Government का बड़ा कदम, पारंपरिक दस्तकारों को प्रशिक्षण के साथ मिलेगी टूलकिट
सहारनपुर : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय दस्तकारों एवं पारंपरिक कारीगरों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने, उनके कौशल को बेहतर बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उपायुक्त उद्योग अजय कुमार त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत इस योजना में पात्र लाभार्थियों को 10 दिवसीय कौशल वृद्धि प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रशिक्षण अवधि में अर्द्धकुशल श्रमिक के समान मानदेय और कारीगरों को आवश्यक टूलकिट उपलब्ध कराने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
उन्होंने बताया कि योजना का उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को आधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधनों से जोड़ना है, ताकि वे अपने काम को और अधिक प्रभावी तरीके से कर सकें तथा उनकी आय में वृद्धि हो सके।
इन कारीगरों को मिलेगा योजना का लाभ
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत कई प्रकार के पारंपरिक कारीगरों को शामिल किया गया है। इनमें बढ़ई, नाई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, सोनार, टोकरी बुनकर, राजमिस्त्री, हलवाई, मोची और धोबी आदि शामिल हैं।
इन क्षेत्रों से जुड़े पात्र लाभार्थी योजना का लाभ लेने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने इच्छुक कारीगरों से समय पर आवेदन करने की अपील की है।
आवेदन के लिए जरूरी पात्रता
उपायुक्त उद्योग अजय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना आवश्यक है। साथ ही आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए और वह जिस दस्तकारी के लिए आवेदन कर रहा है, उससे संबंधित कार्य से जुड़ा होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत एक परिवार से केवल एक ही सदस्य पात्र माना जाएगा। इसके अलावा आवेदक को अपने कारीगरी से जुड़े होने का प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। यह प्रमाण पत्र ग्राम प्रधान, नगर पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका, नगर निगम के वार्ड सदस्य आदि द्वारा जारी किया जा सकता है।
हालांकि, जिन कारीगरों के पास हस्तशिल्प पहचान पत्र उपलब्ध है, उन्हें कारीगरी से जुड़े प्रमाण पत्र की अनिवार्यता से छूट दी गई है।
कारीगरों को मिलेगा रोजगार मजबूत करने का अवसर
विभाग के अनुसार, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना पारंपरिक हुनर को बढ़ावा देने और कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण और टूलकिट मिलने से कारीगर अपने काम की गुणवत्ता में सुधार कर सकेंगे और बाजार में बेहतर अवसर प्राप्त कर पाएंगे।
अधिकारियों ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि अधिक से अधिक पात्र दस्तकार इस योजना से जुड़ें और अपने पारंपरिक व्यवसाय को नई दिशा दें। इससे न केवल कारीगरों की आय बढ़ेगी, बल्कि प्रदेश की पारंपरिक कला और हुनर को भी संरक्षण मिलेगा।
सहारनपुर जिले के पात्र कारीगरों से अपील की गई है कि वे योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करें और सरकार की इस पहल से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ें।