रामजन्मभूमि परिसर में ईंधन बचत की पहल, डीजल-पेट्रोल वाहनों के उपयोग में कटौती का निर्णय
Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत से जुड़ी अपील का असर अब धार्मिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए रामजन्मभूमि परिसर में डीजल और पेट्रोल से चलने वाले वाहनों के उपयोग को कम करने की घोषणा की है।
ट्रस्ट के इस फैसले के तहत परिसर में चल रहे विभिन्न कार्यों जैसे निर्माण, रखरखाव और व्यवस्थापन में अब पारंपरिक ईंधन वाहनों की जगह वैकल्पिक और कम ईंधन खपत वाले साधनों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य न केवल ईंधन की बचत करना है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देना है।
यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील के बाद लिया गया है, जिसमें उन्होंने देशभर में नागरिकों और संस्थानों से गैर-जरूरी ईंधन उपयोग कम करने का आग्रह किया था।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधिकारियों के अनुसार, परिसर में चल रहे कार्यों की प्रकृति को देखते हुए वाहनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा था, जिससे ईंधन खपत भी अधिक हो रही थी। अब इस पर नियंत्रण के लिए चरणबद्ध तरीके से बदलाव किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में परिसर में इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य पर्यावरण अनुकूल साधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की योजना भी बनाई जा रही है। साथ ही छोटे दूरी के कार्यों के लिए वाहनों के स्थान पर मैनुअल और मैकेनिकल साधनों का उपयोग भी बढ़ाया जाएगा।
यह कदम धार्मिक स्थलों पर पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर इस तरह के निर्णय समाज में जागरूकता बढ़ाने का काम करते हैं।
फिलहाल, ट्रस्ट द्वारा लागू किए जा रहे इस बदलाव को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा ताकि निर्माण कार्यों पर किसी प्रकार का असर न पड़े और साथ ही ईंधन की खपत में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।