कानपुर। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और सरकारी कामों में पारदर्शिता को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती का असर अब जिलों में भी दिखाई देने लगा है। कानपुर में नगर निगम ने बड़ा कदम उठाते हुए ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी कमेटी को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इसके साथ ही संबंधित मामलों में होने वाले भुगतान पर भी रोक लगा दी गई है।
नगर निगम के इस फैसले के बाद ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों में हलचल मच गई है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी कार्यों में किसी भी तरह की अनियमितता, नियमों की अनदेखी या मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ठेकेदारों के पंजीकरण पर उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक, कानपुर नगर निगम में ठेकेदारों के पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। आरोप था कि कुछ मामलों में तय नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम प्रशासन ने जांच शुरू कराई। जांच के दौरान प्रक्रिया में कुछ कमियां सामने आने के बाद संबंधित कमेटी को भंग करने का फैसला लिया गया।
अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदारों के पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि योग्य ठेकेदारों को ही सरकारी काम मिल सके।
कमेटी को किया गया रद्द
नगर निगम ने ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन से संबंधित कमेटी को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। अब नई व्यवस्था के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि कमेटी के गठन और ठेकेदारों के चयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसलिए पुराने निर्णयों की समीक्षा की जा रही है।
इस फैसले के बाद नगर निगम के सभी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
भुगतान पर लगाई गई रोक
नगर निगम ने केवल कमेटी ही नहीं रद्द की, बल्कि संबंधित भुगतान प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी है। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि जांच पूरी होने तक किसी भी संदिग्ध मामले में भुगतान नहीं किया जाएगा।
इस कदम को सरकारी धन के सही इस्तेमाल और वित्तीय अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि अगर जांच में किसी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सीएम योगी के निर्देशों का असर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अधिकारियों को निर्देश देते रहे हैं कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखी जाए। उन्होंने कई बार कहा है कि भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कानपुर नगर निगम का यह कदम इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्यों में गुणवत्ता और ईमानदारी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ठेकेदारों में मचा हड़कंप
नगर निगम के इस फैसले के बाद ठेकेदारों में हड़कंप की स्थिति है। कई ठेकेदार अब अपने दस्तावेज और प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा कर रहे हैं।
ठेकेदारों का कहना है कि अगर कोई कमी है तो उसे दूर किया जाना चाहिए, लेकिन योग्य और नियमों के अनुसार काम करने वालों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई केवल उन्हीं मामलों में होगी जहां नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा।
विकास कार्यों पर भी नजर
नगर निगम द्वारा कराए जाने वाले सड़क, नाली, निर्माण और अन्य विकास कार्यों में ठेकेदारों की भूमिका अहम होती है। ऐसे में ठेकेदारों के चयन और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी मानी जाती है।
अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ठेकेदारों की जांच और निगरानी जरूरी है।
आगे की प्रक्रिया
अब नगर निगम नई कमेटी बनाकर ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। इसके साथ ही पुराने मामलों की भी समीक्षा की जाएगी।
जांच पूरी होने के बाद ही भुगतान और अन्य प्रक्रियाओं पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
प्रशासन का सख्त संदेश
कानपुर नगर निगम की इस कार्रवाई को सरकारी तंत्र में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
सीएम योगी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आने वाले दिनों में भी ऐसे कदम उठाए जाने की संभावना है।
फिलहाल ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन कमेटी को रद्द करने और भुगतान रोकने के फैसले के बाद कानपुर नगर निगम में हलचल तेज है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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