औरैया : उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। अजीतमल तहसील क्षेत्र के ग्राम जगनपुर निवासी एक किसान को बिजली कनेक्शन कटवाने और मीटर विभाग में जमा करने के करीब नौ साल बाद लाखों रुपये की बकाया वसूली का नोटिस जारी कर दिया गया। तहसील से रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) पहुंचने के बाद किसान और उसका परिवार हैरान है।
ग्राम जगनपुर निवासी किसान रामकुमार पुत्र श्रीराम ने मंगलवार को विद्युत विभाग के अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की शिकायत की है। किसान का कहना है कि उसने वर्ष 2017 में अपने बिजली कनेक्शन को नियमानुसार स्थायी रूप से बंद करा दिया था। इसके बाद भी विभाग की ओर से वर्ष 2026 में उसके नाम पर 7,79,652 रुपये की बकाया राशि दिखाते हुए आरसी जारी कर दी गई।
रामकुमार के अनुसार, उनका विद्युत कनेक्शन संख्या 100339 था। उन्होंने वर्ष 2017 में बिजली कनेक्शन बंद कराने के लिए विभागीय प्रक्रिया पूरी की थी। विभाग की ओर से 28 दिसंबर 2017 को मीटर सीलिंग यानी पीडी (परमानेंट डिस्कनेक्शन) का प्रमाण पत्र भी जारी किया गया था। इसके बाद उन्होंने अपना बिजली मीटर विभाग में जमा कर दिया था।
किसान का दावा है कि कनेक्शन कटने के बाद उन्होंने कभी भी उस बिजली कनेक्शन का इस्तेमाल नहीं किया। न ही उनके नाम पर कोई बिजली आपूर्ति जारी रही। इसके बावजूद करीब नौ साल बाद विभाग ने उनके नाम पर लाखों रुपये की बकाया राशि निकाल दी और वसूली के लिए आरसी जारी कर दी।
तहसील प्रशासन की ओर से नोटिस मिलने के बाद रामकुमार और उनके परिवार में चिंता का माहौल है। किसान का कहना है कि जब उन्होंने समय पर कनेक्शन बंद करा दिया था और मीटर भी विभाग में जमा कर दिया था तो फिर इतने वर्षों बाद उनके नाम पर बकाया कैसे निकल गया। उन्होंने अधिकारियों से मामले की जांच कर आरसी वापस लेने की मांग की है।
पीड़ित किसान ने अपने प्रार्थना पत्र में वर्ष 2017 में जारी किए गए पीडी प्रमाण पत्र और मीटर जमा करने से जुड़े दस्तावेजों का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि विभागीय रिकॉर्ड में भी कनेक्शन बंद होने की जानकारी दर्ज होनी चाहिए। ऐसे में बिना जांच के उनके नाम पर इतनी बड़ी राशि का बकाया निकालना गलत है।
मामले के सामने आने के बाद विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता ने वर्षों पहले कनेक्शन बंद करा दिया है तो उसके नाम पर लंबे समय बाद बकाया राशि निकालना गंभीर लापरवाही का संकेत है। लोगों ने मांग की है कि विभाग को ऐसे मामलों की समीक्षा करनी चाहिए ताकि आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना न करना पड़े।
वहीं, अधिकारियों की ओर से अभी मामले की जांच किए जाने की बात कही जा रही है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर किस आधार पर किसान के नाम पर बकाया राशि दर्ज हुई और आरसी जारी की गई। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि रिकॉर्ड में गलती हुई है या किसी अन्य कारण से यह राशि दिखाई गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बिल और कनेक्शन से जुड़े विवाद अक्सर सामने आते रहते हैं। कई बार रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने या विभागीय लापरवाही के कारण उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में समय पर जांच और समाधान जरूरी होता है, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।
फिलहाल किसान रामकुमार ने अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। अब सभी की नजर विद्युत विभाग की जांच और आगे की कार्रवाई पर है। यदि जांच में विभागीय गलती सामने आती है तो किसान को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, इस मामले ने बिजली विभाग के रिकॉर्ड प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।