अलीगढ़ : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सामने आए हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस गिरोह का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। शुरुआती तौर पर मामला भाजपा नेता और बरौली चेयरमैन से जुड़ा माना जा रहा था, लेकिन पुलिस जांच में अब करीब 9 से 10 अन्य लोगों के भी गिरोह के जाल में फंसने के संकेत मिले हैं। इनमें होटल कारोबारी, कचौड़ी विक्रेता और खैर क्षेत्र का एक ग्राम प्रधान भी शामिल बताए जा रहे हैं। मंगलवार को दो से तीन लोग सीओ द्वितीय के कार्यालय पहुंचे और कथित तौर पर अपने साथ हुई घटना की जानकारी पुलिस को दी, लेकिन सामाजिक बदनामी के डर से किसी ने अभी तक लिखित शिकायत नहीं दी है।
मामले में नामजद वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप कौशिक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर और लोकेशन की भी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपों की पुष्टि के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।
मामले की शुरुआत पांच अगस्त को दर्ज एक मुकदमे से हुई थी। भाजपा के महानगर मीडिया प्रभारी और अधिवक्ता निधीश कांत भट्ट ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पूजा नाम की महिला और वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप कौशिक ने उन्हें कथित तौर पर हनीट्रैप में फंसाकर दो लाख रुपये वसूले। इस मामले में पुलिस ने महिला काजल और उसके पति श्रवण कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
इसके बाद रविवार देर शाम बरौली चेयरमैन मनोज सिंह ने क्वार्सी थाने में दूसरा मुकदमा दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरोह ने उनसे आठ लाख रुपये ऐंठे। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने उन्हें नशीला पदार्थ मिला पानी पिलाया और इसके बाद आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बना लिए। कथित तौर पर इन तस्वीरों और वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर उनसे रकम वसूली गई।
पुलिस की जांच में गिरफ्तार काजल और उसके पति श्रवण कुमार के मोबाइल फोन से कथित तौर पर कई वीडियो और फोटो बरामद हुए हैं। इन्हीं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के दौरान पुलिस को अन्य लोगों के भी गिरोह के संपर्क में आने या कथित तौर पर ब्लैकमेल किए जाने के संकेत मिले। पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरोह पिछले करीब डेढ़ साल से सक्रिय हो सकता है और लोगों को सुनियोजित तरीके से अपने जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करता था।
जांच में सामने आई कथित कार्यप्रणाली के मुताबिक गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, मैसेंजर और व्हाट्सऐप के माध्यम से लोगों से संपर्क करता था। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर फ्लैट पर बुलाया जाता और वहां नशीला पदार्थ देकर आपत्तिजनक वीडियो या फोटो बनाए जाते। बाद में इन्हीं तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे मांगे जाते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने कितने लोगों को अपना निशाना बनाया और इसमें कितने लोग सीधे तौर पर शामिल थे।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक 9 से 10 अन्य लोगों के फंसने के साक्ष्य मिले हैं। इनमें शहर के होटल कारोबारी, कचौड़ी विक्रेता और खैर क्षेत्र का ग्राम प्रधान भी शामिल बताया जा रहा है। इनमें से कुछ लोग मंगलवार को सीओ द्वितीय धनंजय सिंह के कार्यालय पहुंचे और पुलिस को अपनी आपबीती बताई। हालांकि, कथित घटना सार्वजनिक होने और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होने के डर से उन्होंने लिखित शिकायत देने से इनकार कर दिया। पुलिस अब ऐसे लोगों को भरोसे में लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए समझाने का प्रयास कर रही है।
सीओ द्वितीय धनंजय सिंह के अनुसार, यदि कोई पीड़ित लिखित तहरीर देता है तो तथ्यों के आधार पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि नामजद अधिवक्ता अनूप कौशिक की तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगाई गई हैं। उनकी लोकेशन और मोबाइल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
इस बीच मामले में राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है। अभी तक दो राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पुलिस सूत्रों के हवाले से कुछ अन्य प्रभावशाली लोगों के भी कथित तौर पर गिरोह के संपर्क में आने या शिकार बनने की चर्चा है। हालांकि, इन नामों की पुलिस ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए फिलहाल इन दावों को जांच के दायरे में चल रही जानकारी के तौर पर ही देखा जा रहा है।
मामले में नामजद वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप कौशिक ने पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आगामी बार एसोसिएशन चुनाव से पहले उनकी छवि खराब करने की साजिश के तहत उन्हें मामले में फंसाया गया है। पुलिस अब उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और उनके बचाव में दिए गए दावों की जांच कर रही है। सीडीआर, सीसीटीवी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
इस मामले में अब तक तीन मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें भाजपा नेता और बरौली चेयरमैन से जुड़े मामले के अलावा सोशल मीडिया पर कथित वीडियो वायरल करने को लेकर दर्ज मुकदमा भी शामिल है। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा था, कितने लोगों को निशाना बनाया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। फिलहाल पुलिस फरार नामजद आरोपी की तलाश के साथ संभावित पीड़ितों से शिकायत लेने और डिजिटल साक्ष्यों की जांच पर फोकस कर रही है।