वृंदावन: उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि श्रद्धालुओं की ओर से दिया गया एक-एक पैसा सीधे मंदिर की दान पेटी या अधिकृत बैंक खाते में जमा किया जाए। इस आदेश के बाद मंदिर सेवायतों की पुरानी व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर में भक्तों द्वारा दिया गया दान भगवान को समर्पित होता है और किसी भी व्यक्ति को इसे निजी रूप से रखने या उपयोग करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने चढ़ावे की पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

चढ़ावे की रकम पर अब नहीं होगा निजी नियंत्रण
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मंदिर में आने वाले दान की राशि को लेकर नई व्यवस्था लागू होगी। अब चढ़ावा सीधे मंदिर के आधिकारिक कोष में जमा किया जाएगा। अदालत ने कहा कि मंदिर की आय का सही हिसाब रखा जाना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखा जा सके और किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना खत्म हो।
सेवायतों की भूमिका पर उठे सवाल
बांके बिहारी मंदिर में सेवायतों की पारंपरिक भूमिका लंबे समय से रही है। हालांकि चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत के निर्देश के बाद मंदिर सेवायतों के अधिकारों और दायित्वों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। खासतौर पर जगमोहन में मिलने वाले चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर सवाल उठे थे।
मंदिर की संपत्ति को लेकर भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के धन से जमीन या अन्य संपत्ति खरीदने से जुड़े मामलों में भी सावधानी बरतने को कहा है। अदालत ने निर्देश दिया है कि मंदिर कोष से किसी भी संपत्ति खरीदने के प्रस्ताव को न्यायालय के सामने रखा जाए और अनुमति के बाद ही आगे बढ़ा जाए।
पारदर्शी व्यवस्था बनाने के निर्देश
अदालत ने मंदिर प्रबंध समिति को ऐसा सिस्टम तैयार करने को कहा है, जिसमें दान राशि का पूरा रिकॉर्ड रखा जा सके। इससे श्रद्धालुओं को भी भरोसा मिलेगा कि उनके द्वारा दिया गया दान सही तरीके से धार्मिक और जनहित कार्यों में इस्तेमाल हो रहा है।
श्रद्धालुओं के हित में बड़ा कदम
बांके बिहारी मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में शामिल है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में चढ़ावा अर्पित करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता लाने और श्रद्धालुओं की आस्था बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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