बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बेल्थरारोड तहसील क्षेत्र के पशुहारी गांव में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत के मामले में प्रारंभिक जांच में कारण सामने आया है। जांच में आशंका जताई गई है कि मौतें सत्यानाशी (Argemone mexicana) के बीज से निकले तेल के सेवन से हुईं। इस मामले में एपिडेमिक ड्रॉप्सी की पुष्टि होने के बाद परिवार के अन्य सदस्यों का इलाज जारी है और उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवार के सदस्यों की जांच कराई गई। इसके बाद एम्स गोरखपुर में हुई जांच में एपिडेमिक ड्रॉप्सी की पुष्टि हुई। चिकित्सकों के अनुसार, यह बीमारी आमतौर पर मिलावटी खाद्य तेल के सेवन से जुड़ी होती है।

परिवार के सदस्य सूरज ने बताया कि परिवार के मुखिया शिवचंद राजभर कर्नाटक के बेल्लारी में मजदूरी करते हैं। इसी वर्ष मई महीने में वह करीब आठ किलो सत्यानाशी के बीज बेल्लारी से गांव लेकर आए थे।

बताया गया कि शिवचंद पिछले करीब डेढ़ साल से घुटनों के दर्द से परेशान थे। बेल्लारी में कुछ लोगों की सलाह पर उन्होंने दर्द से राहत पाने के लिए सत्यानाशी के बीज से तेल निकालकर मालिश करने का फैसला किया था।

इसके बाद बीज से तेल निकालकर इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि इसी तेल के संपर्क या सेवन से परिवार के सदस्यों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हुईं। हालांकि, मामले की पूरी जांच स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों की निगरानी में की जा रही है।

सत्यानाशी एक जंगली पौधा है, जिसके बीजों से निकलने वाला तेल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है। इसमें पाया जाने वाला सैंग्विनेरिन (Sanguinarine) नामक तत्व शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। मिलावटी खाद्य तेल के मामलों में भी सत्यानाशी के बीज का तेल कई बार सामने आता रहा है।

एपिडेमिक ड्रॉप्सी में शरीर के कई हिस्सों में सूजन, कमजोरी, सांस लेने में परेशानी और अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

पशुहारी गांव में हुई इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया है। अधिकारियों ने मामले की जानकारी जुटाई और प्रभावित परिवार के सदस्यों की जांच कराई गई।

परिवार के अन्य सदस्यों का इलाज बेहतर तरीके से चल रहा है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

घटना के बाद गांव में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। लोगों को ऐसे किसी भी तेल या घरेलू नुस्खे के इस्तेमाल से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी पौधे के बीज या उससे बने उत्पाद का इस्तेमाल बिना सही जानकारी और चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए। प्राकृतिक चीजें भी कई बार स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।

इस मामले ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा और मिलावट से जुड़े खतरे को सामने ला दिया है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि सत्यानाशी के बीजों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और इससे परिवार के सदस्यों पर क्या असर पड़ा।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और जांच एजेंसियां मामले की निगरानी कर रही हैं। एम्स गोरखपुर की रिपोर्ट और अन्य जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बेल्थरारोड के पशुहारी गांव में हुई इस घटना से स्थानीय लोग भी चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से बचने के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है, ताकि बिना जानकारी के किसी भी घरेलू उपचार का इस्तेमाल करने से बचा जा सके।

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