सरकारी स्कूलों के विलय पर हाईकोर्ट में सुनवाई, 3 जुलाई को होगी अहम सुनवाई
Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश : परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों के विलय (मर्जर) के आदेश को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। लखनऊ पीठ में इस संबंध में दायर याचिकाओं पर 3 जुलाई को सुनवाई निर्धारित की गई है।
याचिकाओं में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 16 जून को जारी उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की संख्या के आधार पर उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में विलय करने का प्रावधान किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने इसे मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला बताया है और मर्जर से छोटे बच्चों के स्कूलों से दूर हो जाने की परेशानियों का मुद्दा भी उठाया है।
याचिकाओं में प्राथमिक स्कूलों की चल रही मर्जर की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की भी गुजारिश की गई है। सुनवाई के समय राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थाई अधिवक्ता (सीएससी) शैलेंद्र कुमार सिंह पेश हुए, जबकि याचियों की ओर से अधिवक्ता डॉ. एल पी मिश्र और गौरव मेहरोत्रा पेश हुए। कोर्ट ने मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को करने का आदेश दिया है। इससे पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ही परिसर में चल रहे प्राथमिक और उच्च प्राथमिक परिषदीय विद्यालयों का संविलियन करने की प्रदेश सरकार की नीति को सही ठहराया था और दर्जनों याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
कोर्ट ने कहा था कि यह सरकार का नीतिगत निर्णय है और ऐसा कोई तथ्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका कि यह योजना किसी प्रकार से छात्रों के लिए नुकसानदेह है। हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को यह निर्देश भी दिया था कि वह एक कमेटी गठित कर अध्यापकों की समस्याओं का निस्तारण करें, ताकि प्रधानाध्यापक पद पर प्रोन्नति पाने के किसी के वैधानिक अधिकार का हनन न हो।