अयोध्या: सावन माह के पावन अवसर पर अयोध्या से करीब 30 किलोमीटर दूर शाहगंज बाजार के समीप स्थित रमपुरवा गांव में आस्था और भक्ति का अनोखा दृश्य देखने को मिला। यहां करीब 500 वर्ष पुराने प्रसिद्ध विघ्नेश्वर धाम शिवाला मंदिर में 60 फीट ऊंचे और 11 फीट चौड़े विशाल महा त्रिशूल की स्थापना की गई। महा त्रिशूल की स्थापना के साथ ही मंदिर परिसर में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल बन गया।
सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। इसी धार्मिक अवसर पर मंदिर परिसर में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान विशाल त्रिशूल स्थापित किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने और पूजा-अर्चना कर भगवान भोलेनाथ से आशीर्वाद मांगा।
रमपुरवा स्थित विघ्नेश्वर धाम शिवाला मंदिर क्षेत्र में प्राचीन आस्था का केंद्र माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास करीब पांच सौ वर्ष पुराना है और लंबे समय से आसपास के गांवों के श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करने आते रहे हैं। सावन के दौरान मंदिर में भक्तों की संख्या और भी बढ़ जाती है।
मंदिर परिसर में स्थापित किया गया विशाल महा त्रिशूल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। 60 फीट ऊंचे इस त्रिशूल को दूर से ही देखा जा सकता है। इसकी भव्यता और धार्मिक महत्व के कारण आसपास के क्षेत्रों से लोग इसे देखने और दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
त्रिशूल को भगवान शिव का प्रमुख प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रिशूल शक्ति, संतुलन और बुराइयों के विनाश का प्रतीक है। शिव मंदिरों में त्रिशूल का विशेष महत्व होता है और इसे भगवान शिव की उपस्थिति तथा दिव्य शक्ति से जोड़ा जाता है। इसी धार्मिक भावना के साथ विघ्नेश्वर धाम में इस विशाल त्रिशूल की स्थापना की गई है।
स्थापना कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और महा त्रिशूल के दर्शन कर अपनी श्रद्धा प्रकट की। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और धार्मिक जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महा त्रिशूल की स्थापना से मंदिर की धार्मिक पहचान और मजबूत होगी। उनका मानना है कि यह स्थान आने वाले समय में एक बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि इस भव्य त्रिशूल के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचेंगे।
मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों ने बताया कि त्रिशूल स्थापना का उद्देश्य धार्मिक आस्था को बढ़ावा देना और मंदिर परिसर को और अधिक आकर्षक बनाना है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
सावन के महीने में भगवान शिव के मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। कांवड़ यात्रा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक जैसे कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। इसी क्रम में अयोध्या क्षेत्र के इस प्राचीन शिव मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ पहुंच रही है।
धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या के साथ-साथ आसपास स्थित प्राचीन धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की रुचि बढ़ी है। ऐसे में रमपुरवा स्थित विघ्नेश्वर धाम शिवाला मंदिर में स्थापित 60 फीट ऊंचा महा त्रिशूल क्षेत्र के धार्मिक आकर्षण को और बढ़ा सकता है।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने कहा कि सावन जैसे पवित्र महीने में इतने विशाल त्रिशूल के दर्शन करना उनके लिए विशेष अनुभव है। कई भक्तों ने इसे भगवान शिव की कृपा और मंदिर की धार्मिक परंपरा का विस्तार बताया।
महा त्रिशूल की स्थापना के बाद मंदिर परिसर में लगातार श्रद्धालुओं का आना जारी है। स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से भी श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान दिया जा रहा है।
विघ्नेश्वर धाम शिवाला मंदिर में स्थापित यह विशाल महा त्रिशूल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। पांच सौ वर्ष पुराने मंदिर में सावन के अवसर पर हुई यह स्थापना धार्मिक आस्था, परंपरा और आधुनिक भव्यता का अनोखा संगम प्रस्तुत कर रही है।