लखनऊ में एलडीए भूमि पर फर्जी NOC का खुलासा

Update: 2026-07-03 16:41 GMT
Lucknow: लखनऊ में गोमती नगर विस्तार क्षेत्र के ग्राम-अरदौनामऊ में एलडीए (लखनऊ विकास प्राधिकरण) की अर्जित भूमि से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां एक रियल एस्टेट कंपनी द्वारा कथित तौर पर जाली एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) तैयार कराकर जमीन से जुड़े विकास कार्यों को वैध दिखाने की कोशिश की गई। मामले का खुलासा तब हुआ जब एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निर्देश पर इसकी विस्तृत जांच कराई गई और पूरी सच्चाई सामने आ गई। जांच के बाद प्राधिकरण के नायब तहसीलदार की ओर से संबंधित रियल एस्टेट कंपनी और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ सुशांत गोल्फ सिटी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
एलडीए के सहायक चकबंदी अधिकारी तुलसीराम ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से एक पत्र प्राप्त हुआ था। इस पत्र में प्राधिकरण के सहायक चकबंदी अधिकारी (अर्जन) के नाम और हस्ताक्षर से एक एनओसी संलग्न थी, जो विभूतिखंड स्थित एक कंपनी के पक्ष में जारी दिखाई जा रही थी। जब इस दस्तावेज की जांच की गई तो पाया गया कि यह पत्र एलडीए द्वारा जारी ही नहीं किया गया था। इसके अलावा पत्र पर लगाए गए हस्ताक्षर और कार्यालय की मुहर भी पूरी तरह फर्जी पाए गए।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि यह कूटरचित एनओसी तहसील सरोजनी नगर के ग्राम-अरदौनामऊ की भूमि से संबंधित थी। आरोप है कि रियल एस्टेट कंपनी ने कुछ अज्ञात लोगों के सहयोग से इस फर्जी दस्तावेज को तैयार कराया ताकि स्थल पर विकास कार्यों को वैध दिखाया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि फर्जी पत्र में भूमि से जुड़े तथ्यों को भी गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और उसे वास्तविक दर्शाने का प्रयास किया गया।
एलडीए अधिकारियों के अनुसार ग्राम-अरदौनामऊ की यह भूमि पहले ही वर्ष 2001 में अमर शहीद पथ और गोमती नगर विस्तार योजना के अंतर्गत अधिग्रहित की जा चुकी है। अधिग्रहण की सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार और लखनऊ विकास प्राधिकरण के पास सुरक्षित है। इसलिए इस जमीन पर किसी भी प्रकार का निजी दावा या विकास कार्य अवैध माना जाता है।
सहायक चकबंदी अधिकारी तुलसीराम ने यह भी बताया कि इस पूरे मामले से स्पष्ट होता है कि संबंधित कंपनी और उससे जुड़े लोगों ने फर्जी दस्तावेज, गलत हस्ताक्षर और कूटरचित अभिलेख तैयार कर प्राधिकरण के नाम और उसकी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने का प्रयास किया है। इसी आधार पर पुलिस में शिकायत दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस घटना को गंभीर मानते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी जमीन की खरीद-बिक्री से पहले एलडीए से सभी दस्तावेजों की पूरी तरह जांच अवश्य करवा लें, ताकि किसी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि प्राधिकरण द्वारा कई योजनाओं के तहत भूमि का उपयोग किया जा रहा है, जिनमें वेलनेस सिटी योजना और आईटी सिटी योजना प्रमुख हैं।
वेलनेस सिटी योजना के लिए ग्राम बक्कास, मलूकपुर ढकवा, चौरहिया, चौरासी, दुलारमऊ, नूरपुर बेहटा और मस्तेमऊ की भूमि ली जा रही है। वहीं आईटी सिटी योजना के लिए तहसील मोहनलालगंज के ग्राम बक्कास, सोनई कंजेहरा, सिकंदरपुर अमोलिया, सिद्धपुरा, परेहटा, पहाड़नगर टिकरिया, रकीबाबाद, मोहारी खुर्द, खुजौली और भटवारा की भूमि पर धारा-11 लागू की गई है। इन सभी क्षेत्रों में भूमि खरीदते समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
इस पूरे प्रकरण के बाद एलडीए ने साफ किया है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार की फर्जी गतिविधि या दस्तावेजी हेरफेर को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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