई दे रही हैं कि उन्होंने कई बार फोन किया, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि वह कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और जरूरी जानकारी को लेकर बात करना चाहती थीं।
मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के फोन का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर संवाद ही नहीं होगा तो प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में परेशानी होगी।
वीडियो में मंत्री डीएम से यह भी पूछती नजर आईं कि आखिर ऐसी क्या वजह थी कि फोन नहीं उठाया गया। इस दौरान मौके पर कुछ देर के लिए असहज स्थिति बन गई।
बुके लेने से भी किया इनकार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्यक्रम स्थल पर डीएम ने मंत्री का स्वागत करने के लिए बुके दिया, लेकिन फोन नहीं उठाने की नाराजगी के चलते मंत्री ने उसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद डीएम ने उन्हें स्थिति समझाने की कोशिश की।
बताया गया कि मंत्री का कहना था कि वह प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी लेने के लिए फोन कर रही थीं। उनका उद्देश्य केवल कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना था।
डीएम ने दी सफाई
मामले पर डीएम अरविंद सिंह की ओर से सफाई दी गई। उन्होंने बताया कि फोन नहीं उठ पाने के पीछे कुछ कारण थे। रिपोर्ट के अनुसार, डीएम ने कहा कि उनका फोन किसी कारणवश उपलब्ध नहीं था और इसी वजह से कॉल रिसीव नहीं हो सकी।
डीएम ने यह भी कहा कि मंत्री के साथ किसी तरह का विवाद नहीं है और यह केवल गलतफहमी के कारण हुआ। बाद में दोनों के बीच बातचीत भी हुई।
वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा तेज
मंत्री और डीएम के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी एक-दूसरे के सहयोग से ही जनता से जुड़े काम बेहतर तरीके से कर सकते हैं। वहीं, कुछ लोगों ने अधिकारियों से जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से लेने की बात कही।
पहले भी उठ चुके हैं फोन नहीं उठाने के मामले
उत्तर प्रदेश में इससे पहले भी कई बार जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों के फोन नहीं उठाने को लेकर नाराजगी जताई है। सरकार की ओर से समय-समय पर अधिकारियों को निर्देश दिए जाते रहे हैं कि वे जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखें।
प्रशासनिक व्यवस्था में संवाद को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी भी जिले में योजनाओं के क्रियान्वयन और समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच लगातार संपर्क जरूरी होता है।
मंत्री ने बताई अपनी नाराजगी की वजह
बेबी रानी मौर्य ने बाद में स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी केवल फोन नहीं उठाने को लेकर थी। उन्होंने कहा कि वह जिले की व्यवस्था और कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी लेना चाहती थीं।
उन्होंने यह भी बताया कि डीएम ने बाद में उन्हें फोन नहीं उठाने की वजह बताई और मामला वहीं खत्म हो गया।
प्रशासनिक तालमेल पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सरकार की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच कितना बेहतर तालमेल जरूरी है।
जहां एक ओर मंत्री ने अधिकारियों को जवाबदेही का संदेश दिया, वहीं डीएम की ओर से भी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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