लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और सशक्तीकरण के साथ उनकी राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में राजधानी लखनऊ में दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान और राजाजीपुरम स्थित पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी का विषय ‘नारी की राजनीतिक चुनौतियां एवं नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ रखा गया। कार्यक्रम में छात्राओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका, राजनीतिक नेतृत्व और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं का सशक्तीकरण केवल सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में भी उनकी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। लोकतंत्र में महिलाओं की सक्रिय हिस्सेदारी से न केवल उनके मुद्दों को प्रभावी प्रतिनिधित्व मिलेगा बल्कि शासन व्यवस्था भी अधिक समावेशी बनेगी।

केवल सम्मान नहीं अब नेतृत्व का भी अवसर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के निदेशक सर्वेश कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी हमेशा से शक्ति, सृजन और संवेदना का प्रतीक रही है। महिलाओं ने परिवार और समाज से लेकर शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल और राजनीति तक हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है।

उन्होंने कहा कि अब महिलाओं को केवल सम्मान देने की बात तक सीमित रहने का समय नहीं है। उन्हें निर्णय लेने, नेतृत्व करने और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने के समान अवसर भी मिलने चाहिए। महिलाओं को जब निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा तो लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत होगी।

सर्वेश कुमार सिंह ने छात्राओं को राजनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की महिलाओं को अपने संवैधानिक अधिकारों की जानकारी होने के साथ यह भी समझना होगा कि लोकतंत्र में उनकी भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर हुई चर्चा

संगोष्ठी के दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ पर विशेष चर्चा की गई। संविधान के 106वें संशोधन के रूप में सामने आए इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है।

वक्ताओं ने इसे भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना था कि महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने से नीति निर्माण में उनके अनुभव, दृष्टिकोण और समस्याओं को अधिक प्रभावी तरीके से शामिल किया जा सकेगा।

संगोष्ठी में यह भी बताया गया कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व केवल चुनाव लड़ने तक सीमित विषय नहीं है। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का अर्थ नीति निर्माण, प्रशासनिक निर्णय, सामाजिक मुद्दों और विकास की प्राथमिकताओं को तय करने में उनकी सक्रिय भूमिका से भी है।

छात्राओं को संवैधानिक अधिकारों की जानकारी

कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य छात्राओं को उनके संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उपलब्ध अवसरों की जानकारी देना रहा। वक्ताओं ने कहा कि युवा महिलाओं को देश की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था को समझना चाहिए।

छात्राओं को बताया गया कि मतदान करने के साथ लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी के कई अन्य माध्यम भी हैं। सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता, जनप्रतिनिधियों से संवाद, स्थानीय निकायों में भागीदारी और राजनीतिक नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में महिलाएं अपनी भूमिका मजबूत कर सकती हैं।

युवा पीढ़ी को संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी देने से भविष्य में अधिक महिलाएं सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक नेतृत्व की तरफ आगे बढ़ सकती हैं।

महिलाओं के सामने राजनीतिक चुनौतियों पर मंथन

संगोष्ठी में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के रास्ते में आने वाली चुनौतियों पर भी विचार किया गया। वक्ताओं ने सामाजिक सोच, संसाधनों तक पहुंच, राजनीतिक अवसरों और निर्णय प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व जैसे विषयों पर चर्चा की।

महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी अनुकूल वातावरण तैयार करने की आवश्यकता बताई गई। परिवार और समाज का सहयोग महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

संगोष्ठी के माध्यम से छात्राओं को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि वे स्वयं को केवल मतदाता के रूप में न देखें बल्कि भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में भी तैयार करें।

महिला सशक्तीकरण में शिक्षा की अहम भूमिका

कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण और शिक्षा के बीच संबंध पर भी जोर दिया गया। शिक्षित और जागरूक महिलाएं अपने अधिकारों को बेहतर तरीके से समझ सकती हैं और सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर स्वतंत्र निर्णय ले सकती हैं।

महिला महाविद्यालय में इस विषय पर संगोष्ठी आयोजित करने का उद्देश्य भी युवा छात्राओं को राजनीतिक और संवैधानिक विषयों से जोड़ना रहा। वक्ताओं ने छात्राओं को अपने आसपास होने वाले सामाजिक और राजनीतिक बदलावों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।

लोकतंत्र में बढ़े महिलाओं की भागीदारी

दो दिवसीय संगोष्ठी में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लोकतंत्र की मजबूती से जोड़कर देखा गया। वक्ताओं का कहना था कि देश की आबादी में महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए निर्णय लेने वाली संस्थाओं में भी उनकी प्रभावी मौजूदगी जरूरी है।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर नए दृष्टिकोण सामने आ सकते हैं। इससे शासन और नीति निर्माण में समाज के अलग-अलग वर्गों की जरूरतों का बेहतर प्रतिनिधित्व संभव होगा।

लखनऊ में आयोजित इस संगोष्ठी के माध्यम से छात्राओं को संदेश दिया गया कि महिला सशक्तीकरण का अगला महत्वपूर्ण चरण नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में बराबर भागीदारी है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रावधानों के साथ महिलाओं में राजनीतिक जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भूमिका को पहचानें और भविष्य में नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने के लिए आगे आएं।

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