गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक दिल दहला देने वाले तेजाब हमले के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। छह साल पहले तीन सगी बहनों पर तेजाब फेंककर उन्हें गंभीर रूप से घायल करने वाले 24 वर्षीय युवक को विशेष अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) आलोक शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया। इस मामले में सबसे बड़ी पीड़ित बड़ी बहन खुशबू को हमले में गंभीर चोटें आई थीं। उनका चेहरा बुरी तरह झुलस गया था और एक आंख की रोशनी भी चली गई थी। अदालत के फैसले को पीड़ित परिवार के लिए छह साल लंबे इंतजार के बाद न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
2020 में आधी रात को तीनों बहनों पर हुआ था तेजाब हमला
यह मामला गोंडा जिले के परसपुर थाना क्षेत्र के पसका गांव का है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पीड़िताओं के पिता गुरई ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि 12 और 13 अक्टूबर 2020 की दरमियानी रात एक अज्ञात व्यक्ति उनके घर की छत पर पहुंच गया था। उस समय उनकी तीनों बेटियां घर की छत पर सो रही थीं।
आरोपी ने सो रही तीनों बहनों खुशबू, कोमल और आंचल पर तेजाब फेंक दिया। अचानक हुए इस हमले से तीनों बहनें बुरी तरह झुलस गईं। रात के समय हुई इस घटना से परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजन तत्काल घायल बेटियों को उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे।
तेजाब के हमले में तीनों बहनों को गंभीर चोटें आईं। सबसे ज्यादा नुकसान बड़ी बहन खुशबू को हुआ। उनका चेहरा बुरी तरह झुलस गया और एक आंख की रोशनी भी चली गई। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।
एकतरफा प्रेम में शादी तय होने से नाराज था आरोपी
पुलिस की जांच में इस हमले के पीछे की वजह एकतरफा प्रेम सामने आई थी। जांच के दौरान गांव के ही रहने वाले आशीष जायसवाल का नाम आरोपी के रूप में सामने आया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आशीष जायसवाल खुशबू से एकतरफा प्रेम करता था।
बताया गया कि जब खुशबू की शादी दूसरी जगह तय हुई तो आरोपी नाराज हो गया। इसी नाराजगी और रंजिश में उसने तीनों बहनों को निशाना बनाया। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई।
इस मामले में खास बात यह रही कि आरोपी ने कथित तौर पर खुशबू को निशाना बनाने के लिए उसके साथ सो रही दोनों बहनों पर भी तेजाब फेंका। इस हमले में तीनों की जिंदगी प्रभावित हुई। विशेष रूप से खुशबू को ऐसी शारीरिक क्षति पहुंची, जिसका असर उनके पूरे जीवन पर पड़ सकता है।
छह साल तक चली सुनवाई, विशेष अदालत ने सुनाया फैसला
तेजाब हमले के इस मामले की सुनवाई गोंडा की विशेष अदालत (एससी/एसटी एक्ट) में हुई। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक कृष्ण प्रताप सिंह ने पैरवी की। अदालत के सामने घटना से जुड़े साक्ष्य, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलें रखी गईं।
सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद विशेष न्यायाधीश आलोक शर्मा ने आशीष जायसवाल को दोषी करार दिया। इसके बाद 30 अक्टूबर 2026 को अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषी पर 2 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
करीब छह साल तक चले इस मामले में फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार को न्यायिक प्रक्रिया के जरिए राहत मिली है। अदालत का यह निर्णय तेजाब हमले जैसे गंभीर अपराधों के मामलों में न्यायिक जवाबदेही के महत्व को भी सामने लाता है।
जुर्माने की रकम पीड़िताओं को मिलेगी
इस मामले में सजा के साथ आर्थिक प्रतिकर का पहलू भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने निर्देश दिया है कि 2 लाख रुपये का जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दोषी को दो साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
जुर्माने की राशि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 395 के तहत वादी और पीड़िताओं को प्रतिकर के रूप में दिए जाने का निर्देश दिया गया है। इससे पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता भी खुलेगा।
तेजाब हमले के कारण खुशबू को चेहरे और आंखों में गंभीर क्षति पहुंची थी। ऐसी घटनाओं में पीड़ितों को लंबे समय तक इलाज, पुनर्वास और मानसिक संबल की जरूरत होती है। इसलिए अदालत की ओर से प्रतिकर का प्रावधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तेजाब हमले ने तीनों बहनों की जिंदगी बदल दी
इस घटना को छह साल बीत चुके हैं, लेकिन इसके दुष्परिणाम पीड़िताओं के जीवन से जुड़े हुए हैं। तेजाब हमले में किसी व्यक्ति को केवल शारीरिक चोट नहीं पहुंचती, बल्कि उसका आत्मविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो सकता है।
खुशबू की एक आंख की रोशनी चले जाने और चेहरे के गंभीर रूप से झुलसने की जानकारी इस हमले की गंभीरता बताती है। वहीं उनकी दोनों बहनों को भी इस वारदात का दर्द झेलना पड़ा।
गोंडा की विशेष अदालत का यह फैसला ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त न्यायिक कार्रवाई का संदेश देता है। छह साल पुराने इस मामले में आजीवन कारावास और 2 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाए जाने के बाद अब पीड़ित परिवार को आगे के जीवन में इलाज, पुनर्वास और जरूरी सहायता मिलना भी अहम रहेगा।