क्राइम सीन से कोर्ट तक फोरेंसिक का सफर, एमिटी में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
Noida नोएडा : अपराध की जांच और दोषियों तक पहुंचने में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। आधुनिक न्याय व्यवस्था में फोरेंसिक विज्ञान को एक महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। इसी विषय को लेकर नोएडा स्थित एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस में शुक्रवार को ‘अपराधिक स्थल की जांच’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में फोरेंसिक विज्ञान और खोजी पत्रकारिता से जुड़े विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को अपराध जांच की आधुनिक तकनीकों और चुनौतियों से अवगत कराया।
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश स्टेट फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के सेवानिवृत्त निदेशक और नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी, भोपाल के पूर्व ओएसडी (एकेडमिक्स) डॉ. हर्ष शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार शम्स ताहिर खान ने भी विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए और फोरेंसिक विज्ञान तथा पत्रकारिता के बदलते संबंधों पर चर्चा की।
डॉ. हर्ष शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि फोरेंसिक शब्द लैटिन भाषा के ‘फोरम’ शब्द से निकला है, जिसका अर्थ न्याय होता है। उन्होंने बताया कि पहले आपराधिक मामलों में फैसले मुख्य रूप से प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध जानकारी के आधार पर लिए जाते थे। कई बार मानवीय भूल, भ्रम या पूर्वाग्रह के कारण जांच प्रभावित हो सकती थी, लेकिन फोरेंसिक विज्ञान ने जांच प्रक्रिया को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया है।
उन्होंने कहा कि अपराध स्थल से मिले छोटे से छोटे साक्ष्य भी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्यों का संग्रह, संरक्षण और विश्लेषण अपराध की सच्चाई तक पहुंचने में मदद करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपराध स्थल के प्रबंधन, साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया और अदालत में उनकी स्वीकार्यता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
डॉ. शर्मा ने ‘चेन ऑफ कस्टडी’ के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसी भी साक्ष्य को सुरक्षित रखने और उसकी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि उसकी पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जाए। यदि साक्ष्य के रखरखाव में लापरवाही होती है तो अदालत में उसकी वैधानिक स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए वैज्ञानिक सोच, ईमानदारी, धैर्य और नैतिक मूल्यों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की जिम्मेदारी केवल तकनीकी जांच तक सीमित नहीं होती, बल्कि उन्हें न्याय दिलाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है।
करियर इंटरेक्शन सत्र के दौरान वरिष्ठ पत्रकार शम्स ताहिर खान ने खोजी पत्रकारिता और फोरेंसिक विज्ञान के संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अपराध रिपोर्टिंग में वैज्ञानिक जानकारी का महत्व काफी बढ़ गया है। उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासु, निष्पक्ष और आलोचनात्मक सोच विकसित करने की सलाह दी।
शम्स ताहिर खान ने कहा कि हर अपराध स्थल अपने आप में अलग होता है और प्रभावी जांच के लिए समय पर घटनास्थल पर पहुंचना बेहद जरूरी होता है। उन्होंने पत्रकारिता में तथ्यों की पुष्टि और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
एमिटी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमरनाथ मिश्रा ने कहा कि फोरेंसिक विज्ञान आज आपराधिक न्याय प्रणाली का मजबूत स्तंभ बन चुका है। विशेषज्ञों के साथ इस तरह के संवाद विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक जांच प्रक्रिया को समझने का अवसर देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों ने विशेषज्ञों से फोरेंसिक जांच की नई तकनीकों, अपराध विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग और इस क्षेत्र में उपलब्ध करियर अवसरों पर चर्चा की। छात्रों ने इस व्याख्यान को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें फोरेंसिक विज्ञान के व्यावहारिक पहलुओं को समझने में मदद मिली।