नोएडा में निर्माण और विध्वंस साइटों पर बढ़ी निगरानी, एनजीटी ने मांगे प्रदूषण नियंत्रण के सबूत
नोएडा। नोएडा में निर्माण और विध्वंस (C&D) स्थलों से बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर अब निगरानी व्यवस्था सख्त कर दी गई है। शहर में लगातार चल रहे बड़े निर्माण कार्यों और नियमों की अनदेखी के मामलों को देखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) से प्रदूषण नियंत्रण उपायों के संबंध में साक्ष्य मांगे हैं।
एनजीटी के निर्देश के बाद यूपीपीसीबी ने निर्माण और विध्वंस स्थलों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। बोर्ड की टीम इन साइटों पर जाकर प्रदूषण रोकने के लिए लगाए गए इंतजामों की जांच कर रही है। इसके साथ ही पीटीजेड (पैन-टिल्ट-जूम) कैमरों की स्थिति भी देखी जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निगरानी व्यवस्था प्रभावी रूप से काम कर रही है या नहीं।
निर्माण स्थलों की तैयार की गई सूची
नोएडा में वायु प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख निर्माण और विध्वंस स्थलों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की गई है। इन स्थलों को चिन्हित कर अब नियमित निरीक्षण किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, सेक्टर-150, 142, 140, 94 और 125 समेत कई क्षेत्रों में लंबे समय से निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन जगहों पर बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियां होने के कारण धूल और अन्य प्रदूषक तत्वों का स्तर बढ़ने की आशंका रहती है।
वायु प्रदूषण में निर्माण कार्यों की बड़ी हिस्सेदारी
प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, हर साल शहर के वायु प्रदूषण में निर्माण और विध्वंस स्थलों की हिस्सेदारी काफी अधिक रहती है। कई रिपोर्टों में निर्माण गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण को एक बड़ी वजह माना गया है।
निर्माण स्थलों पर मिट्टी, सीमेंट, रेत और मलबे के खुले में पड़े रहने से धूल के कण हवा में मिल जाते हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नियमों की अनदेखी से बढ़ती समस्या
कई बार निर्माण स्थलों पर निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जाता। खुले में निर्माण सामग्री रखना, पानी का छिड़काव न करना, मलबे को ढककर न रखना और वाहनों से निकलने वाली धूल को नियंत्रित न करना जैसी लापरवाहियां सामने आती रही हैं।
इन कारणों से आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है।
पीटीजेड कैमरों की जांच शुरू
एनजीटी के निर्देश के बाद यूपीपीसीबी ने निर्माण और विध्वंस स्थलों पर लगे पीटीजेड कैमरों की जांच शुरू की है। इन कैमरों के जरिए साइट की गतिविधियों पर दूर से नजर रखी जाती है।
जांच के दौरान यह देखा जा रहा है कि कैमरे सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं और क्या इनके जरिए नियमों के उल्लंघन की निगरानी हो रही है।
अधिकारियों का कहना है कि प्रभावी निगरानी के लिए तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
प्रदूषण नियंत्रण उपायों की होगी जांच
यूपीपीसीबी की टीम निर्माण स्थलों पर कई बिंदुओं की जांच कर रही है। इनमें धूल नियंत्रण के उपाय, पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढककर रखना, मलबे का उचित निपटान और वाहनों की आवाजाही से होने वाले प्रदूषण को रोकने के इंतजाम शामिल हैं।
अगर किसी साइट पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
लोगों को राहत देने की कोशिश
नोएडा में तेजी से हो रहे विकास कार्यों के बीच प्रदूषण नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बन गया है। शहर में लगातार नए प्रोजेक्ट और निर्माण गतिविधियां चल रही हैं, ऐसे में पर्यावरण संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
प्रशासन का प्रयास है कि विकास कार्यों के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का भी पालन कराया जाए, ताकि लोगों को खराब हवा से राहत मिल सके।
आगे भी जारी रहेगा निरीक्षण अभियान
यूपीपीसीबी अधिकारियों के अनुसार, निर्माण और विध्वंस स्थलों की जांच आगे भी जारी रहेगी। एनजीटी को निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था से जुड़े तथ्य उपलब्ध कराए जाएंगे।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निरीक्षण के बाद कितनी साइटों पर नियमों के पालन में कमी सामने आती है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
नोएडा में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण स्थलों की निगरानी को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है। एनजीटी की सख्ती के बाद उम्मीद है कि निर्माण एजेंसियां भी प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लेकर अधिक गंभीरता दिखाएंगी।