सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ के जाली नोट मामला, नेपाल कनेक्शन की जांच तेज
सहारनपुर। सहारनपुर के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट से करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के मामले में जांच एजेंसियों ने नेपाल कनेक्शन की जांच तेज कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आए कुछ तथ्यों ने पुराने जाली नोट नेटवर्क की यादें ताजा कर दी हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस मामले के तार नेपाल में सक्रिय किसी गिरोह या पुराने नेटवर्क से जुड़े हैं।
साल 2008 में सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के करेंसी चेस्ट से चार करोड़ दो लाख रुपये के जाली नोट बरामद किए गए थे। उस समय जांच में नेपाल में बैठे आईएसआई से जुड़े लोगों की साजिश सामने आई थी। अब सहारनपुर मामले में भी नेपाल कनेक्शन सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां दोनों मामलों के बीच संभावित संबंध तलाश रही हैं।
नेपाल में जाली नोटों के साथ पकड़े गए थे दो छात्र
जांच एजेंसियों को शक उस समय और गहरा हुआ, जब 31 जुलाई को नेपाल के रूपन्देही जिले में दो भारतीय छात्रों को जाली नोटों के साथ पकड़ा गया।
जानकारी के अनुसार, दोनों छात्र सहारनपुर की ग्लोकल यूनिवर्सिटी में बीएएमएस की पढ़ाई कर रहे थे। इनमें एक छात्र सिद्धार्थनगर का रहने वाला है, जबकि दूसरा महाराष्ट्र का निवासी बताया जा रहा है।
पुलिस और जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन छात्रों का संबंध सहारनपुर के करेंसी चेस्ट में मिले जाली नोटों से तो नहीं है।
सिद्धार्थनगर और महाराष्ट्र के छात्रों पर नजर
जांच में सामने आया है कि सिद्धार्थनगर निवासी अभिषेक कसौधन और महाराष्ट्र निवासी यश बीएएमएस के तीसरे सेमेस्टर के छात्र थे।
बताया जा रहा है कि दोनों नेपाल के रूपन्देही क्षेत्र में रेलवे स्टेशन के पास प्रैक्टिस भी करते थे। इसी दौरान उनके पास से भारतीय जाली नोट मिलने की बात सामने आई।
अब एजेंसियां दोनों छात्रों की गतिविधियों, संपर्कों और नेपाल में उनके नेटवर्क की जांच कर रही हैं।
पुराने जाली नोट नेटवर्क से जुड़ रहे तार
सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट मामले की जांच में नेपाल कनेक्शन सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पुराने मामलों की भी समीक्षा कर रही हैं।
2008 में डुमरियागंज के SBI करेंसी चेस्ट से बरामद जाली नोटों की जांच में नेपाल के रास्ते भारत में नकली मुद्रा पहुंचाने वाले नेटवर्क का खुलासा हुआ था।
उस समय जांच एजेंसियों ने पाया था कि नकली नोटों की तस्करी में सीमा पार बैठे तत्वों की भूमिका थी।
अब सहारनपुर मामले में भी एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं कोई पुराना नेटवर्क दोबारा सक्रिय तो नहीं हुआ है।
करेंसी चेस्ट में कैसे पहुंचे जाली नोट
सहारनपुर के PNB करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट मिलने से बैंकिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं।
जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि नकली नोट बैंक तक कैसे पहुंचे और किस स्तर पर उनकी पहचान नहीं हो सकी।
इसके लिए बैंक रिकॉर्ड, नोटों की जांच प्रक्रिया और करेंसी चेस्ट से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियां कर रहीं बहुस्तरीय जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हुई हैं। एजेंसियां नकली नोटों के स्रोत, सप्लाई चैन और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने का प्रयास कर रही हैं।
नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में सक्रिय नेटवर्क पर भी नजर रखी जा रही है।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि यदि यह मामला किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा है तो इसके तार कई राज्यों तक फैल सकते हैं।
सीमा पार से नकली नोटों की चुनौती
भारत में नकली नोटों की तस्करी लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती रही है। नेपाल की खुली सीमा का इस्तेमाल कई बार अवैध गतिविधियों के लिए किए जाने की आशंका जताई जाती रही है।
हालांकि, एजेंसियां हर मामले की अलग-अलग जांच करती हैं और ठोस सबूत मिलने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचती हैं।
आगे की जांच में सामने आएगा पूरा नेटवर्क
फिलहाल सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट मामले में जांच जारी है। नेपाल में पकड़े गए दोनों छात्रों से जुड़ी जानकारी भी जांच में शामिल की जा रही है।
एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या दोनों घटनाओं के पीछे एक ही नेटवर्क काम कर रहा है या यह अलग-अलग मामले हैं।
17 करोड़ रुपये के जाली नोटों की बरामदगी को सुरक्षा एजेंसियां गंभीर चुनौती मान रही हैं और मामले की हर कड़ी को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।